रामबन में भाजपा नेता सुनील कुमार शर्मा के काफिले की एस्कॉर्ट गाड़ी से बस की टक्कर, एसएचओ समेत चार जवान घायलसमुद्री किराए में उछाल और भू-राजनीतिक संकट से निपटने के लिए अपने बेड़े में नए जहाज शामिल करेगा इंडियन ऑयलपंजाब डियर 50 रेंजर संडे लॉटरी के नतीजे घोषित, 21 लाख रुपये के बंपर इनाम के साथ जानिए क्लेम की पूरी प्रक्रियाअमेरिका के सिएटल में दिवाली समारोह के दौरान हिंदू विरोधी और नस्लभेदी प्रदर्शनइथियोपिया से दबोचा गया 5 लाख का इनामी गैंगस्टर अफरीदी, पंजाब पुलिस लाई भारतराजस्थान में नौ नवंबर को मौसम रहेगा पूरी तरह शुष्क, किसानों और पशुपालकों के लिए जरूरी निर्देश जारीआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में आ रहा है नया बवंडर, जानिए वर्ल्ड मॉडल्स के बारे में सब कुछचीन का झांगे डेनशिया पार्क क्यों कहलाता है इंद्रधनुषी पहाड़ों का अजूबा, जानिए इसके रंग बदलने का अनोखा विज्ञानदीपावली के जश्न के दौरान बीकानेर में बड़ा रेल हादसा, ट्रेन की चपेट में आने से तीन लोगों की मौतहरी सब्जियों में टेपवर्म का सच और न्यूरोसिस्टिसरकोसिस से बचाव के लिए रसोई की सही तकनीक
दीपावली की रात नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने के लिए सरगुजा में रमंडी पौधा और खीरा लगाने का पारंपरिक रिवाजछत्तीसगढ़
8 नव॰ 2026, 5:31 pm (10 मिनट पहले)· 0

दीपावली की रात नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने के लिए सरगुजा में रमंडी पौधा और खीरा लगाने का पारंपरिक रिवाज

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में दीपावली की अमावस की रात घर, मवेशियों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए रमंडी का पौधा और खीरा लगाने की पुरानी परंपरा निभाई जाती है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचलों में दीपावली का पर्व केवल दीये प्रज्वलित करने और पकवान बांटने तक ही सीमित नहीं रहता। यहां के गांवों में पीढ़ियों से चली आ रही एक अनूठी मान्यता के तहत दीपावली की अमावस्या वाली रात घर की छत, दीवार, पूजा स्थल और पशुओं के कोठे पर रमंडी का पौधा लगाया जाता है। स्थानीय निवासियों का विश्वास है कि अमावस्या की गहन अंधेरी रात में नकारात्मक शक्तियां और बुरी नजर सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे में रमंडी का पौधा और खीरा घर के आसपास लगाने से परिवार, संपत्ति और मवेशी सभी प्रकार की अनहोनी तथा बुरी साया से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

बुरी साया और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा की पुरानी मान्यता

सरगुजा अंचल के गांवों में दीपावली की पहली रात को रमंडी का पौधा लगाने का विशेष महत्व है। स्थानीय निवासी नानसाय नाग के अनुसार इस परंपरा को निभाने के पीछे मुख्य उद्देश्य परिवार तथा गृहस्थी को किसी भी प्रकार के अनिष्ट प्रभाव और बुरी नजर से दूर रखना है। मान्यता है कि दीपावली की अमावस्या की रात में अदृश्य नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस प्रभाव को निष्क्रिय करने के लिए रमंडी के पौधे के साथ खीरे का उपयोग सुरक्षा कवच के रूप में किया जाता है। ग्रामीण इस पौधे को अपनी संपत्ति और रहने के स्थानों के आसपास लगाकर निश्चिंत हो जाते हैं।

ये भी पढ़ें

संपत्ति से लेकर मवेशी कोठों तक पौधा लगाने की जगहें

इस लोक परंपरा की मुख्य विशेषता यह है कि रमंडी का पौधा केवल आंगन या घर के मुख्य द्वार तक सीमित नहीं रहता। परिवार की हर उस जगह और वस्तु के पास इसे लगाया जाता है जिसे वे अपनी आजीविका तथा सुरक्षा का साधन मानते हैं। घर की मुख्य छत, पूजा स्थल, वाहन, गाय और बैल बांधने का कोठा, हैंडपंप और बोरवेल जैसी जगहों पर रमंडी का पौधा स्थापित किया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि जल स्रोतों और पशुधन पर बुरी नजर का असर सबसे जल्दी पड़ता है, इसलिए इन सभी स्थानों को सुरक्षा देने के लिए यह पौधा लगाया जाता है।

पितृ पूजा, खीरे का प्रसाद और नए चावल की रस्म

दीपावली की रात घर में दीपक जलाने और स्नान-ध्यान करने के बाद परिवार के सदस्य अपने कुल देवी-देवताओं और पूर्वजों की श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। पितृ देवताओं को याद कर घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। पूजा संपन्न होने के पश्चात रमंडी के साथ रखे गए खीरे को प्रसाद के रूप में काटकर पूरे परिवार में बांटा जाता है। अगली सुबह एक और महत्वपूर्ण रस्म निभाई जाती है, जिसमें खेतों से आई नए चावल की पहली फसल से प्रसाद तैयार किया जाता है। परिवार के सदस्य यह प्रसाद ग्रहण करते हैं और अपने मवेशियों को भी नया चावल खिलाकर उनका आभार व्यक्त करते हैं।

सोहराई, करमा और मांदर की थाप पर सांस्कृतिक संगम

सरगुजा के आदिवासी समाज में दीपावली की रात का जुड़ाव सोहराई और करमा पर्व की परंपराओं से भी गहरा है। इस अवसर पर गांवों में करमा वृक्ष की शाखा गाड़ने के साथ मांदर की थाप पर पारंपरिक लोक नृत्य का भव्य आयोजन होता है। आसपास के गांवों से आने वाले मांदर वादक अपने संगीत से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं। यद्यपि आधुनिक युग में कुछ स्थानों पर नए बाजों का प्रयोग होने लगा है, लेकिन बुजुर्गों के मार्गदर्शन में पारंपरिक रीति-रिवाज आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यह त्योहार पूर्वजों के स्मरण, मवेशियों के प्रति कृतज्ञता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का सशक्त माध्यम है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में दीपावली पर रमंडी का पौधा क्यों लगाया जाता है?
दीपावली की अमावस्या की रात बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से घर, परिवार तथा संपत्ति की रक्षा के लिए रमंडी का पौधा लगाया जाता है।
रमंडी के पौधे के साथ खीरे का क्या उपयोग होता है?
खीरे को रमंडी के पौधे के साथ सुरक्षा कवच के रूप में लगाया जाता है और पूजा के बाद इसे परिवार में प्रसाद के रूप में बांटकर खाया जाता है।
घर की किन-किन जगहों पर रमंडी का पौधा स्थापित किया जाता है?
रमंडी का पौधा घर की छत, पूजा स्थल, वाहन, मवेशी कोठे, हैंडपंप और बोरवेल जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर लगाया जाता है।
दीपावली की अगली सुबह कौन सी रस्म निभाई जाती है?
दीपावली की सुबह नए चावल से प्रसाद बनाया जाता है, जिसे परिवार के सदस्य ग्रहण करते हैं और गायों को भी नया चावल खिलाया जाता है।
इस परंपरा का सोहराई और करमा पर्व से क्या संबंध है?
दीपावली की रात आदिवासी समुदाय में करमा गाड़ने और मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य-संगीत आयोजित करने की सोहराई परंपराएं निभाई जाती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp