भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच अपनी आक्रामक गेंदबाजी और जुझारू अंदाज के लिए जाने जाने वाले मोहम्मद सिराज इन दिनों अपने बेहद खराब प्रदर्शन के दौर से गुजर रहे हैं। एक समय ऐसा था जब उनकी रफ्तार और स्विंग के आगे दुनिया के नामी-गिरामी बल्लेबाज क्रीज पर टिकने से डरते थे, लेकिन हालिया मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी की वह पुरानी धार पूरी तरह गायब नजर आ रही है। घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक उनकी फॉर्म चिंता का विषय बनती जा रही है।
चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में साउथ जोन की तरफ से मैदान पर उतरे मोहम्मद सिराज के लिए यह मैच किसी डरावने सपने जैसा साबित हुआ। ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने उनकी गेंदबाजी की जमकर खबर ली और मैदान के चारों तरफ रन बटोरे। इस मुकाबले में सिराज ने अपने गेंदबाजी स्पेल के दौरान ऐसा अनचाहा शतक लगाया जो कोई भी पेशेवर गेंदबाज कभी याद नहीं रखना चाहेगा।
मैच के दौरान ईस्ट जोन के खिलाड़ियों ने सिराज पर पूरी तरह से दबाव बनाए रखा। खासकर महज 15 साल की उम्र में अपनी बल्लेबाजी से सनसनी फैलाने वाले युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी बल्लेबाज ईशान किशन ने उनकी गेंदों की जमकर धुलाई की। सिराज ने इस पारी के दौरान करीब 5.6 की बेहद महंगी इकॉनमी रेट से रन दिए और सबसे हैरानी की बात यह रही कि वह एक भी सफलता हासिल करने में नाकामयाब रहे। किसी भी प्रथम श्रेणी लाल गेंद के मुकाबले में इस तरह से वनडे क्रिकेट की रफ्तार से रन लुटाना यह साबित करता है कि वह अपनी तय लाइन और लेंथ से पूरी तरह भटक चुके थे। उन्होंने कुल 21 ओवर गेंदबाजी की और बिना कोई विकेट झटके 118 रन खर्च कर दिए।
श्रीलंका के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज के दौरान भी मोहम्मद सिराज का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था और वहां भी उनकी गेंदबाजी काफी साधारण स्तर की रही थी। श्रीलंका की स्पिन की मददगार पिचों पर जहां तेज गेंदबाजों को अपनी तरफ से अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत होती है, वहां सिराज पूरी तरह से बेअसर साबित हुए थे। उन्होंने उस दो मैचों की टेस्ट सीरीज में केवल 4 विकेट ही अपने नाम किए थे।
इन सबके बीच सबसे ज्यादा चिंताजनक पहलू उनकी गेंदबाजी की गति में आई भारी गिरावट रहा है। जो गेंदबाज अमूमन 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से लगातार गेंदबाजी करता था, वह श्रीलंका के दौर पर केवल 125 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास ही संघर्ष करता हुआ दिखाई दिया था। आधुनिक क्रिकेट के इस दौर में यदि देश का कोई प्रमुख तेज गेंदबाज इस तरह धीमी गति से गेंदबाजी करे, तो विपक्षी बल्लेबाजों के लिए उसका सामना करना बेहद आसान हो जाता है।
मोहम्मद सिराज के इस लगातार गिरते प्रदर्शन और खराब फॉर्म के पीछे कई तरह के कारण साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। आईपीएल जैसे व्यस्त टूर्नामेंट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में लगातार खेलने की वजह से उनके शरीर पर थकान साफ तौर पर हावी नजर आ रही है। गेंदबाजी की रफ्तार में आई भारी गिरावट को इसी शारीरिक थकान और वर्कलोड का सीधा परिणाम माना जा रहा है।
भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने भी कुछ समय पहले इस बात का स्पष्ट संकेत दिया था कि मोहम्मद सिराज नई गेंद के साथ तो काफी असरदार साबित होते हैं, लेकिन जब गेंद पुरानी हो जाती है तो वह उतनी प्रभावी गेंदबाजी नहीं कर पाते हैं। जब गेंद पुरानी होकर अपनी चमक खो देती है, तो सिराज अपनी लाइन और लेंथ पर से नियंत्रण खो बैठते हैं। विकेट हासिल करने की अत्यधिक चाहत में वह अक्सर बहुत आगे यानी फुल-लेंथ या स्लॉट में गेंदें फेंक बैठते हैं, जिसका फायदा उठाकर बल्लेबाज आसानी से बड़े शॉट लगा देते हैं।
आगामी न्यूजीलैंड दौरों को ध्यान में रखते हुए मोहम्मद सिराज का दोबारा अपनी पुरानी फॉर्म में वापस लौटना भारतीय टीम के लिए बेहद जरूरी है। खासकर ऐसी स्थिति में जब चयनकर्ताओं को जसप्रीत बुमराह के कार्यभार यानी वर्कलोड को भी बहुत सावधानी से प्रबंधित करना होता है। राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सिराज को अपनी गति पर विशेष रूप से काम करना होगा। इसके अलावा उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी में जाकर अपनी फिटनेस और गेंदबाजी से जुड़ी कमियों को दूर करना होगा। देश भर के क्रिकेट प्रेमियों को पूरी उम्मीद है कि अपनी रफ्तार और आक्रामकता के लिए पहचाने जाने वाला यह गेंदबाज जल्द ही अपनी पुरानी लय हासिल करके मैदान पर जोरदार वापसी करेगा।



















