अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सहभागिता करने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली की धरती पर कदम रख चुके हैं। उनके वास्तविक आगमन से ठीक एक दिन पूर्व राष्ट्रीय राजधानी के मार्गों पर उनकी आधिकारिक कार को एक विशाल काले सुरक्षा आवरण से ढककर ले जाते हुए देखा गया था। इस दृश्य का वीडियो सामने आने के बाद रणनीतिक और आम हलकों में तरह-तरह के सवाल उठने लगे थे। हालांकि, जब बारह सितंबर को चीनी राष्ट्रपति दिल्ली पहुंचे और उनका आधिकारिक काफिला सड़कों पर आगे बढ़ा, तब वह काला पर्दा पूरी तरह हटा दिया गया था। इस बदलाव ने लोगों के मन में यह उत्सुकता जगाई कि आखिर सफर के दौरान इस बख्तरबंद गाड़ी को इस तरह क्यों छुपाया गया था और इसके पीछे वास्तविक प्रक्रिया क्या होती है।
परिवहन के दौरान वाहनों को ढकने का सुरक्षा तर्क
विदेशी दौरों पर किसी भी शक्तिशाली राष्ट्र के शीर्ष नेता की सुरक्षा व्यवस्था बेहद जटिल और त्रिस्तरीय होती है। जिनपिंग की आधिकारिक लिमोजिन को दिल्ली के मार्गों पर काले सुरक्षा कवर में ले जाना किसी अचानक उपजे खतरे या असाधारण आपात स्थिति का परिणाम नहीं था। कूटनीतिक और सुरक्षा नियमों के अनुसार, राष्ट्राध्यक्षों की विशेष बख्तरबंद गाड़ियों को अग्रिम रूप से आयोजन स्थल वाले देश में भेजा जाता है। इस पूरी परिवहन प्रक्रिया के दौरान गाड़ियों को मौसम की मार, धूल, गंदगी और रास्ते में होने वाले किसी भी संभावित नुकसान से बचाने के लिए ढका जाता है।
इसके अलावा इस प्रक्रिया का एक मुख्य पहलू तकनीकी गोपनीयता भी है। आधुनिक राष्ट्रपतियों के विशेष वाहनों में संचार उपकरण, उन्नत सेंसर और सुरक्षा कवच लगे होते हैं। लॉजिस्टिक आवाजाही के दौरान इन संवेदनशील हिस्सों को आम जनता और कैमरों की सीधी नजरों से दूर रखना सुरक्षा प्रोटोकॉल का एक मानक अभ्यास माना जाता है। इसलिए दिल्ली की सड़कों पर काले कवर में दौड़ती गाड़ी को किसी नए खतरे के बजाय केवल एक व्यवस्थित सुरक्षा और रख-रखाव प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।
नेताओं के आगमन पर सामान्य स्वरूप में लौटी लिमोजिन
बारह सितंबर को जब शी जिनपिंग का विमान नई दिल्ली के हवाई अड्डे पर उतरा, तब उनका आधिकारिक वाहन बिल्कुल अपने सामान्य और भव्य रूप में मौजूद था। उनके स्वागत और काफिले की वास्तविक रवानगी के दौरान गाड़ी के ऊपर कोई अतिरिक्त पर्दा नहीं था। इससे यह तथ्य स्पष्ट होता है कि ऐसे सुरक्षा आवरण केवल तब इस्तेमाल किए जाते हैं जब गाड़ी खाली होती है और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक लॉजिस्टिक मूवमेंट के तहत पहुंचाया जा रहा होता है।
इस तरह की व्यवस्था भारत के लिए कोई पहली बार देखने को नहीं मिली है। इससे पहले जब शी जिनपिंग ने मलेशिया का राजकीय दौरा किया था, तब भी उनके आधिकारिक वाहन को हवाई अड्डे और अन्य पड़ावों के बीच इसी तरह काले सुरक्षा कवर में ले जाया गया था। यह चीनी सुरक्षा तंत्र की नियमित संचालन प्रक्रिया का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे वे विदेश यात्राओं में सख्ती से लागू करते हैं।
होंगची एन701 का ऐतिहासिक और तकनीकी महत्व
शी जिनपिंग जिस आधिकारिक लिमोजिन में सफर करते हैं, उसका नाम होंगची एन701 है। इस वाहन का निर्माण चीन की प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल कंपनी एफएडब्ल्यू के प्रमुख ब्रांड होंगची ने किया है। होंगची का चीनी राजनीतिक गलियारों के साथ बेहद पुराना और प्रतीकात्मक जुड़ाव रहा है। वर्ष 1958 में फर्स्ट ऑटोमोटिव वर्क्स ने इसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए विशेष रूप से विकसित करना शुरू किया था।
दशकों के सफर के बाद यह ब्रांड आज चीन के सर्वोच्च राजकीय गौरव का प्रतीक बन चुका है। एन701 मॉडल को खास तौर पर राष्ट्रपति स्तर के कड़े सुरक्षा मानकों पर तैयार किया गया है, जिसमें आधुनिकतम बख्तरबंद तकनीक और आपातकालीन जीवन रक्षक प्रणालियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय दौरों पर भी चीन अपने राष्ट्रपति के लिए विदेशी गाड़ियों के बजाय अपने घरेलू ब्रांड की इसी खास लिमोजिन पर पूरा भरोसा जताता है।
विशाल प्रतिनिधिमंडल और कड़ी सुरक्षा घेराबंदी
चीनी राष्ट्रपति के इस भारत दौरे के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनकी अगवानी की। सूत्रों के अनुसार, जिनपिंग अपने प्रवास के दौरान नई दिल्ली के ताज होटल की पांचवीं मंजिल पर ठहरेंगे। इस मंजिल और होटल के आसपास सुरक्षा का कड़ा पहरा लगाया गया है।
इस यात्रा में जिनपिंग के साथ केवल कुछ शीर्ष अधिकारी ही नहीं, बल्कि करीब चार सौ लोगों का एक विशाल चीनी दल मौजूद है। इस दल में उनके कूटनीतिक सहयोगी, सुरक्षा कर्मी और अन्य तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं। वर्ष 2020 में हुए गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के आपसी संबंधों में लंबे समय तक भारी खिंचाव बना रहा था। लगभग सात वर्षों के अंतराल के बाद हो रहे इस दौरे में बारह और तेरह सितंबर को होने वाली ब्रिक्स वार्ताओं के जरिए दोनों पक्ष अपने द्विपक्षीय समीकरणों को स्थिर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


















