कथित रूप से 5000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े धन शोधन मामले में जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय ने ऑनलाइन ट्रैवल मंच ईजमायट्रिप के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी के खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र पेश किया है। एजेंसी का दावा है कि अवैध सट्टेबाजी से जुटाई गई अवैध रकम को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के रास्ते घरेलू शेयर बाजार में लगाया गया था। रायपुर की एक विशेष अदालत में 10 सितंबर को दाखिल किया गया यह इस जांच का छठा पूरक आरोप पत्र है।
डीमैट शेयरों की कुर्की और जब्ती की अर्जी
जांच एजेंसी ने कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के प्रावधानों के तहत सख्त कदम उठाया है। आरोप पत्र पेश किए जाने के साथ ही निशांत पिट्टी के 59.6 करोड़ रुपये मूल्य के डीमैट शेयरों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश दिया गया। इसके अलावा, जांच अधिकारियों ने सक्षम अदालत के समक्ष इन शेयरों को अंतिम रूप से जब्त करने की अनुमति भी मांगी है। वित्तीय जांच एजेंसी का मानना है कि यह पूरी संपत्ति अवैध गतिविधियों से अर्जित अपराध की आय का प्रत्यक्ष हिस्सा है।
आरोपों पर निशांत पिट्टी का रुख
इस कानूनी कदम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए निशांत पिट्टी ने कहा कि उन्हें इस आरोप पत्र के संबंध में पहले से कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्हें किसी आरोप पत्र की जानकारी है और न ही संबंधित अदालत से कोई समन प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “इस मामले पर कहने के लिए कुछ नहीं है। मैंने हमेशा सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग किया है और आगे भी करता रहूंगा। मैं कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने सही आचरण को साबित करने के लिए सबूत पेश करूंगा।”
जांच का दायरा, गिरफ्तारियां और संपत्तियों की जब्ती
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के वित्तीय तारों को जोड़ने के लिए चल रही इस पड़ताल में अब तक 14 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। केंद्रीय एजेंसी इस वित्तीय घोटाले में अब तक कुल 1885 करोड़ रुपये की चल और अचल परिसंपत्तियां अटैच कर चुकी है। इससे पूर्व रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने इसी वर्ष 24 मार्च को एक अंतरिम कुर्की आदेश पारित किया था, जिसमें 20 अचल संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया गया था। इन चिन्हित संपत्तियों में 18 अचल संपत्तियां दुबई में और 2 संपत्तियां नई दिल्ली में स्थित हैं।
क्या है अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का तंत्र
यह पूरा आपराधिक प्रकरण कई वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्लिकेशनों के संगठित नेटवर्क के जरिए संचालित होने वाले गैरकानूनी जुए से संबंधित है। सट्टेबाजी से मिलने वाले भारी-भरकम मुनाफे को सफेद करने के लिए मुखौटा कंपनियों, बेनामी बैंक खातों और जटिल वित्तीय लेयरिंग का सहारा लिया गया। इसके बाद इस काली कमाई को शेयर बाजार, रियल एस्टेट और दूसरी संपत्तियों में निवेश किया गया। पुलिस तंत्र का यह भी दावा है कि यह सट्टेबाजी तंत्र अलग-अलग नामों और नए डिजिटल माध्यमों के सहारे अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए है।





















