अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पन्नों में कई ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं जो अपनी तरह के बिल्कुल अनोखे हैं। टेस्ट और एकदिवसीय फॉर्मेट में तकनीकी रूप से सबसे मजबूत बल्लेबाजों में गिने जाने वाले राहुल द्रविड़ के नाम भी एक ऐसा ही दिलचस्प वाकया दर्ज है। क्रिकेट के सबसे छोटे और फटाफट प्रारूप में उन्होंने भारत की राष्ट्रीय जर्सी केवल एक बार पहनी, लेकिन उसी एक मुकाबले के साथ उन्होंने ऐसा इतिहास रच दिया जो दुनिया में किसी अन्य खिलाड़ी के खाते में नहीं दिखता।
मैनचेस्टर का मैदान और डेब्यू के साथ संन्यास का फैसला
यह किस्सा साल 2011 के इंग्लैंड दौरे का है, जब मैनचेस्टर में दोनों टीमों के बीच एकमात्र टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला जाना था। भारतीय टीम प्रबंधन ने जब इस मुकाबले के लिए अंतिम एकादश में उनका नाम शामिल किया, तब मैदान पर कदम रखने से पहले ही द्रविड़ ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी थी। उन्होंने प्रबंधन को स्पष्ट बता दिया था कि वह अपने देश के लिए यह पहला और आखिरी टी20 मैच खेल रहे हैं। इस तरह किसी खिलाड़ी द्वारा अपने पदार्पण मुकाबले के दिन ही उसी फॉर्मेट को हमेशा के लिए अलविदा कह देने की यह दुनिया की इकलौती मिसाल बन गई।
तीसरे नंबर पर उतरे और जड़ दिए तीन छक्के
उस ऐतिहासिक शाम भारतीय पारी में द्रविड़ तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी करने उतरे। पारंपरिक और रक्षात्मक शैली के लिए पहचाने जाने वाले इस दिग्गज ने फटाफट क्रिकेट के मिजाज को बखूबी समझा और तेजी से रन बटोरे। उन्होंने महज 21 गेंदों का सामना करते हुए 3 शानदार छक्कों की बदौलत 31 रनों की बहुमूल्य पारी खेली। उनकी इस आक्रामक पारी का अंत रवि बोपारा की गेंद पर हुआ, जब इयोन मोर्गन ने उनका कैच लपक लिया।
मैच का रोमांच और दोनों पारियों का लेखा-जोखा
उस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम 19.4 ओवरों में 165 रन बनाकर ऑलआउट हो गई थी। भारत की ओर से सलामी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे सबसे सफल बल्लेबाज रहे थे, जिन्होंने 39 गेंदों पर 61 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी। 166 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान इंग्लैंड की टीम ने यह मुकाबला 3 गेंद शेष रहते 4 विकेट खोकर अपने नाम कर लिया था। इंग्लैंड की तरफ से इयोन मोर्गन ने 27 गेंदों में सबसे ज्यादा 49 रन बनाए, जबकि केविन पीटरसन ने 23 गेंदों में 33 रनों का योगदान दिया। उनके अलावा रवि बोपारा ने 31 और समित पटेल ने नाबाद 25 रन जोड़कर अपनी टीम को 6 विकेट से जीत दिला दी थी। भारत के गेंदबाजी आक्रमण में मुनाफ पटेल ने 2 सफलताएं हासिल की थीं, वहीं प्रवीण कुमार और विराट कोहली ने 1-1 विकेट चटकाया था।


















