इंग्लैंड की घरेलू क्रिकेट सर्किट में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले बल्लेबाज बिली रूट ने 11 साल के अपने पेशेवर खेल सफर पर पूर्णविराम लगाने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने वाले दिग्गज बल्लेबाज जो रूट के भाई बिली रूट कभी राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके, लेकिन काउंटी क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में उन्होंने वर्षों तक नियमित रूप से शिरकत की। उनका आखिरी मुकाबला 15 सितंबर को हुआ, जहां उन्होंने ग्लेमोर्गन की तरफ से खेलते हुए सरे के खिलाफ 22 रन बनाए थे।
साल 2015 में हुई थी करियर की शुरुआत
घरेलू स्तर पर अपनी पहचान तलाश रहे बिली रूट ने साल 2015 में पहली बार फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा था। लाल गेंद के इस प्रारूप में अपने खेल की नींव रखने के बाद उन्होंने दो वर्षों तक अपनी तकनीक को मांझा। इसके बाद साल 2017 में उन्हें सफेद गेंद क्रिकेट में भी मौका मिला, जब उन्होंने लिस्ट-ए और टी20 प्रारूपों में एक साथ अपना डेब्यू किया। हालांकि, घरेलू टूर्नामेंटों में लगातार मौजूदगी और तीनों प्रारूपों में सक्रिय भागीदारी के बाद भी वे इंग्लैंड के राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की प्राथमिकताओं में अपनी जगह पुख्ता नहीं कर पाए, जिसके कारण उन्हें कभी अंतरराष्ट्रीय कैप हासिल नहीं हो सकी।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बिली रूट के आंकड़े
काउंटी क्रिकेट में बिली रूट का सबसे विस्तृत अनुभव फर्स्ट क्लास मैचों में रहा। अपने करियर के दौरान वे कुल 83 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में मैदान पर उतरे। इस पारंपरिक प्रारूप में उन्होंने 53.96 के स्ट्राइक रेट के साथ कुल 4107 रन जोड़े। उनके खाते में 17 अर्धशतक और 7 शतकीय पारियां दर्ज हुईं। इस प्रारूप में उनकी सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत पारी 229 रनों की रही, जो उनके धैर्य और क्रीज पर टिकने की क्षमता को दर्शाती है।
सीमित ओवरों का रिकॉर्ड और गेंदबाजी
सफेद गेंद क्रिकेट में बिली रूट ने 60 लिस्ट-ए और 50 टी20 मैच खेले। 50 ओवर के प्रारूप यानी लिस्ट-ए मुकाबलों में उन्होंने 89.66 के स्ट्राइक रेट से कुल 1,665 रन बनाए, जिसमें 9 अर्धशतक और 3 शतक शामिल रहे। दूसरी ओर, टी20 प्रारूप में उनका प्रदर्शन कुछ शांत रहा, जहां उन्होंने 50 मैचों में 634 रन बनाए और वे इस सबसे छोटे प्रारूप में एक भी शतक या अर्धशतक नहीं लगा पाए। शुद्ध रूप से बल्लेबाज होने के साथ-साथ वे जरूरत पड़ने पर टीम के लिए पार्ट-टाइम गेंदबाजी भी करते थे। अपने 11 साल के पूरे करियर में उन्होंने तीनों प्रारूपों को मिलाकर कुल 14 विकेट भी हासिल किए।



















