भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट मुकाबले के पांचवें दिन भारतीय टीम ने शानदार वापसी करते हुए मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। चौथे दिन की एक बड़ी चूक को सुधारते हुए ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने श्रीलंकाई कप्तान धनंजय डिसिल्वा की जुझारू पारी का अंत किया। खेल के चौथे दिन जडेजा की नो बॉल के कारण मिला जीवनदान धनंजय के लिए वरदान साबित हुआ था, लेकिन अंतिम दिन आखिरकार जडेजा ने उन्हें पवेलियन भेजकर अपनी गलती का प्रायश्चित कर लिया। इस मुकाबले में धनंजय डिसिल्वा की बल्लेबाजी के साथ ही एक बेहद अनोखा संयोग भी चर्चा में आ गया है, जिसने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
चौथे दिन नो बॉल के ड्रामे ने बढ़ाई थी भारतीय खेमे की चिंता
मैच के चौथे दिन जब श्रीलंकाई टीम अपनी दूसरी पारी में संघर्ष कर रही थी, तब धनंजय डिसिल्वा महज 8 रन बनाकर खेल रहे थे। उसी समय रवींद्र जडेजा की एक गेंद धनंजय के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर स्लिप में खड़े केएल राहुल के हाथों में समा गई। भारतीय टीम ने कैच लपकते ही जश्न मनाना शुरू कर दिया था और ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका का एक और अहम विकेट गिर चुका है। हालांकि, भारतीय खिलाड़ियों की यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी, क्योंकि मैदानी अंपायर ने तुरंत नो बॉल का इशारा कर दिया। जडेजा का पैर क्रीज से बाहर निकल गया था, जिसके चलते धनंजय डिसिल्वा को एक बड़ा जीवनदान मिल गया। इसके बाद धनंजय ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक बिना कोई अतिरिक्त नुकसान पहुंचाए अपनी टीम को संभाले रखा।
धनंजय और सोनल के बीच 95 रनों की जुझारू साझेदारी
मुकाबले के पांचवें और अंतिम दिन श्रीलंकाई कप्तान धनंजय डिसिल्वा अपने साथी बल्लेबाज सोनल के साथ मैदान पर उतरे। भारतीय गेंदबाजों को उम्मीद थी कि सुबह के सत्र में जल्द ही सफलताएं मिलेंगी, लेकिन श्रीलंकाई जोड़ी ने बेहद संयम और समझदारी से भारतीय आक्रमण का सामना किया। दिन की पहली सफलता हासिल करने के लिए भारतीय टीम को एक घंटे से भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान धनंजय डिसिल्वा और सोनल दोनों ने क्रीज पर पैर जमाते हुए अपने-अपने अर्धशतक पूरे किए। दोनों बल्लेबाजों के बीच पांचवें विकेट के लिए 95 रनों की एक मजबूत साझेदारी हुई, जिसने भारतीय टीम की चिंताओं को बढ़ा दिया था।
रवींद्र जडेजा ने आखिरकार तोड़ी खतरनाक होती जोड़ी
जब यह साझेदारी भारतीय टीम के लिए खतरा बनती दिख रही थी, तब रवींद्र जडेजा ने एक बार फिर गेंदबाजी में कमाल दिखाया। उन्होंने खतरनाक साबित हो रहे धनंजय डिसिल्वा को आउट कर भारत को बहुप्रतीक्षित सफलता दिलाई। धनंजय डिसिल्वा ने अपनी इस पारी के दौरान 151 गेंदों का सामना करते हुए 59 रन बनाए, जिसमें 7 शानदार चौके शामिल थे। जडेजा द्वारा इस विकेट को हासिल करते ही भारतीय टीम ने राहत की सांस ली। चौथे दिन जिस बल्लेबाज को गलती से जीवनदान मिला था, उसे आखिरकार पांचवें दिन आउट कर जडेजा ने मुकाबले में भारत का पलड़ा भारी कर दिया।
धनंजय डिसिल्वा और नंबर 5 का अनोखा आंकड़ा
इस मुकाबले के साथ ही धनंजय डिसिल्वा के नाम एक दिलचस्प और अजीब सा रिकॉर्ड जुड़ गया है। टेस्ट क्रिकेट की चौथी पारी में उनका और नंबर 5 का साथ छूटने का नाम नहीं ले रहा है। अगर धनंजय डिसिल्वा की पिछली पांच चौथी पारियों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वे चार बार 50 से अधिक रन बनाने में सफल रहे हैं, लेकिन हर बार 60 रन के आंकड़े को छूने से ठीक पहले आउट हो गए।
साल 2024 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए धनंजय ने 50 रन बनाए थे। इसके बाद उसी साल डरबन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वे 59 रन के स्कोर पर पवेलियन लौटे थे। 2024 में ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक अन्य पारी में उन्होंने फिर से ठीक 50 रन बनाए। साल 2025 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट मैच में जरूर वे 12 रन बनाकर नाबाद रहे थे। अब 2026 में भारत के खिलाफ खेली गई इस चौथी पारी में भी वे ठीक 59 रन बनाकर आउट हुए हैं। इस प्रकार उनकी पिछली पांच में से चार पारियों का अंत 50 से 59 के बीच ही हुआ है।
रोमांचक मोड़ पर पहुंचा मैच, भारत के पास जीत का मौका
धनंजय डिसिल्वा और सोनल की साझेदारी टूटने के बाद मुकाबला एक बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। भारतीय गेंदबाजों के पास अब श्रीलंकाई टीम के निचले क्रम को समेटकर मैच अपने नाम करने का बेहतरीन अवसर है। पूरे मैच के दौरान जिस तरह से दोनों टीमों ने उतार-चढ़ाव देखे हैं, उससे अंतिम दिन का खेल दर्शकों के लिए बेहद दिलचस्प हो गया है। भारतीय टीम को यह मुकाबला जीतने के लिए अब सटीक गेंदबाजी और अनुशासित प्रदर्शन की जरूरत होगी।



















