पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट में नब्बे के दशक के स्कोर पर पहुंचने के बाद बल्लेबाजों का तरीका बेहद संभलकर खेलने का माना जाता रहा है। पुराने दौर में क्षेत्ररक्षक कप्तान भी इस बात से भलीभांति परिचित होते थे कि तिहाई अंक के करीब पहुंचकर बल्लेबाज जोखिम उठाने से कतराएगा और एक-एक रन जुटाने पर ज्यादा ध्यान देगा। नब्बे से सौ रन तक पहुंचने की इस मनोवैज्ञानिक बाधा को पार करने के लिए धैर्य को ही सबसे बड़ा हथियार माना जाता था। हालांकि, समय बीतने के साथ खेल के तौर-तरीकों में बदलाव आया और कई खिलाड़ियों ने नर्वस नाइंटीज की झिझक को हवाई शॉट खेलकर मिटाना शुरू कर दिया।
टेस्ट में छक्का मारकर शतक तक पहुंचने का अनोखा आंकड़ा
आक्रामक बल्लेबाजी और बड़े छक्कों की जब भी बात छिड़ती है, तो आम तौर पर प्रशंसकों के जेहन में विध्वंसक बल्लेबाजों के नाम कौंधते हैं। लेकिन लंबी प्रारूप वाली क्रिकेट में गेंद को सीमा रेखा के पार छह रन के लिए भेजकर सेंचुरी पूरी करने के मामले में सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे आगे आता है। सचिन तेंदुलकर ने अपने टेस्ट करियर के दौरान कुल छह बार छक्का जमाकर तिहरा अंक पार करने का करिश्मा कर दिखाया। एक तरफ जहां 100 अंतरराष्ट्रीय शतक, 200 टेस्ट मुकाबले और खेल के इतिहास में सर्वाधिक रनों के आंकड़े सचिन की पहचान हैं, वहीं यह विशिष्ट उपलब्धि उन बड़े हिटर बल्लेबाजों को भी अचंभे में डाल देती है जो आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं। रोचक बात यह भी है कि वनडे क्रिकेट में सचिन ने एक बार भी छक्के के साथ अपना शतक पूरा नहीं किया, जबकि टेस्ट प्रारूप में उन्होंने छह बार ऐसा किया।
नागपुर से लेकर केपटाउन तक सचिन के छह यादगार छक्के
सचिन तेंदुलकर ने छक्का मारकर टेस्ट शतक पूरा करने के सिलसिले की शुरुआत वर्ष 1994 में वेस्टइंडीज के खिलाफ नागपुर के मैदान पर की थी, जो उनके करियर का आठवां टेस्ट शतक था। इसके बाद इंग्लैंड के नॉटिंघम में खेला गया मुकाबला आया, जहां उन्होंने अपने नौवें टेस्ट शतक की मंजिल भी इसी अंदाज में छह रन जड़कर तय की। न्यूजीलैंड के वेलिंगटन में उनका 18वां टेस्ट शतक भी गेंद को सीधे सीमा पार भेजकर बना। वर्ष 2010 और 2011 के दौरान इस शैली की गूंज और अधिक सुनाई दी। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 49वां टेस्ट शतक, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऐतिहासिक 50वां शतक और उसी श्रृंखला में जमाया गया 51वां टेस्ट शतक, ये तीनों मील के पत्थर सचिन ने छक्के के साथ ही हासिल किए। क्रिकेट इतिहास में इस रिकॉर्ड के आसपास पहुंचने वाले एकमात्र बल्लेबाज केन बैरिंगटन रहे हैं, जिन्होंने कुल चार बार छक्का लगाकर अपने टेस्ट शतक पूरे किए।
वीरेंद्र सहवाग के नाम दर्ज तिहरे शतक की खास गाथा
भारतीय क्रिकेट में बेखौफ अंदाज के प्रतीक रहे वीरेंद्र सहवाग भी छक्के के सहारे शतक पूरा करने के कुल आंकड़ों में सचिन से पीछे रह गए, हालांकि उनके नाम एक ऐसा कारनामा दर्ज है जो कोई और नहीं कर सका। वीरेंद्र सहवाग टेस्ट क्रिकेट इतिहास के इकलौते बल्लेबाज हैं जिन्होंने छक्का जड़कर तिहरा शतक पूरा किया। वर्ष 2004 में पाकिस्तान के मुल्तान में खेले गए मुकाबले में उन्होंने छक्का लगाकर 300 रनों का आंकड़ा छुआ था। इससे पहले वर्ष 2003 में मेलबर्न के मैदान पर स्टुअर्ट मैक्गिल की गेंद पर छक्का लगाकर उन्होंने अपना शतक पूरा किया था। इसके अलावा 2010 में कानपुर के ग्रीनपार्क स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज रॉबिन पीटरसन की गेंद पर जोरदार छक्का जमाकर भी सहवाग ने अपना टेस्ट शतक पूरा किया था।



















