भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवा एक बार फिर आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच लगभग 6 साल के लंबे अंतराल के बाद यह सीधी उड़ान सेवा बहाल हुई है। यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी बैठक से पहले दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है।
द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार को मिलेगी गति
दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली को कूटनीतिक और व्यापारिक मोर्चे पर एक बड़ी प्रगति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क को धीरे-धीरे मजबूत किया गया है। मार्च 2026 में विमानन कंपनी इंडीगो ने कोलकाता और शंघाई के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू की थी, जिससे कोलकाता इस कनेक्टिविटी का एक मुख्य केंद्र बनकर उभरा। इसके बाद अप्रैल 2026 में एयर चाइना ने भी 6 साल के बाद दिल्ली से बीजिंग के लिए अपनी नॉन-स्टॉप हवाई सेवा को दोबारा शुरू किया था।
हवाई मार्गों का तेजी से हुआ विस्तार
हवाई संपर्क को सामान्य बनाने की दिशा में दोनों देशों ने तेजी से प्रयास किए हैं। अप्रैल 2026 के अंत में इंडीगो ने दिल्ली और ग्वांगझू के बीच भी अपनी सीधी उड़ान सेवा की शुरुआत की थी। इसके बाद अगस्त 2026 में दोनों देशों की ओर से कई नई उड़ानों की घोषणा की गई, जिससे हवाई कनेक्टिविटी में और अधिक सुधार हुआ। सितंबर 2026 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से ठीक पहले दिल्ली और ग्वांगझू के बीच सीधी उड़ानों का परिचालन शुरू होना दोनों देशों के आपसी संबंधों में बढ़ते तालमेल को दर्शाता है।



















