खेती-किसानी के पुराने तौर-तरीकों से आगे निकलकर आधुनिक तकनीक का दामन थामने वाली प्रतिमा वस्त्रकार आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना की मदद से उन्होंने हवाई तकनीक को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पंद्रह दिनों का गहन प्रशिक्षण हासिल करने के बाद वे अब सीधे खेतों में पहुंचकर फसलों पर दवाओं और पोषक तत्वों का सटीक छिड़काव कर रही हैं। इस तकनीकी पहल ने न सिर्फ फसलों की देखरेख को आसान बनाया है, बल्कि प्रतिमा की निजी और पारिवारिक आर्थिक स्थिति को भी संवारा है। पारंपरिक किसानी में जहां घंटों का पसीना बहाना पड़ता था, वहीं अब आसमान में उड़ता यह छोटा यंत्र मिनटों में काम पूरा कर रहा है, जिससे इलाके के किसान भी बेहद संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
ग्वालियर से मिला उड़ान का हुनर और नया हौसला
प्रतिमा वस्त्रकार का सफर उस समय पूरी तरह बदल गया जब उन्होंने नमो ड्रोन दीदी योजना में अपना नामांकन कराया। वर्ष 2022 के दौरान उन्हें ड्रोन संचालन का विशेष प्रशिक्षण लेने के लिए ग्वालियर जाने का मौका मिला। ग्वालियर में आयोजित इस पंद्रह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान उन्हें ड्रोन के कलपुर्जों, उसकी उड़ान प्रणाली और कृषि क्षेत्र में इसके व्यावहारिक इस्तेमाल की बारीकियां सिखाई गईं। प्रशिक्षण के दौरान खेतों में सुरक्षित ढंग से दवा का छिड़काव करने और बैटरी व लिक्विड मैनेजमेंट जैसे तकनीकी पहलुओं का अभ्यास कराया गया। पंद्रह दिनों की यह ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब वे अपने गांव लौटीं, तो उनके पास केवल एक प्रमाण पत्र नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता का एक पक्का हुनर था, जिसे उन्होंने तुरंत किसानों की सेवा में लगा दिया।
कम समय में फसलों की सुरक्षा, किसानों को मिल रही बड़ी राहत
प्रशिक्षण हासिल करने के बाद प्रतिमा ने क्षेत्रीय किसानों के खेतों में व्यावसायिक रूप से ड्रोन से छिड़काव की सेवाएं देना शुरू किया। जब भारी स्प्रेयर पीठ पर लादकर घंटों खेत में चलना पड़ता था, तब किसान अत्यधिक शारीरिक थकान और कीटनाशकों के सीधे संपर्क के खतरे से जूझते थे। प्रतिमा के ड्रोन संचालन से अब वही काम बेहद कम वक्त में पूरा हो जाता है। हवा में उड़ते हुए ड्रोन से फसलों पर दवा की बूंदें एक समान रूप से फैलती हैं, जिससे फसल के हर हिस्से तक जरूरी कीटनाशक पहुंच जाता है। प्रतिमा का कहना है कि काम की यह तेज रफ्तार और सटीकता देखकर किसान बेहद खुश हैं और आधुनिक खेती की इस तकनीक को हाथों-हाथ अपना रहे हैं।
कमाई का मजबूत जरिया बना ड्रोन, आर्थिक हालात में हुआ सुधार
खेतों में दवा छिड़काव की यह तकनीकी सेवा प्रतिमा वस्त्रकार के लिए सिर्फ एक हुनर का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि नियमित आमदनी का मजबूत साधन भी बन चुकी है। प्रतिमा बताती हैं कि विभिन्न किसानों के खेतों में जाकर छिड़काव करने के बदले उन्हें संतोषजनक पारिश्रमिक मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक हालत में ठोस सुधार दर्ज हुआ है। इस काम ने उन्हें अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होने का आत्मविश्वास दिया है। नमो ड्रोन दीदी कार्यक्रम के तहत मिली इस तकनीक ने साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं और समाज में अपनी पहचान नए सिरे से गढ़ सकती हैं।
तकनीक से सुरक्षित हो रहा खेती का भविष्य
प्रतिमा का मानना है कि सरकारी योजनाओं का यह समन्वय किसानों और कामगार महिलाओं दोनों के लिए साझा उम्मीद लेकर आया है। ड्रोन के इस्तेमाल से जहां किसानों के श्रम, समय और लागत की बचत हो रही है, वहीं फसलों की सेहत भी बेहतर बनी रहती है। उनका कहना है कि सरकारी पहलों से मिली इस तकनीकी सुविधा से यह स्पष्ट होता है कि शासन की नीतियां जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। खेती में तकनीक के बढ़ते दखल से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र अधिक सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ बन सकेगा।
सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि का अनोखा मेल
प्रतिमा वस्त्रकार की यह यात्रा आधुनिक कृषि विज्ञान और महिला सशक्तिकरण के सटीक तालमेल को दर्शाती है। सिर्फ पंद्रह दिन के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उनकी पूरी जीवनशैली और कार्यशैली को बदल कर रख दिया। आज वे न केवल खुद स्वावलंबी बनी हैं, बल्कि अन्य किसानों तक आधुनिक उपकरण की पहुंच भी सुनिश्चित कर रही हैं। उनका अनुभव यह संदेश देता है कि जब महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर तकनीकी क्षेत्रों में कदम बढ़ाती हैं, तो वे समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को एक नई दिशा देने में पूरी तरह सक्षम होती हैं।





















