राजस्थान के बहुचर्चित अनंता रिसॉर्ट विला खरीद विवाद में राज्य प्रशासन ने एक कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अलवर जिले के अजबगढ़ में स्थित रिसॉर्ट परियोजना को विकसित कर रही निजी कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को मिलने वाले सभी सरकारी आर्थिक लाभों और रियायतों के वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह प्रशासनिक रोक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्राथमिक जांच प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी, जिससे कंपनी को फिलहाल किसी भी प्रकार की राज्य स्तरीय सब्सिडी अथवा निवेश प्रोत्साहन का फायदा नहीं मिल सकेगा।
यह पूरा मामला अजबगढ़ में तैयार की गई एक भव्य रिसॉर्ट परियोजना से जुड़ा हुआ है। इस परियोजना के भीतर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल तथा उनके परिजनों के नाम पर कुल 20 विला खरीदे जाने की बात सामने आने के बाद भारी प्रशासनिक हलचल मच गई थी। शुरुआत में जहां जांच केवल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और वित्तीय स्रोतों के इर्द-गिर्द घूम रही थी, वहीं अब इस प्रकरण का दायरा बढ़कर उस विशेष आर्थिक पैकेज और प्रोत्साहनों तक पहुंच गया है जो पूर्व में कंपनी को दिए गए थे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संज्ञान में यह समूचा घटनाक्रम आने के तुरंत बाद उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त कार्यालय ने सक्रियता दिखाते हुए कंपनी के राजकीय परिलाभों के वितरण पर रोक लगाने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए।
गोयल फैशन्स को स्वीकृत हुआ था विशेष रियायती पैकेज
अजबगढ़ में स्थित रिसॉर्ट परियोजना के विकास के नाम पर गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए 27 मार्च 2026 को एक विशेष आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज स्वीकृत किया गया था। इस नीतिगत पैकेज के तहत निजी विकासकर्ता को राज्य स्तर पर कई तरह की भारी वित्तीय छूट और सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई थी। इस पैकेज में सबसे बड़ा आकर्षण राज्य करों में दी जाने वाली भारी सब्सिडी और बिजली शुल्क से जुड़ी व्यापक छूट थी।
स्वीकृत नियमों के अनुसार कंपनी को आगामी 10 वर्षों की लंबी अवधि तक राज्य कर में 75 प्रतिशत का सीधा अनुदान दिया जाना तय हुआ था। इसके साथ ही औद्योगिक बिजली शुल्क पर 100 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया था, जिसका सीधा अर्थ था कि रिसॉर्ट के संचालन में लगने वाले भारी बिजली खर्च के मोर्चे पर कंपनी को शून्य शुल्क की पूरी राहत मिल रही थी। इतना ही नहीं, परियोजना के लिए जमीन के दस्तावेजों पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी, कृषि अथवा अन्य भूमि के उपयोग परिवर्तन से जुड़ा भूमि रूपांतरण शुल्क और कर्मचारियों के वेतन मद में दिए जाने वाले सरकारी अनुदान जैसी कई अन्य रियायतें भी इस पैकेज का हिस्सा बनाई गई थीं। इन सब के जरिए कंपनी को भारी सरकारी निवेश लाभ उपलब्ध कराए गए थे।
एसीबी जांच पूरी होने तक सभी लाभों पर लगी पाबंदी
प्रशासन की ओर से जारी नए आदेशों के बाद अब इन सभी स्वीकृत लाभों और अनुदानों के वास्तविक वितरण पर पूरी तरह ताला लग गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जब तक अपनी प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष नहीं सौंप देती, तब तक निजी कंपनी इन सरकारी सुविधाओं अथवा राजकोषीय छूटों का दावा नहीं कर पाएगी। वर्तमान आदेश के तहत सीधे तौर पर लाभों के वितरण को रोका गया है, लेकिन इस कड़े कदम ने उस मूल विशेष आर्थिक पैकेज के औचित्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सचिवालय स्तर पर अब इस बात की भी तैयारी चल रही है कि क्या इस पूरे रियायती पैकेज को ही हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाए। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान आदेश तकनीकी रूप से केवल आर्थिक लाभों के वितरण पर रोक लगाने से संबंधित है और पूरे पैकेज को औपचारिक रूप से रद्द करने का अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के बाद ही लिया जाएगा। यानी वर्तमान में दो अलग-अलग स्तरों पर स्थिति बनी हुई है। पहला कदम यह उठाया गया है कि कंपनी को मिलने वाली सरकारी छूट, सब्सिडी और अनुदान पर तुरंत ताला लग गया है, जबकि दूसरा पहलू यह है कि पूरे आर्थिक पैकेज की मान्यता रद्द करने को लेकर आगामी प्रशासनिक फैसलों पर नजरें टिकी हुई हैं।
आईएएस अधिकारी पर पद के दुरुपयोग के आरोपों की पड़ताल
इस पूरे प्रकरण का केंद्रीय बिंदु वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल की भूमिका है, जो इस समय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच का सामना कर रहे हैं। अधिकारी पर अपने पद का दुरुपयोग करने के साथ-साथ अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर रिसॉर्ट परियोजना में विला की खरीद के गंभीर आरोप लगे हैं। एसीबी की टीम इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही है कि क्या इन 20 विला की खरीद में किसी तरह की अनुचित रियायत, पद का प्रभाव अथवा गैर-कानूनी लेनदेन शामिल था।
अलवर के अजबगढ़ क्षेत्र में अनंता रिसॉर्ट की स्थापना और उसमें एक ही परिवार से जुड़ी 20 अचल संपत्तियों की खरीद की बात उजागर होने के बाद से ही यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अब राज्य सरकार द्वारा निजी कंपनी गोयल फैशन्स को दिए गए विशेष आर्थिक पैकेज के वितरण को रोकने से इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जिसने निजी निवेश और नौकरशाही की साठगांठ के आरोपों की दिशा में जांच को तेज कर दिया है।
जांच के अंतिम परिणामों पर टिका कंपनी का भविष्य
राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसीबी अपनी प्रारंभिक जांच में क्या तथ्य सामने लाती है। जांच चलने तक गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को मिलने वाले 10 साल के 75 प्रतिशत राज्य कर अनुदान, बिजली शुल्क की शत-प्रतिशत माफी, स्टाम्प ड्यूटी छूट और कर्मचारियों के वेतन अनुदान पर रोक पूरी तरह प्रभावी रहेगी। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार यह तय करेगी कि कंपनी को दिया गया यह विशेष आर्थिक पैकेज बहाल होगा या फिर इसे हमेशा के लिए खारिज कर दिया जाएगा।


















