साल 2005, जगह थी बेंगलोर का एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, और मैदान पर चल रहा था भारत और पाकिस्तान के बीच हाई वोल्टेज टेस्ट सीरीज का आखिरी और सबसे अहम मुकाबला. माहौल में इतना तनाव था कि हवा भी भारी महसूस हो रही थी. लेकिन इसी दबाव के बीच क्रीज पर एक भारतीय बल्लेबाज ऐसा भी था, जो पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर धुनाई करने के साथ साथ खुद भी अपनी ही धुन में गुनगुना रहा था. यह और कोई नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे निडर ओपनर वीरेंद्र सहवाग थे.
वीरू का खेलने का तरीका हमेशा से बाकी बल्लेबाजों से जुदा रहा है. मैदान पर जब वे बल्लेबाजी करते थे, तो उनकी फुटवर्क से भी ज्यादा चर्चा उनके अलग तरह के दिमाग की होती थी. हाल ही में एक चैट शो में सहवाग ने अपनी इस अनोखी आदत को लेकर कुछ ऐसे किस्से सुनाए, जिन्होंने क्रिकेट फैंस को एक बार फिर हंसने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने बताया कि मैदान पर वे सिर्फ अपनी धुआंधार बल्लेबाजी से नहीं, बल्कि अपनी गायकी से भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों का जमकर मनोरंजन किया करते थे.
जब यासिर हमीद ने पूछ ही लिया राज
सहवाग ने उस ऐतिहासिक मैच से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि आम तौर पर विरोधी टीम को इस बात की भनक तक नहीं होती थी कि वे बैटिंग करते समय गुनगुनाते हैं. लेकिन इसी भारत पाकिस्तान सीरीज के दौरान यह राज खुल गया. सहवाग के मुताबिक, वे बेंगलोर टेस्ट में करीब 150 रन बनाकर खेल रहे थे, तभी शॉर्ट लेग पर फील्डिंग कर रहे पाकिस्तानी खिलाड़ी यासिर हमीद उनके पास आए. यासिर ने हैरानी से पूछा, वीरू भाई क्या आप सच में बल्लेबाजी करते हुए गाने गाते हो. सहवाग मुस्कुराए और तुरंत हामी भर दी. इसके बाद यासिर ने बिना देर किए उनसे किशोर कुमार का एक गाना सुनाने की फरमाइश कर डाली.
सहवाग हंसते हुए बताते हैं कि उन्होंने यासिर की यह फरमाइश भी पूरी कर दी. इस तरह उन्होंने बाउंड्री लगाकर पाकिस्तानी टीम को परेशान करने के साथ साथ बीच बीच में सुर छेड़कर उनका भरपूर मनोरंजन भी किया. मैदान पर तनाव और गीत संगीत का यह मेल शायद ही किसी और बल्लेबाज के हिस्से आया हो.
हर मूड के लिए तैयार रहता था एक गाना
जब सहवाग से उनके पसंदीदा गानों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उनके पास हर स्थिति के लिए अलग अलग गाने मौजूद रहते थे. हालांकि एक गाना ऐसा था, जो उनका हमेशा से सबसे पसंदीदा रहा. यह गाना था किशोर कुमार का चला जाता हूं किसी की धुन में, धड़कते दिल के तराने लिए. वीरू के अनुसार, यह वह गाना था जिसे वे किसी भी मूड में गा सकते थे. चाहे उनकी फॉर्म अच्छी हो या खराब, यह गाना पल भर में उनका मूड ठीक कर देता था.
जब सहवाग अच्छे लय में होते थे और लगातार रन बना रहे होते थे, तब वे उस दौर के पेपी और ट्रेंडी गाने जैसे चिट्टियां कलाइयां भी गुनगुनाया करते थे. इसके अलावा खुद को शांत रखने और एकाग्रता बनाए रखने के लिए वे भगवान के भजन भी याद करते और उन्हें दोहराते रहते थे. यानी बल्लेबाजी के हर मोड़ पर उनके पास एक अलग सुर तैयार रहता था.
गुनगुनाते हुए भी गेंद पर बनी रहती थी नजर
क्रिकेट जानकार अक्सर कहते हैं कि जब शोएब अख्तर, मोहम्मद सामी या दानिश कनेरिया जैसे गेंदबाज 145 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंक रहे हों, तो बल्लेबाज का पूरा ध्यान सिर्फ गेंद पर केंद्रित होना चाहिए. लेकिन सहवाग का दिमाग बिल्कुल अलग ढंग से काम करता था. वे गाना गुनगुनाते गुनगुनाते ही गेंद की लेंथ भांप लेते थे और उसे सीमा रेखा के पार पहुंचा देते थे. सहवाग का मानना है कि गाना गाने से उनका ध्यान फालतू के दबाव से हट जाता था, जिससे वे गेंद को उसकी मेरिट पर खेल पाते थे. यही वजह थी कि तेज रफ्तार गेंदबाजी के सामने भी वे बेखौफ नजर आते थे.
ऐतिहासिक पारी के बावजूद हाथ लगी हार
सहवाग ने जिस बेंगलोर टेस्ट का जिक्र किया, उसमें उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजी की जमकर धुनाई की थी. उन्होंने महज 261 गेंदों का सामना करते हुए 201 रनों की दोहरी शतकीय पारी खेली थी. यह तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला था. सहवाग की इस मैराथन पारी के दम पर भारत ने मजबूत स्थिति बनाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन अफसोस कि वीरू की यह शानदार और संगीतमय पारी टीम इंडिया को जीत नहीं दिला पाई. पाकिस्तान ने मैच में जोरदार वापसी की और आखिर में भारत को 168 रनों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा.
भारत भले ही वह मैच हार गया हो, लेकिन सहवाग की बल्लेबाजी और मैदान के बीचोबीच पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ हुई इस गानों की जुगलबंदी ने क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार और खुशनुमा किस्सों में अपनी जगह बना ली. वीरू ने साबित कर दिया कि क्रिकेट भले ही दबाव और अनिश्चितताओं का खेल हो, लेकिन अगर दिल में धुन बजती रहे, तो मैदान पर खेल का लुत्फ उठाना कभी नहीं भूला जा सकता.













