घर में अक्सर बच्चे माता-पिता के पास आकर शिकायत करते हैं कि वे ऊब रहे हैं और उनके पास करने के लिए कुछ भी नहीं है। ज्यादातर घरों में इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत स्मार्टफोन या टीवी चालू कर दिया जाता है। ऐसा करने से बच्चा थोड़ी देर के लिए शांत और व्यस्त तो दिखाई देने लगता है, लेकिन डिजिटल स्क्रीन पर यह लगातार निर्भरता उसकी अपनी सोचने और कुछ नया करने की स्वाभाविक कोशिशों को कमजोर कर देती है। जब हर खाली पल का समाधान केवल फोन बन जाता है, तब बच्चे खुद से कोई गतिविधि तलाशने का प्रयास छोड़ देते हैं।
तुरंत फोन थमाने के बजाय पूछें बच्चे की पसंद
जब भी कोई बच्चा बोर होने की बात कहे, तो सबसे जरूरी कदम यह है कि उसकी बात को अनसुना न किया जाए। उसकी बात को ध्यान से सुनें और सीधे यह पूछें कि उसका क्या करने का मन है। इसके तुरंत बाद उसे दो या तीन सीधे विकल्प दिए जा सकते हैं, जैसे कि वह कोई चित्रकारी करना चाहेगा या अपने पसंदीदा खिलौनों के साथ खेलना पसंद करेगा। जब माता-पिता बच्चे के सामने सीमित और स्पष्ट विकल्प रखते हैं, तो इससे उसमें खुद निर्णय लेने का हुनर पनपता है। हर परिस्थिति में माता-पिता को ही आगे बढ़कर कोई खेल या काम तय करने की आवश्यकता नहीं होती।
बिना तय काम के खाली समय भी है बेहद जरूरी
अभिभावकों को यह समझना होगा कि बच्चे के दिन के हर घंटे को किसी न किसी तय गतिविधि से भरना बिल्कुल जरूरी नहीं है। दिन के कुछ हिस्से को पूरी तरह से खाली छोड़ देना चाहिए, जहां कोई निश्चित नियम या काम न हो। इस खाली वक्त में बच्चा अपने खिलौनों को नए तरीके से इस्तेमाल कर सकता है, मनगढ़ंत कहानियां गढ़ सकता है, चित्र बना सकता है या घर के साधारण सामान से कोई अनोखा खेल बना सकता है। शुरुआत में हो सकता है कि वह कई बार आकर कहे कि वह खाली बैठा है, लेकिन कुछ समय बाद वह अपने स्तर पर ही समय बिताने के नए रास्ते तलाशने लगता है।
तैयार करें एक खास एक्टिविटी बॉक्स
घर में एक छोटा सा बक्सा तैयार करना बेहद मददगार साबित हो सकता है, जिसके भीतर बच्चे की रुचि से जुड़ी सामग्रियां रखी हों। इस डिब्बे में रंग, स्केचबुक, पहेलियां, कहानियों की किताबें, कागज के क्राफ्ट का सामान या छोटे बोर्ड गेम शामिल किए जा सकते हैं। जैसे ही बच्चा कहे कि उसके पास कोई काम नहीं है, उसे मोबाइल देने की जगह इस डिब्बे में से अपनी पसंद की कोई वस्तु निकालने के लिए कहें। इससे बच्चे की नजरों के सामने स्क्रीन से हटकर कई रचनात्मक रास्ते खुले रहते हैं।
आउटडोर गतिविधियां और पारिवारिक खेल
यदि मौसम अनुकूल हो और आस-पास सुरक्षित स्थान उपलब्ध हो, तो बच्चों को बाहर जाकर खेलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। पार्क में दौड़ना, साइकिल चलाना, गेंद से खेलना या साधारण चहलकदमी भी उनके पूरे दिन को सक्रिय बना सकती है। इसके साथ ही, घर के भीतर भी अभिभावक बच्चे के साथ लूडो, कैरम या पहेलियों जैसे सीधे खेल खेल सकते हैं। ऐसे खेल बच्चों को बातचीत करने, रणनीति बनाने और दिमागी कसरत करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।
खाली समय संभालने की जिम्मेदारी खुद बच्चे को दें
बचपन में ऊब महसूस होना कोई खराबी या समस्या नहीं है। वास्तव में, खाली समय ही वह अवसर होता है जब बच्चा अपनी असली पसंद को पहचानता है और अकेले वक्त बिताने का संतुलन सीखता है। इसलिए अगली बार जब भी वह कहे कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा, तो झटपट स्क्रीन देने के बजाय उसे कहें कि वह आज खुद सोचे कि उसे क्या करना है। जरूरत पड़ने पर थोड़ी मदद या सुझाव दिए जा सकते हैं, लेकिन मनोरंजन उपलब्ध कराने का जिम्मा हमेशा गैजेट्स या अभिभावकों के सिर नहीं होना चाहिए। अपने खाली पलों को रचनात्मक ढंग से संभालना भी एक जरूरी सीख है।



















