मर चुके तारे के चारों ओर मिले दो गैसीय छल्ले, सौरमंडल के अंत की ओर किया बड़ा इशारारामायण के आगमन से पहले समझिए रणबीर कपूर का बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट कार्ड, पिछली पांच में से केवल एक फिल्म हुई नाकामचंडीगढ़ रैली में अमित शाह का कांग्रेस पर सीधा प्रहार, रामलीला मैदान के आयोजन की तारीख को बताया सिखों का अपमानबेंगलुरु में आकार लेने लगी देश की पहली बुलेट ट्रेन, बीईएमएल की फैक्ट्री में कार बॉडी का स्ट्रक्चरल टेस्ट शुरूगोरखपुर में सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, चौरी चौरा में 84 योजनाओं की सौगात देकर किसानों के लिए नए राहत पैकेज की घोषणा कीविवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए दिवाली पर अपनाएं ज्योतिषीय उपायदीवाली पर घर पर बनाएं राजस्थान की पारंपरिक बेसन चक्की, जानें मावा और एक तार की चाशनी से मोहनथाल तैयार करने का सही तरीकाआहोर की मशहूर रबड़ी का सवा सदी पुराना इतिहास, 20 किलो गाय के दूध से ऐसे तैयार होती है सिर्फ 4.5 किलो मिठाईत्योहारी सीजन में रेलवे की सौगात, लुधियाना और पूर्णिया के बीच दौड़ेगी आरक्षित स्पेशल ट्रेनभारतीय बाजार में उतरी नई हुंडई बायोन, शुरुआती कीमत 10 लाख रुपये
बिलासपुर के बाज़ार में माचिस की तीली से चलने वाली प्लास्टिक गन बनी आकर्षण का केंद्र, महज़ 100 रुपये में बिक्रीछत्तीसगढ़
1 नव॰ 2026, 5:22 pm (7 मिनट पहले)· 0

बिलासपुर के बाज़ार में माचिस की तीली से चलने वाली प्लास्टिक गन बनी आकर्षण का केंद्र, महज़ 100 रुपये में बिक्री

बिलासपुर के रामसेतु पुल के पास बिक रही प्लास्टिक गन में बारूद के बजाय माचिस की तीली से धमाका होता है। विक्रेता रोहित सोनकर ने 100 रुपये की इस गन के करीब 500 पीस मंगाए हैं।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में दीपावली के मौके पर सजे पटाखों के बाज़ार में इस बार एक अनोखा खिलौना खरीदारों की भारी भीड़ जुटा रहा है। आमतौर पर त्योहारों पर बिकने वाले खिलौना पिस्तौलों में बारूद से भरी विशेष टिकिया या प्लास्टिक गोलियों की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन बाज़ार में उतारी गई इस खास प्लास्टिक गन को चलाने के लिए किसी भी अलग विस्फोटक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। घरों में रोज़ाना इस्तेमाल होने वाली साधारण माचिस की तीली को इस गन में फिट करके ट्रिगर दबाते ही तेज़ आवाज़ के साथ जोरदार धमाका होता है। इस अनूठी बनावट और कम खर्च में बार-बार चलाने की सुविधा की वजह से यह गन इस त्योहारी सीज़न में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

रामसेतु पुल के पास सजी दुकान पर उमड़ रही ग्राहकों की भीड़

बिलासपुर स्थित रामसेतु पुल के नज़दीक यह अनोखी प्लास्टिक गन बेची जा रही है। विक्रेता रोहित सोनकर ने बताया कि वह इस त्योहारी सीज़न में बिक्री के लिए इस गन के लगभग 500 पीस लेकर आए हैं। दुकान खुलने और बिक्री शुरू होने के कुछ ही समय के भीतर करीब 20 पीस बिक चुके थे। रोहित सोनकर के अनुसार, खरीदारों की दिलचस्पी को देखते हुए उन्हें पूरा भरोसा है कि दीपावली की शाम तक उनकी दुकान का सारा स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। फिलहाल उनके पास ग्राहकों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त संख्या में गन उपलब्ध हैं और बाज़ार में आने वाले लोग इसे कौतूहल से देख रहे हैं।

ये भी पढ़ें

बारूद के बिना माचिस की तीली से होता है मिर्ची पटाखे जैसा धमाका

इस प्लास्टिक गन की सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद सरल लेकिन दिलचस्प मैकेनिज्म है। सामान्य पटाखा बंदूकों में बारूद वाली गोलियों का अलग से पैकेट खरीदना पड़ता है, जबकि इसमें साधारण माचिस की एक तीली लगाई जाती है। जैसे ही गन का ट्रिगर दबाया जाता है, अंदरूनी दबाव और घर्षण से तीली के मसाले पर प्रहार होता है और पारंपरिक मिर्ची पटाखे जैसी तीखी और कानफाड़ू आवाज़ निकलती है। विक्रेता ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई तीली पहली बार में ठीक से नहीं जल पाती, तो उसे दोबारा सेट करके चलाया जा सकता है। दुकानदार ग्राहकों को सामने चलाकर इसका डेमो भी दे रहे हैं, जिससे बच्चों से लेकर बड़े तक इसकी कार्यप्रणाली देखकर आकर्षित हो रहे हैं।

महज़ 100 रुपये कीमत और एक रुपये की माचिस में कई बार धमाके

बाज़ार में इस ट्रेंडिंग खिलौना गन की खुदरा कीमत महज़ 100 रुपये तय की गई है। रोहित सोनकर का कहना है कि पारंपरिक पटाखा पिस्तौलों के लिए खरीदारों को समय-समय पर 30 से 40 रुपये खर्च करके अलग-अलग गोलियों के पैकेट खरीदने पड़ते थे, जिससे बार-बार अतिरिक्त खर्च होता था। इसके विपरीत, इस नई गन में महज़ एक रुपये वाली माचिस की डिब्बी से कई बार लगातार आवाज़ निकाली जा सकती है। यानी माचिस की एक डिब्बी में जितनी तीलियां मौजूद होती हैं, उतनी ही बार इस खिलौने से आवाज़ की जा सकती है। इसी किफायती खासियत और अलग अंदाज़ के चलते ग्राहक इसे हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।

सुरक्षा के दावे और सावधानियों की ज़रूरत

विक्रेता रोहित सोनकर का दावा है कि इस गन में अलग से बारूद या खुली आग की चिंगारी का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे पारंपरिक पटाखों की तुलना में आग लगने का जोखिम काफी कम रहता है। हालांकि, केवल विक्रेता के मौखिक दावों के आधार पर इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता। किसी भी तेज़ आवाज़ करने वाले उपकरण या खिलौने का उपयोग करते समय सुरक्षा नियमों का पालन बेहद ज़रूरी है। बच्चों को यह खिलौना कभी भी अकेले इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए और इसे खरीदते समय इसकी प्लास्टिक गुणवत्ता व कार्यप्रणाली की पूरी जांच करनी चाहिए। इसके उपयोग के दौरान आंखों और कानों के बचाव पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

सवाल-जवाब

बिलासपुर में बिक रही इस अनोखी गन की कीमत कितनी है?
इस प्लास्टिक गन की खुदरा कीमत बाज़ार में महज़ 100 रुपये रखी गई है।
यह गन चलने के लिए किस सामग्री का इस्तेमाल करती है?
यह खिलौना गन बारूद या पटाखा गोलियों के बजाय साधारण माचिस की तीली के ज़रिये आवाज़ निकालती है।
बिलासपुर में यह गन किस जगह बेची जा रही है?
इसकी बिक्री बिलासपुर के रामसेतु पुल के पास रोहित सोनकर द्वारा की जा रही है।
दुकानदार के पास बिक्री के लिए कितना स्टॉक मौजूद है?
दुकानदार रोहित सोनकर इस गन के करीब 500 पीस लेकर आए हैं, जिनमें से शुरुआत में 20 पीस बिक चुके थे।
क्या इस गन को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है?
दुकानदार का दावा है कि इसमें आग का खतरा कम है, लेकिन तेज़ आवाज़ के कारण बच्चों को इसे अकेले नहीं चलाना चाहिए और आंखों-कानों की सुरक्षा ज़रूरी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp