शीत ऋतु की दस्तक के साथ ही कृषि क्षेत्र में लाभकारी फसलों की तैयारी तेज हो जाती है। ठंड के महीनों में बटन मशरूम का उत्पादन किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए आमदनी का एक मजबूत जरिया साबित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ डॉ वीर सिंह का कहना है कि मशरूम उत्पादन की योजना बना रहे किसानों के लिए खाद यानी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का यह बिल्कुल सही वक्त है। कंपोस्ट तैयार होने में लगभग एक महीने का समय लगता है, जिसके बाद अक्टूबर अथवा नवंबर के महीने में मशरूम के बीज यानी स्पॉन की बुवाई शुरू की जा सकती है।
अनुकूल मौसम और बिना एसी साधारण कमरे में शुरुआत
अंबिकापुर और उसके आसपास के मैदानी व पहाड़ी अंचलों में मौजूद प्राकृतिक ठंडक बटन मशरूम की पैदावार के लिए पूरी तरह मुफीद मानी जाती है। कई लोगों को लगता है कि बटन मशरूम के लिए महंगे वातानुकूलित प्लांट की दरकार होती है, जबकि वास्तविकता यह है कि सामान्य घरेलू ढांचे में भी किसान इसकी खेती आसानी से कर सकते हैं। शुरुआती चरण में किसी भी तरह के एसी या कृत्रिम ठंडक देने वाले उपकरणों की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान साधारण हवादार कमरों में मचान बनाकर या फिर लगभग 18/24 आकार की प्लास्टिक थैलियों का इस्तेमाल करके कम जगह में भी व्यवस्थित ढंग से फसल ले सकते हैं।
कंपोस्ट बनाने की सामग्री और आवश्यक विधि
सफल मशरूम उत्पादन की पूरी बुनियाद कंपोस्ट की गुणवत्ता पर टिकी होती है। इसे बनाने के लिए गेहूं का भूसा या धान का पैरा पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए। सड़े-गले भूसे के इस्तेमाल से बचना जरूरी है ताकि फफूंद या संक्रमण न फैले। इसके अलावा मिश्रण में गेहूं का चोकर, यूरिया, जिप्सम और कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट जैसी जरूरी सामग्रियों को निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है।
मिश्रण तैयार करते समय सामग्री का ढेर पर्याप्त मात्रा में बड़ा होना चाहिए। यदि ढेर छोटा होगा, तो उसके अंदर बैक्टीरिया की सक्रियता से पैदा होने वाला प्राकृतिक तापमान नहीं बन पाएगा और सड़ांध की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी। सड़न और डीकंपोजिशन को एकसमान रखने के लिए इस ढेर को हर दो से तीन दिन के अंतराल पर पलटना अनिवार्य होता है। नियमित पलटने से भीतर तक हवा पहुंचती है और खाद समान रूप से पकती है।
तैयार खाद की पहचान और शुरुआती लागत
लगभग तीस दिनों की मेहनत के बाद जब कंपोस्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए, तब उसकी गुणवत्ता की जांच आवश्यक है। उत्तम कंपोस्ट का रंग गहरा भूरा होना चाहिए। उसमें नमी की मात्रा लगभग 30 से 40 प्रतिशत के बीच रहनी चाहिए। सबसे अहम बात यह है कि तैयार खाद से अमोनिया गैस या किसी भी तरह की तीखी अथवा दुर्गंध नहीं आनी चाहिए।
डॉ वीर सिंह के अनुसार, बटन मशरूम के लिए कंपोस्ट तैयार करने का खर्च अन्य किस्मों के मुकाबले थोड़ा अधिक बैठ सकता है। तकरीबन तीन क्विंटल खाद तैयार करने में लगभग 3000 से 4000 रुपये तक की लागत आती है। हालांकि बाजार में बटन मशरूम की ऊंची मांग और मिलने वाले दाम को देखते हुए यह खर्च आसानी से मुनाफे में तब्दील हो जाता है।
बाजार में खपत और कमाई के अवसर
तैयार बटन मशरूम की मांग केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी इसकी भारी खपत देखी जा रही है। खुदरा बाजार में करीब 200 ग्राम का पैकेट लगभग 50 रुपये के आसपास आसानी से बिक जाता है। उत्पादक अपनी उपज को सीधे स्थानीय डेयरी, किराना दुकानों, सब्जी मंडियों के अलावा होटलों और भोजनालयों में पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही शादियों, जन्मदिन की पार्टियों और अन्य पारिवारिक आयोजनों में खानपान के दौरान बटन मशरूम के व्यंजनों का चलन लगातार बढ़ रहा है, जिससे उत्पादकों को नियमित ग्राहक और बेहतर मुनाफा मिल सकता है।























