छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग की टीम ने दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए संरक्षित भारतीय फ्लैपशेल कछुओं को तस्करों के चंगुल से बचाया है। प्रारंभिक तफ्तीश में यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि इन दुर्लभ जीवों को स्थानीय बाजारों में लगभग 700 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मांस के रूप में बेचने की तैयारी चल रही थी। वन विभाग ने इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए एक मुख्य आरोपी को धर दबोचा है और उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है।
साप्ताहिक बाजार में वन विभाग की छापेमारी
पेंड्रा-पसान क्षेत्र में दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति के कछुओं की अवैध तस्करी और बिक्री की गुप्त सूचनाएं वन विभाग को लगातार मिल रही थीं। इन गंभीर सूचनाओं पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक विशेष निगरानी दल का गठन किया। इस विशेष टीम ने संदिग्ध ठिकानों और बाजारों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी। इसी कड़ी में 23 जुलाई को वन विभाग की टीम को पुख्ता जानकारी मिली कि ग्राम पीवी 124 के साप्ताहिक बाजार में कछुओं की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही है।
टीम ने बिना समय गंवाए बाजार में अचानक छापेमारी की। वहां एक संदिग्ध व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम दीपांकर राय बताया। जब टीम ने उसकी तलाशी ली, तो उसके कब्जे से 11 जीवित भारतीय फ्लैपशेल कछुए बरामद किए गए। आरोपी इन कछुओं को ग्राहकों को मांस के रूप में बेचने के लिए वहां लेकर आया था, जिससे वह बड़ा मुनाफा कमाने की फिराक में था।
मांस के लिए कछुओं का अवैध शिकार और भारी मुनाफा
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि तस्कर अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लालच में इन बेजुबान वन्यजीवों को निशाना बना रहे थे। पेंड्रा-पसान के स्थानीय बाजारों से लेकर जिला मुख्यालय तक के क्षेत्रों में इन कछुओं के मांस की मांग पैदा कर इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। आरोपी ग्राहकों से इसके लिए 700 रुपये प्रति किलो तक वसूल रहा था। वन विभाग की इस कार्रवाई से अवैध शिकारियों और तस्करों के पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में कछुओं की अवैध तस्करी पर काफी हद तक लगाम लगेगी।
अनुसूची-1 के तहत दर्ज हुआ गंभीर मामला
यह बात जानना बेहद जरूरी है कि भारतीय फ्लैपशेल कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत आते हैं। इस कानून के तहत अनुसूची-1 में शामिल जीवों को सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है। इन जीवों का शिकार करना, उन्हें अपने पास रखना, परिवहन करना या उनका व्यावसायिक व्यापार करना कानूनन एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना गया है। पकड़े गए आरोपी दीपांकर राय के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49, 49 बी, 50 और 51 के तहत कानूनी मामला दर्ज किया गया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत दोष साबित होने पर आरोपी को कठोर कारावास की सजा और भारी आर्थिक दंड भुगतना पड़ सकता है।



















