छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर स्थित गांधी स्टेडियम के बास्केटबॉल ग्राउंड में दीपावली के पावन पर्व पर एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली है। बास्केटबॉल संघ परिवार से जुड़े खिलाड़ियों ने खेल भावना और आपसी एकता का परिचय देते हुए अपने खेल मैदान को बेहद आकर्षक रंगोली से सजाया है। कोर्ट पर बनाई गई इन रंगोलियों में खेल से जुड़ी विभिन्न थीम को उकेरा गया है। पहली नजर में ही यह सजावट किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। गांधी स्टेडियम के इस बास्केटबॉल कोर्ट में दीपावली के अवसर पर रंगोली सजाने की यह परंपरा वर्ष 2013 से लगातार चली आ रही है और हर साल इसका दायरा और उत्साह बढ़ता ही जा रहा है।
मैदान को घर मानकर होती है सजावट
दीपावली के आगमन से ठीक पहले बास्केटबॉल खिलाड़ी अपने खेल मैदान की विशेष रूप से साफ-सफाई करते हैं और फिर उसे पारंपरिक रंगोली तथा दीपों से भव्य रूप से सजाकर त्योहार का आनंद लेते हैं। जिस प्रकार आम लोग अपने घरों को साफ-सुथरा कर दीपों से रोशन करते हैं, ठीक उसी भावना के साथ यहां के खिलाड़ी इस खेल मैदान को अपना दूसरा घर मानते हैं। इस आयोजन की सबसे खास विशेषता यह है कि खिलाड़ी केवल रंगोली बनाकर ही इतिश्री नहीं करते, बल्कि छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली के अवसर पर शाम के समय सभी खिलाड़ी एक साथ एकत्र होते हैं और पूरे बास्केटबॉल ग्राउंड में सैकड़ों दीये प्रज्वलित करते हैं, जिससे पूरा परिसर जगमगा उठता है।
नई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है पुरानी परंपरा
इस अनूठी परंपरा के बारे में बास्केटबॉल खिलाड़ी इलिसिबा ने जानकारी दी कि उनके कोच राजेश प्रताप सिंह हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करते हैं। खिलाड़ियों के लिए यह मैदान महज एक कंक्रीट का कोर्ट नहीं बल्कि उनका अपना घर है। जिस तरह हर कोई अपने निवास को पर्व पर सजाता है, उसी तरह सभी खिलाड़ी मिलकर इस परिसर को नया रूप देते हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा बीते कई वर्षों से निरंतर आगे बढ़ रही है। पहले सीनियर खिलाड़ी इस जिम्मेदारी को निभाती थीं और अब नई पीढ़ी के युवा खिलाड़ी इस सांस्कृतिक सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं। सभी का एक साथ मिलकर रंगोली तैयार करना और उत्सव मनाना बेहद आनंददायक अनुभव होता है।
एक अन्य बास्केटबॉल खिलाड़ी अनामिका चौबे ने बताया कि वह साल 2022 से इस मैदान से जुड़ी हुई हैं और उनके आने से बहुत पहले से ही यहां दीपावली पर रंगोली बनाने का सिलसिला चला आ रहा है। हर साल लड़के और लड़कियां मिलकर दीपावली की सुबह विभिन्न कलात्मक थीम पर आधारित रंगोलियां जमीन पर उतारते हैं। उन्होंने कहा कि बास्केटबॉल के अभ्यास के साथ-साथ यह सभी खिलाड़ी हर राष्ट्रीय और धार्मिक पर्व को एक संयुक्त परिवार की तरह सेलिब्रेट करते हैं। छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली के दिन सभी खिलाड़ी मैदान पर पहुंचते हैं, दीप जलाते हैं और खुशियां साझा करते हैं। उनके लिए यह स्थान केवल खेलकूद का केंद्र न होकर एक आत्मीय माहौल देने वाला ठिकाना है।
रंगों के जरिए झलकता है खेल का जज्बा
बास्केटबॉल कोच राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि साल 2013 में इस ग्राउंड की स्थापना हुई थी और तभी से दीपावली के मौके पर खिलाड़ी रंगोली से मैदान को संवारते आ रहे हैं। इस रचनात्मक कार्य में लड़कियां अपने छोटे-छोटे समूह बनाती हैं और अपनी कल्पना तथा खेल भावना के आधार पर मनमोहक रंगोली तैयार करती हैं। प्रत्येक समूह में पांच से छह खिलाड़ी शामिल होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि कुछ रंगोलियों में बास्केटबॉल खेल की प्रत्यक्ष झलक देखने को मिलती है, तो कहीं खिलाड़ी अपनी मेहनत के दम पर आसमान छूने और पदक जीतने के सपने को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उतारते नजर आते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष रंगोलियों में खेल के दौरान अपनाए जाने वाले डिफेंस और ऑफेंस की बारीकियों को भी बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाया गया है।



















