छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में खेल प्रतिभाओं का जबरदस्त संगम देखने को मिला, जहां आयोजित सरगुजा ओलंपिक में स्थानीय खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी चमक बिखेरी। खेल जगत में समर्पण, अनुशासन और पसीने की ताकत क्या होती है, यह अंबिकापुर की जूनियर बालिका बास्केटबॉल टीम ने अपने खेल से साबित कर दिखाया है। संभाग भर के विभिन्न क्षेत्रों से आई मजबूत और अनुभवी टीमों को कड़े मुकाबलों में पीछे छोड़ते हुए इन बेटियों ने लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। पिछले साल की तरह इस बार भी पहला स्थान हासिल कर इस टीम ने यह दर्शा दिया है कि निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन से किसी भी स्तर पर जीत का सिलसिला कायम रखा जा सकता है।
मैदान पर दिखा कड़ा मुकाबला और बेटियों का तालमेल
प्रतियोगिता के दौरान कोर्ट पर रोमांचक दृश्य देखने को मिले, जहां संभाग के अलग-अलग कोनों से पहुंची टीमों ने खिताब जीतने के लिए पूरा जोर लगाया। अंबिकापुर की जूनियर बालिकाओं की टीम ने हर मैच में रणनीतिक खेल दिखाया और सटीक पासिंग के साथ विपक्षी टीमों के डिफेंस को ध्वस्त किया। टीम की सदस्यों ने बताया कि टूर्नामेंट में मुकाबला आसान नहीं था क्योंकि हर टीम पूरी तैयारी के साथ आई थी। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने संयम और एकता के बल पर हर चुनौती को पार किया। नेट पर नियमित अभ्यास और गेंद पर बेहतरीन नियंत्रण ने उन्हें निर्णायक पलों में बढ़त दिलाई और अंततः उन्होंने प्रतियोगिता का शीर्ष स्थान हासिल करके ही दम लिया।
साक्षी का चार साल का समर्पण लाया रंग
गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम की प्रमुख खिलाड़ी साक्षी ने अपनी खेल यात्रा को साझा करते हुए बताया कि वह बीते 4 वर्षों से लगातार बास्केटबॉल के मैदान में समय बिता रही हैं। साक्षी के अनुसार, सरगुजा ओलंपिक जैसा मंच खिलाड़ियों के भीतर छुपी प्रतिभा को सामने लाने का एक बहुत बड़ा जरिया बनकर उभरा है। इस टूर्नामेंट में खेलने से न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि अन्य जिलों के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से खेल की बारीकियों को समझने में भी मदद मिलती है। साक्षी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी टीम ने पिछले वर्ष भी इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था और इस बार भी उस जीत की निरंतरता को बनाए रखने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसे सभी साथियों ने अपनी एकजुटता से पूरा कर दिखाया।
राजेश प्रताप का निशुल्क प्रशिक्षण और चार वर्गों में स्वर्णिम सफलता
खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे उनके कोच राजेश प्रताप का निस्वार्थ समर्पण सबसे बड़ा आधार बनकर सामने आया है, जिन्हें स्थानीय खेल प्रेमी सम्मान से द्रोणाचार्य पुकारते हैं। साक्षी ने जानकारी दी कि संभाग स्तर पर इस बार चार अलग-अलग श्रेणियों में गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड बना है। इन श्रेणियों में सीनियर बालक वर्ग, जूनियर बालक वर्ग, सीनियर बालिका वर्ग और जूनियर बालिका वर्ग शामिल हैं। इन चारों वर्गों में खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाते हुए पहले स्थान पर कब्जा किया, जिससे खेल गलियारों में अंबिकापुर का दबदबा स्थापित हो गया है। कोच राजेश प्रताप का मानना है कि मैदान पर बहाया गया पसीना कभी व्यर्थ नहीं जाता और जब खिलाड़ी जी जान से अभ्यास करते हैं तो पदक अपने आप उनके हिस्से में आ जाते हैं।
ग्रामीण बेटियों को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने की अनूठी मुहिम
अंबिकापुर की बास्केटबॉल अकादमी केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे प्रेरणादायक पहलू ग्रामीण अंचल से आने वाली बेटियों का सशक्तिकरण है। कोच राजेश प्रताप के अनुसार, अंबिकापुर शहर में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आसपास के दूरदराज गांवों से कई छात्राएं आती हैं। इन ग्रामीण बेटियों को खेल के प्रति जागरूक करना और उन्हें खेल की मुख्यधारा में लाकर आगे बढ़ने का बराबर मौका देना ही उनके इस अभियान का केंद्रीय मकसद है। इसके लिए एक निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र का संचालन किया जा रहा है, ताकि आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी किसी भी प्रतिभाशाली बेटी के सपनों में बाधा न बन सके। कई ऐसी लड़कियां, जिन्होंने हाल ही में गांव से आकर खेलना शुरू किया था, उन्होंने बेहद कम समय में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक अपनी पहचान स्थापित कर ली है।
राष्ट्रीय पटल पर पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम
सरगुजा ओलंपिक में मिली यह दोहरी स्वर्णिम सफलता केवल एक क्षेत्रीय पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के बड़े लक्ष्यों की मजबूत नींव साबित हो रही है। कोच राजेश प्रताप ने आशा व्यक्त की है कि जिस लगन और मेहनत के साथ ये बच्चे रोजाना अभ्यास कर रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब इनमें से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र के जरिए नए बच्चों को बास्केटबॉल से जोड़ने का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है, जिससे सरगुजा संभाग अब खेल के मानचित्र पर एक नई पहचान गढ़ रहा है। बेटियों की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं को खेलों में अपनी दिशा तलाशने और आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरने के लिए प्रेरित कर रही है।



















