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केके रेलमार्ग पर 37 दिन बाद दौड़ीं यात्री ट्रेनें, बस्तर से ओडिशा और विशाखापत्तनम का सफर हुआ आसानछत्तीसगढ़
1 नव॰ 2026, 3:39 pm (1 घंटे पहले)· 0

केके रेलमार्ग पर 37 दिन बाद दौड़ीं यात्री ट्रेनें, बस्तर से ओडिशा और विशाखापत्तनम का सफर हुआ आसान

बाढ़ और भूस्खलन से तबाह हुए केके रेलमार्ग की मरम्मत पूरी होने के बाद जगदलपुर के लिए यात्री ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है।

बस्तर संभाग के निवासियों के लिए एक महीने से अधिक समय बाद आवागमन के मोर्चे पर सामान्य स्थिति लौट आई है। कोत्तावलसा-किरंदुल (केके) रेलमार्ग पर करीब 37 दिनों के लंबे ठहराव के बाद यात्री ट्रेनों का परिचालन दोबारा बहाल कर दिया गया है। इस बहाली के साथ समलेश्वरी एक्सप्रेस और हीराखंड एक्सप्रेस का जगदलपुर तक पहुंचना शुरू हो चुका है, जिससे अंतरराज्यीय संपर्क सुचारू होने लगा है। इसके अलावा 4 नवंबर से जगदलपुर-विशाखापत्तनम, राउरकेला और नाइट एक्सप्रेस का संचालन भी पूरी तरह शुरू किया जा रहा है।

बाढ़ और भूस्खलन से ध्वस्त हुआ था 3 किलोमीटर लंबा ट्रैक

इस रेल मार्ग पर संकट की शुरुआत 23 और 24 सितंबर को हुई थी, जब इलाके में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। ओडिशा के रायगढ़ा सेक्शन के अंतर्गत आने वाले नल्लीगुड़ा और क्षत्रिपुट स्टेशनों के बीच बड़े पैमाने पर जमीन धंसने की घटना हुई थी। इस भूस्खलन के कारण लगभग 3 किलोमीटर लंबा रेलवे ट्रैक अपनी जगह से पूरी तरह उखड़ गया था। ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह जाने से करीब 40 फीट गहरी खाई बन गई थी, जिसने ट्रेन संचालन को पूरी तरह असंभव बना दिया था। सुरक्षा को देखते हुए जगदलपुर को दूसरे राज्यों और शहरों से जोड़ने वाली पांच प्रमुख यात्री रेलगाड़ियों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था।

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इतनी बड़ी खाई को भरना और उखड़ी पटरियों को फिर से बिछाना रेलवे प्रशासन के लिए एक बेहद कठिन काम था। इस चुनौती से निपटने के लिए पूर्व तट रेलवे की इंजीनियरिंग, विद्युत, सिग्नल और दूरसंचार विभाग की विशेष टीमों को तैनात किया गया, जिन्होंने दिन-रात एक करके पुनर्निर्माण कार्य को अंजाम दिया। लगभग 3 किलोमीटर के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने के लिए निरंतर काम चला। मरम्मत पूरी होने पर रेलवे ने सबसे पहले संरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से मालगाड़ियों का संचालन शुरू किया। जब ट्रैक की मजबूती और सिग्नलिंग व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित पाई गई, तब जाकर यात्री गाड़ियों को इस रूट पर दौड़ाने की अंतिम स्वीकृति दी गई।

सड़क मार्ग की मजबूरी से मिली मुक्ति, व्यापार को भी गति

सवा महीने से ज्यादा समय तक रेल कनेक्टिविटी टूटे रहने से बस्तर क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्रियों को लंबी और खर्चीली यात्राओं के लिए बस अथवा निजी सड़क वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा था। यात्री सेवाओं के पुनः शुरू होने से जगदलपुर का अन्य प्रमुख शहरों से सीधा रेल संपर्क दोबारा जुड़ गया है। इससे न केवल आम दैनिक यात्रियों और मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और माल ढुलाई व्यवस्था को भी नया संबल प्राप्त होगा।

सवाल-जवाब

केके रेलमार्ग पर यात्री ट्रेनें कितने दिनों बाद शुरू हुई हैं?
केके रेलमार्ग पर यात्री ट्रेनों का परिचालन लगभग 37 दिनों के ठहराव के बाद फिर से शुरू किया गया है।
जगदलपुर के लिए कौन सी ट्रेनें तत्काल बहाल की गई हैं?
समलेश्वरी एक्सप्रेस और हीराखंड एक्सप्रेस का परिचालन जगदलपुर तक तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है।
इस रेलमार्ग पर 4 नवंबर से कौन सी ट्रेनें चलेंगी?
4 नवंबर से जगदलपुर-विशाखापत्तनम, राउरकेला और नाइट एक्सप्रेस का संचालन दोबारा शुरू किया जाएगा।
ट्रेन सेवाएं बंद होने की मुख्य वजह क्या थी?
23 और 24 सितंबर को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के कारण ट्रैक के नीचे 40 फीट गहरी खाई बन गई थी और 3 किलोमीटर ट्रैक उखड़ गया था।
ट्रैक की मरम्मत का काम किन विभागों ने किया?
पूर्व तट रेलवे के इंजीनियरिंग, विद्युत, सिग्नल और दूरसंचार विभाग की टीमों ने मिलकर मरम्मत का काम पूरा किया।
यात्री ट्रेनों से पहले ट्रैक पर क्या चलाया गया था?
सुरक्षा और ट्रैक की मजबूती की जांच के लिए रेलवे ने यात्री गाड़ियों से पहले मालगाड़ियों का संचालन किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·9 मिनट पहले

बस्तर के लोगों के लिए सच में बहुत बड़ी राहत की खबर है। 37 दिन तक ट्रेन बंद रहने से सफर करना कितना मुश्किल हो गया होगा, यह सोचकर ही डर लगता है। अब कम से कम लोग आराम से सफर कर पाएंगे और शूटिंग या दूसरे कामों के लिए बाहर जाने वाले कलाकारों और क्रू को भी ट्रांसपोर्ट में परेशानी नहीं होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 मिनट पहले

बस्तर के लोगों के लिए वाकई बड़ी राहत है। सड़क से सफर करना महंगा भी पड़ता था और समय भी ज्यादा लगता था। क्या इस तरह के पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में रेलवे ने पहले से कोई सुरक्षा तंत्र नहीं बनाया था?

Ravikash Gupta@ravikash·28 मिनट पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है। सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर भी 37 दिन का नुकसान बहुत बड़ा होता है, खासकर जब वैकल्पिक रास्ते महंगे हों।

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 मिनट पहले

37 दिन तक ट्रैक बंद रहने से सुरक्षा और आवाजाही दोनों की बड़ी चुनौती थी, गनीमत है बिना किसी बड़े हादसे के मरम्मत पूरी हो गई।

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। 37 दिन बहुत होते हैं, गनीमत है कि अब जाकर लोगों को राहत मिली है।

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