चीनी नौसेना ने अपने बेड़े को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल YJ-20 के वर्टिकल लॉन्च का फुटेज जारी किया है। यह प्रक्षेपण चीन के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर टाइप-052D के वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) के जरिए अंजाम दिया गया। यद्यपि इस परीक्षण की सटीक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती नौसैनिक प्रभुत्व की रणनीति को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। बीजिंग की प्राथमिकता अपनी नौसेना को वैश्विक स्तर पर त्वरित कार्रवाई में सक्षम 'ब्लू वॉटर नेवी' के रूप में स्थापित करने की है, जिससे अमेरिकी नौसेना के पारंपरिक प्रभुत्व को सीधी चुनौती मिल सके।
YJ-20 मिसाइल की मारक क्षमता और तकनीकी खूबियां
सार्वजनिक रूप से पहली बार सितंबर 2025 में बीजिंग की सैन्य परेड के दौरान प्रदर्शित की गई YJ-20 को 'कैरियर किलर' के नाम से जाना जाता है। समुद्र आधारित यह चीन की पहली हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है, जो अब व्यापक उत्पादन चरण को पार कर चुकी है। तकनीकी मापदंडों के अनुसार, लगभग 9 मीटर लंबी और 850 मिलीमीटर से कम व्यास वाली यह मिसाइल 1,000 से 1,500 किलोमीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
उड़ान के दौरान यह मिसाइल असाधारण गति और गतिशीलता का प्रदर्शन करती है
- मध्य-चरण उड़ान: उड़ान के बीच के हिस्से में यह मिसाइल मैक-6 से अधिक की गति बनाए रखती है और अपनी अधिकतम सीमा 13 से 14 मिनट में तय कर सकती है।
- अंतिम चरण का हमला: लक्ष्य के निकट पहुंचते ही यह मिसाइल अपनी दिशा में अनिश्चित बदलाव करते हुए मैक-10 यानी 12,348 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति हासिल कर लेती है।
- रडार सुरक्षा सीमा: यह मिसाइल 40 से 60 किलोमीटर की ऊंचाई पर ग्लाइड करती है, जो अधिकांश अर्ली वार्निंग रडार प्रणालियों की प्रभावी ट्रैकिंग सीमा से ऊपर है।
अपनी अत्यधिक गति और ग्लाइडिंग क्षमता के कारण दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम के पास प्रतिक्रिया देने का बेहद कम समय बचता है। मारक क्षमता और गति के मामले में यह मिसाइल भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की तुलना में काफी अधिक दूरी और रफ्तार प्रदान करती है, जिससे यह बड़े युद्धपोतों एवं विमानवाहक पोतों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
टाइप-052D और टाइप-055 डिस्ट्रॉयर पर तैनाती का गणित
चीनी नौसैनिक विशेषज्ञ सॉन्ग झोंगपिंग के विश्लेषण के अनुसार, टाइप-052D पोत वास्तव में चीन के अधिक उन्नत टाइप-055 डिस्ट्रॉयर के विकास के लिए एक परीक्षण मंच के रूप में काम कर चुका है। इससे पहले दिसंबर 2025 में YJ-20 का प्रक्षेपण टाइप-055 से दिखाया गया था। अब टाइप-052D से सफल प्रक्षेपण यह साबित करता है कि यह मिसाइल चीनी नौसेना के बेड़े में बड़े पैमाने पर एकीकृत की जा रही है।
वर्तमान में चीनी नौसेना के पास निम्नलिखित प्रमुख युद्धपोत सेवा में मौजूद हैं
- टाइप-052D डिस्ट्रॉयर: बेड़े में कुल 35 पोत शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक 64 वर्टिकल लॉन्च सेल्स से लैस है।
- टाइप-055 डिस्ट्रॉयर: बेड़े में 10 पोत तैनात हैं, जिनमें से प्रत्येक में 112 वर्टिकल लॉन्च सेल्स मौजूद हैं।
यदि इन दोनों श्रेणियों के जहाजों पर YJ-20 मिसाइलों की भारी संख्या में तैनाती की जाती है, तो विरोधी नौसेनाओं के लिए चीनी तटीय रेखा और दक्षिण चीन सागर में प्रवेश करना अत्यधिक जोखिम भरा हो जाएगा।
ताइवान, दक्षिण चीन सागर और अमेरिका के लिए रणनीतिक चुनौतियां
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक डिफेंस प्रायोरिटीज के एशिया कार्यक्रम के निदेशक लाइल गोल्डस्टीन का आकलन है कि YJ-20 का यह वीडियो मात्र एक परीक्षण नहीं बल्कि चीनी बेड़े में उन्नत मारक क्षमताओं के त्वरित एकीकरण की पुष्टि करता है। उनके अनुसार, इस मिसाइल की उपस्थिति से ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना के अभियानों के लिए परिचालन संबंधी खतरे कई गुना बढ़ जाएंगे।
लाइल गोल्डस्टीन ने यह भी रेखांकित किया कि हालांकि अमेरिकी पनडुब्बियां ऐसे परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन उनकी सीमित मिसाइल वहन क्षमता के कारण वे अकेले निर्णायक बढ़त हासिल करने में असमर्थ रह सकती हैं। ऐसे में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी रक्षा रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना होगा।



















