प्राकृतिक तरीकों से खेती करने वाले किसानों के लिए घर पर कीटनाशक तैयार करना एक किफायती और कारगर विकल्प बनकर उभर रहा है। इसी क्रम में डॉ. संदीप शर्मा ने प्राकृतिक कीटनाशक दशपर्णी अर्क को तैयार करने की पूरी विधि और इसके फायदों के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अर्क मुख्य रूप से दस अलग-अलग तरह की कड़वी पत्तियों के संयोजन से बनाया जाता है, जिससे फसलों को कीटों के हमले से सुरक्षित रखा जा सकता है।
दशपर्णी अर्क बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
दशपर्णी अर्क के निर्माण में ऐसी वनस्पतियों की पत्तियों को प्राथमिकता दी जाती है जिनमें स्वाभाविक रूप से तीखापन या कड़वाहट पाई जाती है। इसके लिए करंज, बेल, बेशरम, हल्दी और पपीता सहित लगभग 10 विभिन्न प्रकार की पत्तियों को एकत्र किया जाता है। पत्तियों के इस प्राकृतिक मिश्रण के अलावा घोल में कई अन्य घरेलू और जैविक घटक भी शामिल किए जाते हैं।
इस पूरे घोल को व्यवस्थित करने के लिए 200 लीटर की धारिता वाले एक प्लास्टिक ड्रम की जरूरत होती है। इस ड्रम में 200 लीटर साफ पानी भरा जाता है। इसके पश्चात उसमें करीब 10 लीटर गोमूत्र तथा 1 से 2 किलोग्राम गोबर की खाद डाली जाती है। इसके साथ ही हल्दी पाउडर, मिर्च, हींग और तंबाकू की पत्तियां भी 10 चुनिंदा पत्तियों के साथ ड्रम के पानी में अच्छी तरह मिला दी जाती हैं।
मिश्रण पकाने की प्रक्रिया और समय
सभी आवश्यक तत्वों को ड्रम में डालने के उपरांत इस पूरे मिश्रण को एक निश्चित दिशा में हिलाया जाता है। डॉ. शर्मा के अनुसार, ड्रम में मौजूद सभी सामग्रियों को नियमित अंतराल पर घड़ी की सुई की दिशा में घुमाना आवश्यक होता है। यह प्रक्रिया घोल के उचित किण्वन के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।
घोल को पूरी तरह परिपक्व होने में लगभग 40 दिन का समय लगता है। जब यह 40 दिन की अवधि पूरी कर लेता है, तब अर्क इस्तेमाल के योग्य बन जाता है। इसके बाद किसान किसी महीन सूती कपड़े या छन्नी की सहायता से पूरे घोल को छान लेते हैं। छानने के उपरांत जो तरल बचता है, वही दशपर्णी अर्क के रूप में जाना जाता है।
छिड़काव की मात्रा और फसलों पर प्रभाव
तैयार अर्क का खेतों में प्रयोग करने के लिए भी एक निर्धारित अनुपात तय किया गया है। खेतों में इस्तेमाल करते समय लगभग 5 से 6 लीटर दशपर्णी अर्क को 250 लीटर पानी में मिलाया जाता है। इस अनुपात में तैयार किया गया घोल एक हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में छिड़काव करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त रहता है।
यह प्राकृतिक कीटनाशक फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले रस चूसक कीड़ों और विभिन्न तरह की इल्लियों के प्रभावी प्रबंधन में काम आता है। किसान अरहर, उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों के अलावा कई अन्य फसलों पर भी इसका सुरक्षित और सफल छिड़काव कर सकते हैं।





















