वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जहां अमेरिकी डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी एशियाई मुद्राओं और परिसंपत्तियों पर भारी दबाव बना रही है। इस पूरे परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए बीएनवाई के जियोफ यू ने स्पष्ट किया है कि कई एशियाई देश इस समय चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थितियों का सामना कर रहे हैं। हालांकि चीनी युआन ने अपेक्षाकृत रूप से अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है, लेकिन इसके बावजूद इस पर आधिकारिक रूप से कड़ी नजर रखी जा रही है, क्योंकि अधिकारी इसके उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क हैं। इसके विपरीत भारतीय रुपया, फिलीपीनी पेसो, थाई baht और दक्षिण कोरियाई वॉन जैसी मुद्राएं काफी कमजोर या दबाव की स्थिति में नजर आ रही हैं, जो आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
चीनी युआन का लचीलापन और केंद्रीय बैंकों की सीमाएं
बाजार की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में विभिन्न मुद्राओं के बीच भिन्नता एक मुख्य विषय बनी हुई है। हालांकि हालिया उतार-चढ़ाव अब अपनी चरम सीमाओं को छू रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों की सीमाएं भी परखने को मिल रही हैं। जियोफ यू का यह भी कहना है कि चीनी युआन इस क्षेत्र की सबसे लचीली मुद्राओं में से एक के रूप में खड़ा है, लेकिन इसकी मजबूती अब अधिक आधिकारिक ध्यान आकर्षित कर रही है। दैनिक अमेरिकी डॉलर और चीनी युआन के फिक्सिंग में काउंटर-साइक्लिकल फैक्टर का दायरा चौड़ा होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किस तरह से नियामक इस मुद्रा की चाल पर पैनी नजर रख रहे हैं।
हेजिंग रणनीतियां और बाजार के रुझान
मौजूदा बाजार माहौल में युआन को लेकर रणनीतिक दृष्टिकोण पर बात करते हुए यह सामने आया है कि हालिया तेजी के पीछे बिना सोचे-समझे भागे बिना युआन हेज को बढ़ाने की सलाह पर काम जारी है। जैसे-जैसे चीनी युआन में तेजी की गति धीमी पड़ रही है, वैसे-वैसे आईफ्लो स्कोर वाले होल्डिंग्स और अधिक अंडरहेल्ड क्षेत्र में चले गए हैं, जिसका असर निवेशकों की रणनीतियों पर साफ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा वैश्विक पटल पर अन्य मुद्रा जोड़ियों की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी एक बार फिर से अपनी बढ़त को बनाए रखने में कामयाब रही है। सोमवार को यह जोड़ी 0.7220 से 0.7230 के दायरे तक पहुंच गई और चार महीने के नए उच्च स्तर को छू लिया, जिसके पीछे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में मंदी का रुख और मध्य पूर्व में जारी तनाव बताया जा रहा है।
येन, सोने और ऊर्जा बाजार की स्थिति
दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में लगातार कमजोरी देखी जा रही है और यह एशियाई बाजारों में कारोबार खुलने से पहले ही 154.00 के आसपास सात महीने के निचले स्तर के करीब बना हुआ है। येन में आई इस भारी गिरावट की मुख्य वजहें जापानी केंद्रीय बैंक द्वारा अपनी अगली बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदें और स्वदेश पूंजी वापसी से जुड़ी अटकलें हैं। इसके साथ ही पीली धातु यानी सोने की बात करें तो शुक्रवार को हुए नुकसान से उबरने की कोशिश करते हुए सोने ने सोमवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,400 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को फिर से हासिल कर लिया। हालांकि तेल बाजार भले ही कुछ महीनों पहले की तुलना में शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल बाजार पूरी तरह से एक अलग कहानी बयां कर रहा है। हाल ही में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई के बीच का प्रीमियम, पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और इंट्राडे रिकॉर्ड बनाते हुए यह 102.00 डॉलर से थोड़ा ही ऊपर पहुंच गया।


















