अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भारी दबाव देखने को मिला। संयुक्त राज्य अमेरिका के निजी क्षेत्र के मजबूत कारोबारी आंकड़ों और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में नरमी के मिले-जुले संकेतों के चलते मुद्रा जोड़ी में तेज बिकवाली हावी रही। कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.07% फिसलकर 0.7040 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे पहले एशियाई कारोबारी सत्र में यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा था, लेकिन अमेरिकी सत्र तक आते-आते गिरावट और गहरी हो गई। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी अर्थव्यवस्था का लगातार मजबूत प्रदर्शन है, जिसने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दे दी है।
ऑस्ट्रेलियाई पीएमआई आंकड़ों में सुस्ती के संकेत
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कमजोरी की शुरुआत सितंबर महीने के शुरुआती एसएंडपी ग्लोबल परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई आंकड़ों के सामने आने के साथ हुई। जारी रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया का कंपोजिट पीएमआई अगस्त के 52.7 से गिरकर सितंबर में 50.8 पर आ गया। यह स्तर 50 अंक की उस महत्वपूर्ण सीमा रेखा से मामूली रूप से ऊपर है, जो किसी अर्थव्यवस्था में विस्तार और संकुचन के बीच का अंतर तय करती है।
आंकड़ों के भीतर विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन की स्थिति सामने आई, जबकि सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में भी लगातार दूसरे महीने सुस्ती दर्ज की गई। विनिर्माण में आई यह गिरावट और सेवा क्षेत्र की धीमी रफ्तार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को धीमा कर रही है। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक से अगले सप्ताह अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने बाजार में भविष्य की आक्रामक सख्ती पर संशय पैदा कर दिया है।
अमेरिकी निजी क्षेत्र में जोरदार विस्तार से ग्रीनबैक को मजबूती
ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर बिकवाली का दबाव तब और तेज हो गया जब संयुक्त राज्य अमेरिका के नए आर्थिक आंकड़े सामने आए। अमेरिका का एसएंडपी ग्लोबल कंपोजिट पीएमआई अगस्त के 56 से बढ़कर सितंबर में 58.4 पर पहुंच गया। यह आंकड़ा अमेरिकी निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों में एक उल्लेखनीय और तीव्र विस्तार की पुष्टि करता है।
इस आर्थिक उछाल ने अमेरिकी डॉलर को नई ताकत दी। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की चाल मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई 0.53% की बढ़त दर्ज करते हुए 101.05 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसका दो महीने का नया उच्चतम स्तर है। मजबूत आंकड़ों से निवेशकों में यह विश्वास मजबूत हुआ कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था उच्च ब्याज दरों के दबाव के बावजूद लचीली बनी हुई है।
फेडरल रिजर्व की नीतिगत दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी
सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बाजार प्रतिभागी अब अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा एक और ब्याज दर वृद्धि की 68% संभावना देख रहे हैं। यह आंकड़ा केवल एक दिन पहले दर्ज की गई 55% संभावना से काफी अधिक है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी मजबूती बरकरार है, जहां दस वर्षीय बेंचमार्क यील्ड 5.06% के आसपास मंडरा रही है। इस ऊंचे स्तर पर टिकी यील्ड ने अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के सामने डॉलर और अधिक आकर्षक हो गया।
तकनीकी स्तर और समर्थन-प्रतिरोध के दायरे
मुद्रा जोड़ी के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो गिरावट की स्थिति में 0.7020 के आसपास तात्कालिक क्षैतिज समर्थन रेखा मौजूद है। यदि बिकवाली का दबाव बना रहता है और यह स्तर टूटता है, तो अगला निचला स्तर 0.6965 पर देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी तरफ बढ़त की स्थिति में शुरुआती प्रतिरोध 0.7075 के स्तर पर उभरेगा। इसके ऊपर 0.7137 पर स्थित 200-पीरियड एसएमए और 0.7140 का क्षैतिज अवरोध मिलकर एक कड़ा प्रतिरोध क्षेत्र बनाते हैं। यदि यह दायरा पार होता है, तो 0.7157 पर 100-पीरियड एसएमए स्थित है, जिसे पार करने के बाद ही वर्तमान मंदी के रुख में स्थिरता या बदलाव देखने को मिल सकता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अन्य मुद्राओं की स्थिति
करेंसी बाजार में हलचल के बीच वैश्विक कूटनीतिक मोर्चे पर भी व्यापारियों की नजरें टिकी हुई हैं। बाजार गुरुवार को होने वाले महत्वपूर्ण ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक दिशा तय हो सकती है। वहीं दूसरी ओर वित्तीय बाजारों ने अमेरिका और ईरान के बीच संपन्न हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं के दौर पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों की बात करें तो यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में शॉर्ट-टर्म ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने के बावजूद जापानी येन दबाव में बना हुआ है। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के सामने येन कमजोर पड़ा है, हालांकि संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने इस जोड़ी में और अधिक बढ़त पर सीमित दायरा बनाया हुआ है। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की अपेक्षाओं के चलते बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति सोने पर भी दबाव रहा और एक्सएयू/यूएसडी में सुस्ती देखी गई।















