गॉल टेस्ट के तीसरे दिन क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान उस समय हैरान करने वाले प्रदर्शन पर गया जब चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। एक तरफ जहां अपना दूसरा टेस्ट खेल रहे मानव सुथार और अनुभवी रवींद्र जडेजा ने बेहतरीन गेंदबाजी का नजारा पेश किया, वहीं कुलदीप अपनी लाइन और लेंथ तलाशने के लिए पूरी तरह जूझते दिखाई दिए। जिस पिच पर अन्य फिंगर स्पिनर्स को आसानी से टर्न मिल रहा था और वे बल्लेबाजों को चकमा दे रहे थे, उसी पिच पर कुलदीप की गेंदों पर खुलकर रन बने और वह इस पारी में सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए।
कुलदीप यादव की गेंदबाजी प्रतिभा को लेकर क्रिकेट जगत में कभी कोई दो राय नहीं रही है, लेकिन उनका यह सफर हमेशा से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उनके करियर की रफ्तार कई बार रुकी और फिर नए सिरे से शुरू हुई। क्या उन्हें वे तमाम मौके मिले जिनके वे असल हकदार थे? शायद इसका जवाब ना में ही होगा। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी। किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए यह जुझारू रवैया सबसे बड़ी ताकत होता है और कुलदीप ने इसे बार-बार साबित किया है, यही वजह है कि गॉल टेस्ट की दूसरी पारी में उनका मजबूत कमबैक करना बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।
गॉल की इस पिच को स्पिन गेंदबाजी के लिए पूरी तरह अनुकूल माना जा रहा था और यह तय लग रहा था कि कुलदीप भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की रीढ़ बनेंगे। कई जानकारों का यह भी मानना था कि वह इस दौरे पर सबसे भरोसेमंद हथियार साबित होंगे, लेकिन मैदान पर नतीजे इसके बिल्कुल उलट आए। उन्होंने कुल 14 ओवर गेंदबाजी की जिसमें 65 रन खर्च कर दिए और उनके खाते में केवल 1 सफलता आई, जबकि उनकी इकॉनमी 4.6 की रही। यदि भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में अपनी उम्मीदों को जिंदा रखना है, तो शुभमन गिल और उनकी पूरी टीम को यह सीरीज अपने नाम करनी होगी। ऐसे में कुलदीप को दूसरी पारी में अपनी जादुई गेंदबाजी का जलवा दिखाना ही होगा।
मैच के दौरान यह भी देखा गया कि टीम प्रबंधन पूरी तरह मुस्तैद था और स्पिन कोच साइराज बहुतुले मैदान पर लगातार कुलदीप यादव से बातचीत करते नजर आए। साल 2019 में पूर्व कोच रवि शास्त्री ने उन्हें टेस्ट फॉर्मेट में भारत का मुख्य स्पिनर करार दिया था, लेकिन उसके बाद का सफर उम्मीदों के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। कुलदीप को जरूरत से कहीं ज्यादा समय मैदान से बाहर बेंच पर बिताना पड़ा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वह इस कठिन दौर से पूरी तरह बाहर निकल पाएंगे और श्रीलंका की सरजमीं पर खुद को एक बार फिर नंबर एक स्पिनर के रूप में स्थापित कर सकेंगे? पहली पारी के आंकड़े फिलहाल इसकी गवाही नहीं देते, लेकिन अगर वह दूसरी पारी में चमकने में कामयाब होते हैं, तो यह सिर्फ उनके व्यक्तिगत करियर का ही नहीं बल्कि भारतीय टीम की इस सीरीज जीत का भी सबसे बड़ा आधार बनेगा।



















