छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी प्रकरण में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के तहत रायपुर की अदालत में एक और महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज दाखिल किया गया है। एसीबी और ईओडब्ल्यू की ओर से अदालत के समक्ष पेश किए गए छठे पूरक चालान ने राज्य के राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। इस ताजा आरोप पत्र में कांग्रेस पार्टी के नेताओं सहित कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। कानूनी दस्तावेजों के विवरण में देश के जाने-माने कवि डॉक्टर कुमार विश्वास के एक आयोजन का प्रसंग भी शामिल है, जिससे यह पूरा मामला एक नए कानूनी और सार्वजनिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
व्हाट्सएप बातचीत से सामने आए लेन-देन के सूत्र
अदालत में पेश की गई इस नई जांच सामग्री का मुख्य आधार परंपरागत कागजी दस्तावेजों के बजाय इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बने हैं। आरोप पत्र में दर्ज विवरण के अनुसार, विधायक देवेंद्र सिंह यादव और कोयला घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है। जांचकर्ताओं ने इस डिजिटल संवाद को वित्तीय कड़ियों और विभिन्न गतिविधियों के बीच संबंध स्थापित करने वाले साक्ष्य के तौर पर अदालत के रिकॉर्ड में रखा है।
खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान साहित्यिक आयोजन और राशि का विवरण
चालान में दर्ज ब्योरे के मुताबिक, संबंधित बातचीत उस समय की है जब प्रदेश में खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव की सियासी सरगर्मियां जोरों पर थीं। चुनावी गतिविधियों के बीच हुए इस डिजिटल संवाद में डॉक्टर कुमार विश्वास के एक सांस्कृतिक या साहित्यिक मंच के आयोजन की चर्चा दर्ज है। इस कार्यक्रम के संचालन और प्रबंधन के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था किए जाने का स्पष्ट उल्लेख इस बातचीत में मिलता है। आरोप पत्र के इस ब्योरे के साथ यह पहलू भी रेखांकित किया गया है कि कुमार विश्वास को दी जाने वाली राशि वास्तव में कोयला लेवी के जरिए जुटाए गए धन से दी गई अथवा नहीं, इस तथ्य की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
14 दिनों के भीतर भेजी गई थी 3 करोड़ रुपये की खेप
जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किए गए डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से सामने आया है कि 28 मार्च 2022 से 10 अप्रैल 2022 के बीच यानी महज 14 दिनों के अंतराल में कुल 3 करोड़ रुपये की राशि निर्वाचन क्षेत्र में पहुंचाई गई थी। यह पूरी रकम एक बार में न भेजकर 11 अलग-अलग किस्तों में वहां पहुंचाई गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, इस धनराशि का एक बड़ा हिस्सा चुनावी प्रचार अभियानों, मैदानी व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन पर खर्च किया गया था। छठे पूरक चालान के अदालत में आने के बाद इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक बहस दोनों के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इस अदालती दस्तावेज में नाम का जिक्र आने को लेकर फिलहाल कुमार विश्वास की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।





















