छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में दीपावली के मौके पर सजे पटाखों के बाज़ार में इस बार एक अनोखा खिलौना खरीदारों की भारी भीड़ जुटा रहा है। आमतौर पर त्योहारों पर बिकने वाले खिलौना पिस्तौलों में बारूद से भरी विशेष टिकिया या प्लास्टिक गोलियों की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन बाज़ार में उतारी गई इस खास प्लास्टिक गन को चलाने के लिए किसी भी अलग विस्फोटक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। घरों में रोज़ाना इस्तेमाल होने वाली साधारण माचिस की तीली को इस गन में फिट करके ट्रिगर दबाते ही तेज़ आवाज़ के साथ जोरदार धमाका होता है। इस अनूठी बनावट और कम खर्च में बार-बार चलाने की सुविधा की वजह से यह गन इस त्योहारी सीज़न में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
रामसेतु पुल के पास सजी दुकान पर उमड़ रही ग्राहकों की भीड़
बिलासपुर स्थित रामसेतु पुल के नज़दीक यह अनोखी प्लास्टिक गन बेची जा रही है। विक्रेता रोहित सोनकर ने बताया कि वह इस त्योहारी सीज़न में बिक्री के लिए इस गन के लगभग 500 पीस लेकर आए हैं। दुकान खुलने और बिक्री शुरू होने के कुछ ही समय के भीतर करीब 20 पीस बिक चुके थे। रोहित सोनकर के अनुसार, खरीदारों की दिलचस्पी को देखते हुए उन्हें पूरा भरोसा है कि दीपावली की शाम तक उनकी दुकान का सारा स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। फिलहाल उनके पास ग्राहकों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त संख्या में गन उपलब्ध हैं और बाज़ार में आने वाले लोग इसे कौतूहल से देख रहे हैं।
बारूद के बिना माचिस की तीली से होता है मिर्ची पटाखे जैसा धमाका
इस प्लास्टिक गन की सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद सरल लेकिन दिलचस्प मैकेनिज्म है। सामान्य पटाखा बंदूकों में बारूद वाली गोलियों का अलग से पैकेट खरीदना पड़ता है, जबकि इसमें साधारण माचिस की एक तीली लगाई जाती है। जैसे ही गन का ट्रिगर दबाया जाता है, अंदरूनी दबाव और घर्षण से तीली के मसाले पर प्रहार होता है और पारंपरिक मिर्ची पटाखे जैसी तीखी और कानफाड़ू आवाज़ निकलती है। विक्रेता ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई तीली पहली बार में ठीक से नहीं जल पाती, तो उसे दोबारा सेट करके चलाया जा सकता है। दुकानदार ग्राहकों को सामने चलाकर इसका डेमो भी दे रहे हैं, जिससे बच्चों से लेकर बड़े तक इसकी कार्यप्रणाली देखकर आकर्षित हो रहे हैं।
महज़ 100 रुपये कीमत और एक रुपये की माचिस में कई बार धमाके
बाज़ार में इस ट्रेंडिंग खिलौना गन की खुदरा कीमत महज़ 100 रुपये तय की गई है। रोहित सोनकर का कहना है कि पारंपरिक पटाखा पिस्तौलों के लिए खरीदारों को समय-समय पर 30 से 40 रुपये खर्च करके अलग-अलग गोलियों के पैकेट खरीदने पड़ते थे, जिससे बार-बार अतिरिक्त खर्च होता था। इसके विपरीत, इस नई गन में महज़ एक रुपये वाली माचिस की डिब्बी से कई बार लगातार आवाज़ निकाली जा सकती है। यानी माचिस की एक डिब्बी में जितनी तीलियां मौजूद होती हैं, उतनी ही बार इस खिलौने से आवाज़ की जा सकती है। इसी किफायती खासियत और अलग अंदाज़ के चलते ग्राहक इसे हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
सुरक्षा के दावे और सावधानियों की ज़रूरत
विक्रेता रोहित सोनकर का दावा है कि इस गन में अलग से बारूद या खुली आग की चिंगारी का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे पारंपरिक पटाखों की तुलना में आग लगने का जोखिम काफी कम रहता है। हालांकि, केवल विक्रेता के मौखिक दावों के आधार पर इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता। किसी भी तेज़ आवाज़ करने वाले उपकरण या खिलौने का उपयोग करते समय सुरक्षा नियमों का पालन बेहद ज़रूरी है। बच्चों को यह खिलौना कभी भी अकेले इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए और इसे खरीदते समय इसकी प्लास्टिक गुणवत्ता व कार्यप्रणाली की पूरी जांच करनी चाहिए। इसके उपयोग के दौरान आंखों और कानों के बचाव पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।



















