अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर कई बार नेताओं के चेहरे के हाव-भाव और उनकी तस्वीरें औपचारिक बयानों से कहीं ज्यादा बड़ी कहानी बयां कर देती हैं। वैश्विक मंचों पर आमतौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हमेशा एक बेहद गंभीर, सख्त और शांत नेता के रूप में देखा जाता है, जो कूटनीतिक बैठकों के दौरान अपनी भावनाओं को जाहिर करना पसंद नहीं करते। लेकिन हाल ही में आयोजित हुए BRICS शिखर सम्मेलन से सामने आई तस्वीरों में शी जिनपिंग का एक बिल्कुल अनोखा और दुर्लभ रूप देखने को मिला है। इस सम्मेलन में जब वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े थे, तो उन्हें खुलकर ठहाके लगाते हुए देखा गया। यह एक ऐसा दुर्लभ नजारा था जो कूटनीतिक औपचारिकताओं की तय सीमाओं को लांघकर सामने आया है। नेताओं के बीच का यह अनौपचारिक तालमेल यह दर्शाता है कि इस गैर-पश्चिमी कूटनीतिक ब्लॉक के भीतर नेताओं के आपसी संबंध कितने सहज और मजबूत हैं, जो कि पश्चिमी देशों के नेताओं के साथ उनकी बैठकों में अमूमन देखने को नहीं मिलता।
वॉशिंगटन की सख्त कूटनीति और अमेरिकी कड़ा रुख
इस अनौपचारिक गर्मजोशी के महत्व को सही ढंग से समझने के लिए, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी व रूसी नेतृत्व के बीच हुई पुरानी बैठकों की तस्वीरों पर नजर डालना जरूरी होगा। जब भी डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, तो उनके बीच केवल औपचारिक रूप से हाथ मिलाने की प्रक्रिया दिखाई दी। उनके चेहरे पर दिखने वाली मुस्कान कूटनीतिक मजबूरी और तय प्रोटोकॉल का हिस्सा मात्र लगती थी। उन मुलाकातों की तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच एक स्पष्ट तनाव, दूरी और अविश्वास साफ तौर पर महसूस किया जा सकता था। इसी तरह, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी डोनाल्ड ट्रंप के समीकरण हमेशा बहुत नपे-तुले नजर आए। अमेरिकी नेतृत्व द्वारा आपसी तालमेल दिखाने की तमाम कोशिशों के बावजूद, पुतिन और ट्रंप की बॉडी लैंग्वेज में हमेशा एक मानसिक दूरी और कड़ापन बना रहा, जो वॉशिंगटन और इन देशों के बीच के गहरे मतभेदों को उजागर करता है।
गैर-पश्चिमी गठबंधन में आपसी विश्वास और सहजता
इसके ठीक उलट, BRICS शिखर सम्मेलन के मंच से सामने आई कूटनीतिक तस्वीरें एक बिल्कुल अलग ही कहानी कहती हैं। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक-दूसरे का हाथ थामना केवल कैमरों के लिए बनाया गया कोई औपचारिक पोज नहीं था। यह वास्तव में इन देशों के बीच बढ़ते गहरे रणनीतिक भरोसे और सहजता का सीधा प्रतीक है, जो इनके आपसी द्विपक्षीय मतभेदों के बावजूद बना हुआ है। इन तीनों शीर्ष नेताओं के बीच की स्वाभाविक हंसी और बॉडी लैंग्वेज साबित करती है कि उनके आपसी संबंध कितने सहज हैं। यह एक ऐसी दोस्ती और तालमेल है, जिसके लिए डोनाल्ड ट्रंप जैसे पश्चिमी नेता शायद हमेशा तरसते रह जाते हैं। पुतिन की बॉडी लैंग्वेज भी इस बात की गवाही देती है; जहां पश्चिमी नेताओं के साथ बातचीत के समय वह बेहद गंभीर रहते हैं, वहीं मोदी और शी जिनपिंग के साथ उनका चेहरा मुस्कुराहटों से खिल उठता है, जिससे यह साफ होता है कि वह किस गुट के साथ खुद को मानसिक रूप से अधिक सहज पाते हैं।
पश्चिमी दबाव के सामने खड़ा होता ग्लोबल साउथ
नेताओं के बीच दिखने वाली यह अनौपचारिक केमेस्ट्री असल में बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था का भी एक बड़ा संकेत है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अक्सर टैरिफ लगाने, आर्थिक प्रतिबंधों की धमकियां देने और 'अमेरिका फर्स्ट' के कड़े सिद्धांतों पर टिकी रही हैं। इस एकतरफा दबाव वाली नीति के जवाब में, अब BRICS और RIC जैसे मंच एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं जहां सभी सदस्य देशों को बराबरी का सम्मान और महत्व मिले। तस्वीरों में दिखने वाली नेताओं की यह गर्मजोशी स्पष्ट रूप से यह संदेश देती है कि गैर-पश्चिमी देश अब किसी भी प्रकार के पश्चिमी दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। यह कूटनीतिक जुड़ाव आज के समय में ग्लोबल साउथ की उभरती हुई ताकत और आत्मविश्वास को बयां करता है, जो वॉशिंगटन की लेन-देन पर आधारित कूटनीति के मुकाबले एक मजबूत विकल्प पेश कर रहा है।
वैश्विक पुल के रूप में भारत का मजबूत कूटनीतिक प्रभाव
इन तस्वीरों का सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगभग हर मुख्य फ्रेम के केंद्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर आ रहे हैं। यह स्थिति भारत की स्वतंत्र और पूरी तरह से संतुलित विदेश नीति का एक बेहतरीन विजुअल उदाहरण है। भारत ने दुनिया के सामने यह साबित किया है कि वह रूस और चीन दोनों के साथ अपने कूटनीतिक समीकरणों को बेहद सहज बनाए रखने में सक्षम है, भले ही उसके अपने द्विपक्षीय मुद्दे क्यों न हों। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बावजूद, प्रधानमंत्री मोदी के साथ शी जिनपिंग का इस तरह हंसकर गर्मजोशी से हाथ मिलाना भारत की कूटनीतिक पकड़ और बढ़ते वैश्विक कद को दर्शाता है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए भी यह एक सीधा संकेत है कि आज का भारत दुनिया के विभिन्न विरोधी ध्रुवों को आपस में जोड़ने वाले सबसे मजबूत और भरोसेमंद पुल के रूप में स्थापित हो चुका है।



















