रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा की बर्फी ने 35 करोड़ के बजट में कैसे कमाए थे 175 करोड़ रुपयेरणबीर कपूर की रामायण के पहले ट्रैक में पारंपरिक भजनों के सुर, गीतकार कुमार विश्वास ने समझाया संगीत का गणितड्राइविंग लाइसेंस धारक 25 सितंबर तक जोड़ें मोबाइल नंबर, सेवाएं रुकने और निलंबन से बचने का आसान ऑनलाइन तरीकागणेश आचार्य का नया सिनेमाई दांव, बड़े पर्दे पर आएगी 'गणेश डस्ट टू स्टारडस्ट'जया बच्चन को समय पर तैयार करने के लिए अमिताभ बच्चन अपनाते हैं अनोखी तरकीब, क्विज शो में साझा किया वैवाहिक अनुभवमारुति सुजुकी ने जापान भेजा 1 लाखवां मेड-इन-इंडिया वाहन, निर्यात में बना नया रिकॉर्डबॉक्स ऑफिस पर गांधी जयंती का बड़ा धमाका करने की तैयारी में अजय देवगन, पहले दिन 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू सकती है दृश्यम 3शोर से चाहिए पूरी राहत तो ये हैं सबसे दमदार वायरलेस ईयरबड्स, हर बजट और फोन के लिए बेहतरीन विकल्पचार शादियों से चर्चा में रहे बॉलीवुड के ये तीन दिग्गज कलाकारवाइब रिव्यू (2026): कुणाल खेमू और प्रीति जिंटा की स्पाई कॉमेडी में हंसी का तड़का
भारतीय टीम में बदलाव की जिद और बोर्ड का दबाव, क्यों मुश्किल बनी मुख्य चयनकर्ता की राहक्रिकेट
19 सित॰ 2026, 9:18 pm (18 मिनट पहले)· 0

भारतीय टीम में बदलाव की जिद और बोर्ड का दबाव, क्यों मुश्किल बनी मुख्य चयनकर्ता की राह

अजीत अगरकर का भविष्य के लिए तैयार किया गया खाका दिग्गज खिलाड़ियों के कद और प्रशासनिक फैसलों के बीच उलझकर रह गया। रोहित शर्मा के विकल्प की तलाश और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी से जुड़ी खींचतान ने इस विदाई की भूमिका तैयार की।

देश के शीर्ष क्रिकेट ढांचे में टीम चयन का जिम्मा संभालना हमेशा से तलवार की धार पर चलने जैसा रहा है। जब भी कोई चयनकर्ता आने वाले कल को संवारने के लिए कड़े कदम उठाने की कोशिश करता है, उसका सामना स्थापित सितारों के रसूख और बोर्ड के पेचीदा समीकरणों से होना लगभग तय माना जाता है। पूर्व तेज गेंदबाज अजीत अगरकर के कार्यकाल का घटनाक्रम भी इसी खींचतान की एक बानगी बनकर उभरा, जहां योजनाएं प्रशासनिक हस्तक्षेप और वरिष्ठ खिलाड़ियों की मौजूदगी के आगे बेअसर साबित हुईं। इस पूरे विवाद ने चयन समिति की स्वायत्तता और फैसलों के अमल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

2027 के विश्व कप का लक्ष्य और नए चेहरे को मौका देने की सोच

इस पूरे मामले का केंद्र 2027 में होने वाले पचास ओवरों के वैश्विक टूर्नामेंट की तैयारी से जुड़ा था। चयन समिति का नेतृत्व कर रहे अगरकर का आकलन था कि अगले वनडे विश्व कप तक नियमित कप्तान रोहित शर्मा की उम्र चालीस साल के करीब पहुंच जाएगी। चयन प्रमुख का मानना था कि इतने लंबे सफर के लिए सिर्फ एक वरिष्ठ खिलाड़ी पर पूरी तरह निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए वे ओपनिंग स्लॉट में एक नई ऊर्जा भरना चाहते थे।

ये भी पढ़ें

उनकी नजर में युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल इस स्थान के सबसे मुफीद दावेदार थे। योजना यह बनाई गई थी कि बड़े मंच पर उतरने से पहले जायसवाल को वनडे प्रारूप में खुद को पूरी तरह ढालने के लिए कम से कम 20 मुकाबलों में लगातार आजमाया जाए, ताकि वे शीर्ष क्रम में अपनी जगह पक्की कर सकें। इसके लिए जरूरी था कि वरिष्ठ खिलाड़ियों के कार्यभार को सीमित किया जाए और युवाओं को ज्यादा अवसर दिए जाएं।

संदेश पहुंचाने का जिम्मा और बदले में सख्त प्रतिरोध

इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला शुरू होने से पहले ही चयनकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके थे कि अब बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। इस रणनीति को लेकर टीम प्रबंधन के साथ-साथ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों का भी मौन समर्थन हासिल था। सबसे पेचीदा काम था इस फैसले की जानकारी सीधे रोहित को देना।

इस नाजुक काम के लिए दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को आगे किया गया, जिनके संबंध रोहित के साथ काफी पुराने और दोस्ताना रहे हैं। ओझा ने कप्तान के सामने चयन समिति का नजरिया रखा, लेकिन नतीजा उम्मीद के उलट रहा। रोहित अपने करियर और योगदान को देखते हुए इस तरह पीछे हटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। उन्होंने इस कदम को अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ माना और समिति के सामने झुकने के बजाय बोर्ड के एक बेहद प्रभावशाली प्रशासक से सीधे संवाद साधकर हस्तक्षेप की मांग कर दी।

प्रशासनिक बयानबाजी और अधिकारों पर सीधी चोट

दोनों पक्षों के बीच जारी खींचतान तब खुलकर सामने आ गई जब लॉर्ड्स में खेले जाने वाले अंतिम वनडे मुकाबले से ठीक पहले बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने सार्वजनिक टिप्पणी कर दी। सैकिया का यह रुख चयनकर्ताओं की स्वायत्तता पर सीधा प्रहार माना गया। उन्होंने मीडिया में चल रही उन तमाम बातों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि लॉर्ड्स का मैच रोहित के लिए विदाई जैसा हो सकता है।

सैकिया ने साफ शब्दों में कहा कि रोहित को हटाने पर कोई विचार नहीं हुआ है और वे जब तक टीम की योजनाओं में शामिल हैं, भारत के लिए वनडे खेलना जारी रखेंगे। इस बयान ने अगरकर की स्थिति को पूरी तरह कमजोर कर दिया, क्योंकि चयन समिति के अधिकारों को सार्वजनिक तौर पर दरकिनार कर दिया गया था।

लॉर्ड्स में कप्तानी पारी और चयन समिति की बेबसी

बोर्ड सचिव के बयान के बाद लॉर्ड्स के मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने चयनकर्ताओं की स्थिति को और असहज बना दिया। भारतीय टीम को उस मैच में शिकस्त जरूर झेलनी पड़ी, लेकिन रोहित ने एक दर्शनीय शतकीय पारी खेलकर आलोचकों को करारा जवाब दिया। इस पारी ने यह साबित कर दिया कि वे क्रीज पर अभी भी पूरी तरह सक्षम हैं।

मैदान पर बने इस शतक और बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के रुख ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि किसी सुपरस्टार खिलाड़ी को उसकी मर्जी के बिना बाहर करने का अधिकार या ताकत मुख्य चयनकर्ता के पास नहीं है। अपने फैसलों के खारिज होने और बोर्ड के व्यवहार से आहत अगरकर के सामने अपनी भूमिका को लेकर कड़ा आत्ममंथन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और लक्ष्मण के साथ खींचतान

अगरकर की मुश्किलें सिर्फ सीनियर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं थीं। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ भी उनके नीतिगत मतभेद लगातार गहरा रहे थे। लक्ष्मण की सोच हमेशा से यह रही कि हर दौरे और टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध खिलाड़ियों की मजबूत टीम भेजी जाए। दूसरी ओर, अगरकर ने इस नीति पर सवाल उठाते हुए एशियाई खेलों जैसे आयोजनों में पहली पसंद की पूरी ताकतवर टीम भेजने के औचित्य पर असहमति जताई थी।

दोनों दिग्गजों के बीच दूसरा बड़ा विवाद शेड्यूलिंग को लेकर खड़ा हुआ। 'इंडिया ए' के मुकाबलों, घरेलू टूर्नामेंट ईरानी कप और राष्ट्रीय टीम के अंतरराष्ट्रीय दौरों के बीच तारीखों के टकराव ने तालमेल बिगाड़ दिया। इसके अलावा, केंद्रीय अनुबंध के तहत आने वाले अनफिट खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन और उनकी मैदान पर वापसी के समय को लेकर भी दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही थी। अगरकर ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के काम करने के तौर-तरीकों पर खुलकर सवाल उठाए, जिसने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास को और बढ़ा दिया।

सवाल-जवाब

अजीत अगरकर 2027 विश्व कप को लेकर क्या योजना बना रहे थे?
अगरकर का मानना था कि 2027 तक रोहित शर्मा 40 वर्ष के हो जाएंगे, इसलिए वे यशस्वी जायसवाल को कम से कम 20 वनडे मैच खिलाकर नियमित ओपनर के रूप में तैयार करना चाहते थे।
रोहित शर्मा को चयनकर्ताओं की योजना के बारे में किसने बताया था?
दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी क्योंकि उनके रोहित शर्मा के साथ काफी अच्छे संबंध हैं।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने क्या बयान जारी किया था?
सैकिया ने स्पष्ट किया कि रोहित के संन्यास या बाहर होने की बातें बेबुनियाद हैं और वे नियमित सदस्य के तौर पर टीम के लिए खेलते रहेंगे।
वीवीएस लक्ष्मण और अगरकर के बीच किन मुद्दों पर विवाद था?
दोनों के बीच एशियाई खेलों जैसी प्रतियोगिताओं में मजबूत टीम भेजने, इंडिया ए व घरेलू टूर्नामेंटों की शेड्यूलिंग और चोटिल खिलाड़ियों की वापसी की समय सीमा को लेकर गहरे मतभेद थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp