अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अचानक अलविदा कहने वाले बेन स्टोक्स ने अपने भविष्य के करियर को लेकर पत्ते खोल दिए हैं। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज के आखिरी मुकाबले के बीच में संन्यास का ऐलान कर सभी को चौंकाने वाले इस दिग्गज खिलाड़ी ने साफ कर दिया है कि उनका इंटरनेशनल पिच पर लौटने का कोई भी इरादा नहीं है। यहाँ तक कि उन्होंने आगामी एशेज सीरीज के दौरान भी वापसी की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। खेल के मैदान पर अपनी आक्रामक शैली और कप्तानी के लिए मशहूर रहे बेन स्टोक्स ने अब अपनी नई पारी की रूपरेखा तैयार कर ली है और वह आने वाले समय में एक बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं।
कोचिंग की दुनिया में कदम रखने की तैयारी
खेल के सबसे लंबे प्रारूप से नाता तोड़ने के बाद बेन स्टोक्स ने अपनी अगली योजना साझा करते हुए बताया कि वह आगे चलकर कोचिंग की जिम्मेदारी संभालना चाहते हैं। इस दिशा में उन्होंने अभी से कदम बढ़ा दिए हैं और वह सक्रिय रूप से खेलते हुए ही अपना लेवल-3 कोचिंग कोर्स पूरा कर रहे हैं। उनका मानना है कि जैसे ही उनका पेशेवर खेल करियर पूरी तरह थमेगा, उनकी कोचिंग से जुड़ी सभी औपचारिक तैयारियां पहले से ही पूरी होनी चाहिए। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह आने वाले दिनों में अपनी राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच की कुर्सी संभालना चाहेंगे, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इसका सकारात्मक जवाब दिया। उनका कहना है कि मैदान से बाहर निकलकर किसी बड़ी लीडरशिप भूमिका में कार्य करना उन्हें बेहद आकर्षित करता है。
कप्तानी के फैसले पर हैरानी
अपनी कप्तानी के दिनों को याद करते हुए और टीम की मौजूदा प्रशासनिक स्थिति पर चर्चा करते हुए बेन स्टोक्स ने एक पुराने वाकये पर खुलकर बात की। उन्होंने हैरी ब्रूक का खुलकर समर्थन किया था, जिन्हें पिछली सर्दियों के एशेज दौरे के दौरान टेस्ट टीम का उप-कप्तान नियुक्त किया गया था। जब स्टोक्स ने कप्तानी छोड़ी, तो उन्हें पूरी उम्मीद थी कि यह जिम्मेदारी हैरी ब्रूक को सौंपी जाएगी, लेकिन ऐसा न करते हुए जो रूट को यह कमान दे दी गई। इस फैसले से बेन स्टोक्स को थोड़ी हैरानी जरूर हुई थी। उनका मानना है कि यदि कोई खिलाड़ी भविष्य का कप्तान या लीडर बनने के योग्य है, तो उसे समय रहते वह कमान सौंप देनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जो रूट के प्रति पूरी तरह से सकारात्मक भाव रखते हैं और उनके लिए केवल सफलता की कामना करते हैं। उनका मानना है कि जो रूट स्टीफन फ्लेमिंग के साथ मिलकर इस भूमिका का पूरा आनंद उठाएंगे क्योंकि वह पहले भी स्टीफन फ्लेमिंग के साथ काम कर चुके हैं और उन्हें एक बेहतरीन इंसान मानते हैं।
बैजबॉल युग और कोचिंग में बदलाव
साल 2022 से चार साल तक टेस्ट टीम की कमान संभालने वाले बेन स्टोक्स ने मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम के साथ मिलकर अंग्रेजी क्रिकेट खेलने के अंदाज को पूरी तरह से बदल दिया था, जिसे दुनिया ने ‘बैजबॉल’ नाम दिया। संयोगवश, बेन स्टोक्स के संन्यास की घोषणा के ठीक दो हफ्तों के भीतर ही ब्रेंडन मैकुलम के भी टेस्ट भूमिका से हटने का ऐलान सामने आ गया। इसके बाद इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग को नया टेस्ट कोच नियुक्त कर दिया। ब्रेंडन मैकुलम का चार साल का कार्यकाल साल 2022 में शुरू हुआ था, जिसके शुरुआती दौर में टीम ने धुआंधार और आक्रामक बल्लेबाजी के जरिए खूब सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ टीम का फॉर्म काफी लड़खड़ा गया और उन्हें अपने पिछले नौ टेस्ट मैचों में से सात मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा। इन तमाम उतार-चढ़ाव के बीच अब कोचिंग का नया दौर शुरू हो चुका है।
भविष्य में वापसी के सभी दरवाजे बंद
अगले साल गर्मियों में खेली जाने वाली घरेलू एशेज सीरीज में अपनी वापसी की अटकलों पर विराम लगाते हुए बेन स्टोक्स ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह अब सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में कभी मैदान पर नहीं उतरेंगे। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अब 35 वर्ष के हो चुके हैं और यदि वह टीम के कप्तान नहीं हैं, तो उनके लिए सिर्फ एक सामान्य खिलाड़ी के तौर पर खेलना बेहद कठिन होगा। उन्होंने यह बात किसी अन्य की कप्तानी में खेलने को लेकर नहीं कही, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने करियर का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस जिम्मेदारी और काम को समर्पित कर दिया है। यही वजह है कि यदि वह इंग्लैंड के लिए दोबारा कभी मैदान पर उतरते, तो केवल कप्तान की हैसियत से ही उतरते। फिलहाल, खेल को पूरी तरह छोड़ने और राष्ट्रीय टीम के लिए आगे न खेलने के विचार को लेकर वह मानसिक रूप से पूरी तरह सहज महसूस कर रहे हैं।



















