विदेशी पैसा अमेरिका के बैंक खातों में जमा होता था और भारत के ATM से नकद के रूप में बाहर आता था. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक वित्तीय जांच ने ठीक इसी तरह काम करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बेनकाब किया है, जो बैंकिंग नियमों और अनिवार्य निगरानी से बचते हुए धन को सीमा पार पहुंचा रहा था. TrendKia को मिले जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, इस पूरे मामले की धुरी अमेरिका में स्थित संगठन The Timothy Initiative (TTI) और उससे जुड़े भारत व विदेश में फैले लोगों की कड़ी है.
कैसे चलता था यह विदेशी कार्ड का खेल
ED का आरोप है कि इस व्यवस्था में अमेरिका के Truist Bank की ओर से जारी किए गए डेबिट कार्ड इस्तेमाल किए गए. खास बात यह कि ये कार्ड भारत में उन लोगों के हाथ में थे जो असल में इन खातों के मालिक ही नहीं थे. एजेंसी के मुताबिक वर्ष 2019 से लेकर अब तक ऐसे 1000 से अधिक विदेशी डेबिट कार्ड भारत में चलाए गए.
पैसे का पैमाना बड़ा है. जांच में दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच इसी तंत्र के जरिये करीब 92.55 करोड़ रुपये (99.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की विदेशी राशि भारत में खपाई गई. वहीं जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच केवल ATM से निकाली गई कुल रकम का आकलन करीब 44 करोड़ रुपये किया गया है.
एक ही नाम पर 23 कार्ड
जांच का एक चौंकाने वाला हिस्सा उन डेबिट कार्डों से जुड़ा है, जो कथित तौर पर सिर्फ एक नाम, ‘संतोष कुमार’, पर जारी कराए गए. ED का आरोप है कि TTI के वित्त प्रमुख अजित वर्गीज मैथाई के निर्देश पर इसी एक नाम से कम से कम 23 कार्ड तैयार कराए गए.
अधिकारियों का मानना है कि यह कदम बैंकिंग व्यवस्था के KYC नियमों और निगरानी से बच निकलने के लिए सोच-समझकर उठाया गया. एजेंसी के शब्दों में यह एक सुनियोजित ढांचा था, जिसका असली मकसद कार्ड के वास्तविक उपयोगकर्ताओं की पहचान को छिपाना और विदेशी पैसे को सीधे भारतीय ATM से नकद में बदल देना था.
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पकड़ से खुली परतें
मामले ने बड़ा मोड़ तब लिया जब बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एजेंसियों ने माइका मार्क नाम के व्यक्ति को रोका. उसे इस कथित नेटवर्क का अहम वित्तीय संचालक बताया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार उसके पास से Truist Bank के 24 डेबिट कार्ड बरामद हुए.
इसके बाद अजित मैथाई के ठिकानों पर छापेमारी हुई. वहां से करीब 37 लाख रुपये नकद मिले, जिनमें अधिकांश रकम 500 रुपये के नोटों में थी. इसके साथ ही एक कॉरपोरेट डेबिट कार्ड भी हाथ लगा, जो कथित तौर पर ‘अजित मैथेई – The Timothy Initiative’ के नाम से जुड़ा था.
सिर्फ पैसे की गड़बड़ी तक सीमित नहीं पड़ताल
जांच से जुड़े सूत्रों की मानें तो एजेंसियां केवल लेन-देन के हिसाब-किताब तक नहीं रुक रही हैं. वे संगठन की गतिविधियों के व्यापक असर की भी पड़ताल कर रही हैं. ED का आरोप है कि इस संगठन ने आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से संवेदनशील समुदायों के बीच प्रचार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वैचारिक गतिविधियों का एक तंत्र खड़ा किया. एजेंसी का कहना है कि विदेशी धन के कथित गुप्त इस्तेमाल ने इन गतिविधियों को बिना किसी ठोस नियामकीय निगरानी के फैलने में मदद पहुंचाई.
बस्तर और धमतरी के संदिग्ध लेन-देन
जांच के दौरान छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी इलाकों में भी असामान्य वित्तीय हलचल पकड़ में आई है. अधिकारियों के अनुसार इन क्षेत्रों में करीब 6.34 करोड़ रुपये की बार-बार और असामान्य ATM निकासी दर्ज की गई.
ये इलाके पहले से ही वामपंथी उग्रवाद के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए इन लेन-देन को एजेंसियां और गंभीरता से खंगाल रही हैं. ED फिलहाल यह जोड़ने की कोशिश में है कि विदेशी फंडिंग, ATM से नकद निकासी और तरह-तरह की सामाजिक गतिविधियों के बीच आखिर कड़ी क्या थी. एजेंसी इस नेटवर्क के दायरे, इसके लाभार्थियों और इससे जुड़े बाकी लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं.













