इंग्लैंड की धरती पर आयोजित टी20 विश्व कप के समापन के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नेतृत्व ढांचे में दूरगामी बदलावों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। पुरुष टीम में कोच और कप्तान के चयन पर जारी चर्चाओं के बीच, अब यह विचार तेजी से उभर रहा है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 को ध्यान में रखते हुए टी20 प्रारूप की कप्तानी स्मृति मंधाना को सौंप देनी चाहिए। हरमनप्रीत कौर पिछले एक दशक से भारतीय टीम की कप्तानी संभाल रही हैं, लेकिन टी20 विश्व कप के पिछले दो संस्करणों में टीम का प्रदर्शन प्रशंसकों और विशेषज्ञों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। यद्यपि वर्ष 2025 में हरमनप्रीत कौर के कुशल नेतृत्व में भारत ने 50 ओवर का विश्व कप जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी, परंतु टी20 प्रारूप में भारतीय टीम उस स्तर का निरंतर और उत्कृष्ट प्रदर्शन दोहराने में असफल रही है।
टी20 प्रारूप में नई सोच और 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक का विज़न
लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के आयोजन में अब केवल दो वर्ष का समय शेष रह गया है। खेल जगत के सबसे बड़े मंच पर क्रिकेट की वापसी को देखते हुए भारतीय टीम में नए विचारों, आधुनिक रणनीतियों और नई सोच को शामिल करना ही आगे बढ़ने का सबसे तार्किक और व्यावहारिक मार्ग दिखाई देता है। सबसे महत्वपूर्ण और यक्ष प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या हरमनप्रीत कौर टी20 क्रिकेट के कप्तान के तौर पर भारत को ओलंपिक में पदक दिलाने का विश्वास जगाती हैं? यही वह मूल प्रश्न है जिसका सामना चयनकर्ताओं और क्रिकेट समीक्षकों को बिना किसी हिचकिचाहट के करना होगा।
हाल ही में हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला गया टेस्ट मैच जीतकर एक बड़ी सफलता दर्ज की थी। लेकिन उस टेस्ट जीत के जश्न के बीच टी20 विश्व कप की असफलता पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया। घरेलू क्रिकेट प्रशंसकों और विश्लेषकों ने एक बार फिर अलग-अलग प्रारूपों के प्रदर्शन को आपस में मिलाकर देखने की गलती की। टेस्ट मैच में मिली जीत को टी20 प्रारूप की कमियों को ढकने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि तीनों प्रारूपों की गति, मांग और रणनीतिक जरूरतें पूरी तरह भिन्न होती हैं।
एशिया कप की जीत और आत्मसंतुष्टि के भ्रम का खतरा
दुबई में खेले जा रहे एशिया कप में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन के बाद यह खतरा मंडराने लगा है कि कहीं हम आत्मसंतुष्टि के भ्रम की स्थिति में प्रवेश न कर जाएं। एशिया कप का स्तर अपेक्षाकृत कमजोर और औसत टीमों से भरा हुआ है। इस प्रतियोगिता में कोई भी टीम भारतीय टीम के सामर्थ्य और कौशल के आसपास भी खड़ी नहीं होती है। इसलिए इस टूर्नामेंट में भारत की जीत को एक सामान्य प्रक्रिया माना जाना चाहिए। असल खबर तो तब बनती जब भारत एशिया कप में कोई मुकाबला हार जाता।
दुबई के मैदानों पर आसान टीमों के खिलाफ मिली जीत को भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वास्तविक क्षमता का मानक या पैमाना नहीं माना जा सकता। यदि चयनकर्ता और प्रशंसक एशिया कप की जीतों के आधार पर टीम के टी20 प्रदर्शन को आंकने लगेंगे, तो इससे वास्तविक कमियों को पहचानने में चूक हो जाएगी। आसान मुकाबलों की चमक में गंभीर रणनीतिक कमियों को छिपाने की यह प्रवृत्ति दीर्घकालिक लक्ष्यों, विशेषकर ओलंपिक स्वर्ण पदक के सपने को नुकसान पहुंचा सकती है।
स्मृति मंधाना के कप्तानी अनुभव और आरसीबी की सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड
स्मृति मंधाना ने एक कप्तान के रूप में अपनी योग्यताओं को बार-बार साबित किया है। महिला प्रीमियर लीग में आरसीबी की कप्तानी करते हुए उन्होंने जिस सूझबूझ और शांत नेतृत्व का परिचय दिया, उसका प्रमाण टीम द्वारा जीता गया खिताब है। आरसीबी के साथ उनकी यह सफलता दर्शाती है कि उनके पास दबाव के क्षणों में सही निर्णय लेने और टीम को खिताबी जीत तक पहुंचाने की पूरी क्षमता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जब-जब स्मृति मंधाना को जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया है। 50 ओवर के प्रारूप में कई ऐसे मौके आए हैं जब हरमनप्रीत कौर को किसी कारणवश मैदान से बाहर जाना पड़ा, और उन परिस्थितियों में स्मृति मंधाना ने बेहद परिपक्वता के साथ कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाई है। अब समय आ गया है कि स्मृति मंधाना को टी20 टीम की पूर्णकालिक कमान सौंपी जाए। यदि लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए एक मजबूत और खिताबी टीम तैयार करनी है, तो नए कप्तान को अपनी रणनीति लागू करने और खुद को इस भूमिका में ढालने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना आवश्यक है।
एशियाई खेल, चैंपियंस ट्रॉफी और चयनकर्ताओं के सामने दीर्घकालिक फैसले की चुनौती
दुबई में एशिया कप खत्म होने के ठीक 10 दिन बाद भारतीय टीम एशियाई खेलों में हिस्सा लेने के लिए जापान रवाना होगी। जापान के मैदानों पर भी भारत का सामना उन्हीं टीमों से होगा जिनके खिलाफ वे इस समय दुबई में खेल रहे हैं। एक बार फिर मुकाबले एकतरफा और आसान होने की संभावना है, और एक बार फिर एशियाई खेलों में मिलने वाले स्वर्ण पदक की चमक के पीछे टीम की वास्तविक टी20 कमजोरियों के छिप जाने का खतरा रहेगा।
आसान प्रतियोगिताओं में मिली जीतों से अपनी खामियों को ढकना भारत के लिए सही रणनीति नहीं हो सकती। भारतीय महिला टीम की असली और कड़ी परीक्षा चैंपियंस ट्रॉफी जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में होगी। यदि चयनकर्ता अभी कप्तानी में आवश्यक बदलाव नहीं करते हैं, तो चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान वही पुराने सवाल दोबारा सामने खड़े होंगे। तब तक बहुमूल्य समय हाथ से निकल चुका होगा और लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारियों के लिए आवश्यक समय की भरपाई करना कठिन हो जाएगा।
बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर का महत्व और निर्णायक रणनीतिक कदम
यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाना चाहिए कि एक बल्लेबाज के रूप में हरमनप्रीत कौर आज भी भारतीय टीम की रीढ़ की हड्डी हैं। टी20 विश्व कप में लॉर्ड्स के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया उनका आखिरी मुकाबला इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि उनकी बल्लेबाजी का कोई विकल्प मौजूद नहीं है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ आक्रामक और शानदार बल्लेबाजी करके दिखाया कि एक खिलाड़ी के रूप में वे टीम के लिए कितनी अपरिहार्य हैं। भारतीय मध्यक्रम में उनकी जगह लेने वाली कोई दूसरी खिलाड़ी फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आती।
लेकिन एक कप्तान के रूप में उनके हालिया टी20 रिकॉर्ड को देखते हुए बहुत कुछ सकारात्मक कहने की गुंजाइश नहीं बचती है। इसलिए मुख्य सवाल चयनकर्ताओं के निर्णय लेने की दृष्टि पर आकर टिकता है। क्या राष्ट्रीय चयनकर्ता एशिया कप और एशियाई खेलों जैसी औसत प्रतियोगिताओं के नतीजों से परे देखकर लंबे समय का फैसला लेने का साहस दिखाएंगे? क्या भारतीय क्रिकेट का अंतिम लक्ष्य ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना नहीं होना चाहिए? यदि हां, तो क्या हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में यह टी20 टीम ओलंपिक स्वर्ण के इस कठिन मिशन को पूरा करने का भरोसा दिलाती है? इन सवालों के उत्तर तलाशना ही भारतीय महिला क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।



















