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परिसमापक को कंपनी संपत्ति खाली कराने के लिए अलग रेंट केस की जरूरत नहीं: अपीलीय न्यायाधिकरणव्यापार
23 सित॰ 2026, 7:24 pm (4 मिनट पहले)· 0

परिसमापक को कंपनी संपत्ति खाली कराने के लिए अलग रेंट केस की जरूरत नहीं: अपीलीय न्यायाधिकरण

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आईबीसी के तहत परिसमापक सीधे न्यायाधिकरण के माध्यम से संपत्ति खाली करा सकता है और किराया कानूनों की अलग प्रक्रिया जरूरी नहीं है।

कॉरपोरेट देनदार की अचल संपत्तियों का कब्जा हासिल करने के कानूनी अधिकार पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। अपीलीय अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी परिसमापक को दिवाला प्रक्रिया के दौरान परिसंपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए स्थानीय किराया नियंत्रण कानून के तहत अलग से बेदखली का मुकदमा चलाने की कोई बाध्यता नहीं है। इसके बजाय परिसमापक सीधे कंपनी विधि न्यायाधिकरण के निर्देशों के जरिए ऐसी अचल संपत्तियों का भौतिक कब्जा प्राप्त कर सकता है।

एनसीएलटी चंडीगढ़ बेंच का फैसला बरकरार, अपील खारिज

अपीलीय पीठ ने लुधियाना स्थित दो कारोबारी इकाइयों, ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स, की तरफ से दाखिल अपील को निरस्त कर दिया। इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की चंडीगढ़ पीठ ने दोनों फर्मों को निर्देश दिया था कि वे कराबारा तथा हुसैनपुरा स्थित दो वाणिज्यिक परिसरों को चौदह दिनों के भीतर खाली कर दें। दोनों कंपनियों ने इसी फैसले को अपीलीय मंच पर चुनौती दी थी, जहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

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रेंट एक्ट और 30 साल के पट्टे की दलील नामंजूर

अपीलकर्ता कंपनियों ने तर्क दिया था कि 30 साल के लीज डीड के आधार पर उन्हें वैध किरायेदारी अधिकार प्राप्त हैं। उनका कहना था कि यदि उन्हें बेदखल करना है, तो यह कदम केवल 1949 के ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्ट्रिक्शन एक्ट के तहत अधिकृत किराया नियंत्रक के समक्ष याचिका दायर करके ही उठाया जा सकता है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए रेखांकित किया कि जिस पट्टा विलेख का हवाला दिया जा रहा है, वह विधिवत पंजीकृत नहीं था। बिना पंजीकरण के ऐसे दस्तावेज को अदालत में कानूनी साक्ष्य के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती। इसके अतिरिक्त न्यायाधिकरण ने पाया कि अपील करने वाली इन दोनों कंपनियों के निदेशक कॉरपोरेट देनदार के निलंबित निदेशकों के नजदीकी रिश्तेदार हैं।

आईबीसी के प्रावधानों का अन्य कानूनों पर अधिभावी प्रभाव

न्यायाधिकरण ने इस बात पर जोर दिया कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 35 परिसमापक पर यह अनिवार्य वैधानिक कर्तव्य डालती है कि वह संबंधित कंपनी की हर संपत्ति को अपने अधिकार में ले। इसके साथ ही आईबीसी की धारा 238 संहिता के प्रावधानों को अन्य परस्पर विरोधी कानूनों पर प्राथमिकता प्रदान करती है। इसी कानूनी प्राथमिकता के चलते किराया कानूनों के सामान्य प्रावधान इस प्रक्रिया में आड़े नहीं आ सकते।

वीनस गारमेंट्स के परिसमापन से जुड़ा विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद मूल रूप से वीनस गारमेंट्स (इंडिया) की परिसमापन प्रक्रिया से संबंधित है। वीनस गारमेंट्स (इंडिया) को सबसे पहले एनसीएलटी चंडीगढ़ बेंच ने कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में भेजा था। बाद में समाधान योजना सफल न होने पर 22 जुलाई, 2025 को कंपनी के औपचारिक परिसमापन का न्यायिक आदेश पारित किया गया था, जिसके बाद संपत्तियों की वसूली का काम परिसमापक को सौंपा गया था।

सवाल-जवाब

एनसीएलएटी ने परिसमापक के अधिकारों को लेकर क्या फैसला सुनाया है?
अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि परिसमापक को कंपनी की संपत्ति खाली कराने के लिए अलग रेंट एक्ट कार्यवाही की जरूरत नहीं है और वह सीधे एनसीएलटी के जरिए कब्जा ले सकता है।
किन कंपनियों की अपील को न्यायाधिकरण ने खारिज कर दिया?
अपीलीय न्यायाधिकरण ने लुधियाना स्थित ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स की अपीलों को खारिज कर दिया।
किन स्थानों पर स्थित संपत्तियों को खाली कराने का आदेश दिया गया था?
एनसीएलटी ने कराबारा और हुसैनपुरा स्थित दो कमर्शियल प्रॉपर्टी को दो सप्ताह के भीतर खाली करने का निर्देश दिया था।
अपीलकर्ता कंपनियों की लीज डीड की दलील अदालत ने क्यों खारिज की?
अदालत ने दलील खारिज कर दी क्योंकि 30 साल की संबंधित लीज डीड रजिस्टर्ड नहीं थी, इसलिए उसे कानूनी साक्ष्य नहीं माना जा सकता था।
यह मामला किस मूल कंपनी के परिसमापन से जुड़ा हुआ है?
यह पूरा मामला वीनस गारमेंट्स (इंडिया) की परिसमापन प्रक्रिया से संबंधित है, जिसे 22 जुलाई, 2025 को परिसमापन में भेजा गया था।
आईबीसी की धारा 238 का इस मामले में क्या महत्व है?
धारा 238 दिवाला संहिता के प्रावधानों को अन्य सभी परस्पर विरोधी कानूनों और किराया नियमों पर अधिभावी प्रभाव प्रदान करती है।
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