अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में राष्ट्रीय झंडों और सीमाओं की दीवारों को खेल भावना अक्सर बहुत पीछे छोड़ देती है। भारत और जापान के बीच खेले गए हालिया क्रिकेट मैच के मैदान पर जब खेल खत्म हुआ, तो कुछ ऐसा ही दिल छू लेने वाला नजारा देखने को मिला। मुकाबले के तुरंत बाद तीन अलग-अलग राहों पर चल रहे खिलाड़ी एक जगह जमा हुए। एक तरफ भारतीय टीम के अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन और 14 वर्षीय विस्फोटक युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी खड़े थे, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी जापानी जर्सी पहनकर मैदान पर उतरे अभिषेक आनंद मौजूद थे। विपक्षी टीमों के तौर पर मुकाबला करने के बावजूद मैच के बाद इन तीनों के चेहरे पर केवल अपनी साझा जड़ों यानी बिहार का गौरव साफ झलक रहा था।
साझा मिट्टी और जर्सी का उपहार
इस यादगार मुलाकात के सबसे खास पल में वैभव सूर्यवंशी ने खेल भावना का सम्मान करते हुए अपनी राष्ट्रीय जर्सी अभिषेक आनंद को भेंट कर दी। विरोधी टीम के खिलाड़ी से मिले इस विशेष उपहार ने इस क्षण को और भी अनूठा बना दिया। तीनों खिलाड़ियों के एक साथ आने से यह साफ हो गया कि पेशेवर खेल में भले ही खिलाड़ियों की जर्सी का रंग और उनकी राष्ट्रीय जिम्मेदारियां अलग हों, लेकिन अपनी मातृभूमि से जुड़ाव कभी कमजोर नहीं पड़ता। मैदान की प्रतिस्पर्धा खत्म होते ही तीनों ने एक दूसरे के साथ वक्त बिताया और इस सुखद अवसर को तस्वीरों में संजोया।
सोशल मीडिया पर भाईचारे का संदेश
अभिषेक आनंद ने सोशल मीडिया पर इस भावुक और प्रेरक पल की झलकियां साझा कीं। उन्होंने तस्वीरों के साथ लिखे अपने संदेश में कहा कि भले ही जर्सी अलग हों पर उनकी जड़ें एक हैं और बिहार के लड़के क्रिकेट के जरिए एकजुट हैं। अभिषेक द्वारा साझा किया गया यह संदेश खेल प्रेमियों के बीच तेजी से छा गया। खेल जगत के प्रशंसकों ने इस बात की भरपूर सराहना की कि कैसे हजारों किलोमीटर दूर अलग देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी अपनी साझी पहचान और पृष्ठभूमि के प्रति इतने गहरे आदर भाव से जुड़े हुए हैं।
जापान में ऑलराउंडर के रूप में अभिषेक आनंद का सफर
अभिषेक आनंद की कहानी किसी भी युवा खिलाड़ी को लीक से हटकर रास्ता चुनने की प्रेरणा देती है। भारत की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट प्रणाली में अपनी जगह तलाशने के बजाय उन्होंने एक गैर-पारंपरिक रास्ता अख्तियार किया और जापान का रुख किया। वहां उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी को निखारा और जापानी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में अपना स्थान पक्का किया। अभिषेक अब तक जापान के लिए 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं। इन 18 मुकाबलों में उन्होंने लगातार संतुलित प्रदर्शन करते हुए खुद को टीम के सबसे प्रमुख ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया है। विदेश में रहकर खेलने के बाद भी अपनी मूल पहचान को संजोए रखने का उनका जज्बा इस मैच के बाद पूरी तरह उजागर हुआ।
पटना से अंतरराष्ट्रीय पटल तक ईशान किशन की उड़ान
इस तिकड़ी के दूसरे सितारे ईशान किशन आधुनिक भारतीय क्रिकेट में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पटना की गलियों और मैदानों से निकलकर भारतीय राष्ट्रीय टीम के शीर्ष क्रम तक पहुंचने की उनकी दास्तान हर महत्वाकांक्षी खिलाड़ी को हौसला देती है। एक आक्रामक सलामी बल्लेबाज और चपल विकेटकीपर के रूप में अपनी धाक जमाने वाले ईशान के नाम वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने की बड़ी उपलब्धि दर्ज है। उन्होंने 210 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर विश्व क्रिकेट में अपनी आतिशी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया था। इसके अलावा वे 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की सेवा कर चुके हैं और आईपीएल में भी 100 से ज्यादा मुकाबले खेलते हुए सैकड़ों छक्के जड़ चुके हैं।
14 साल की उम्र में सनसनी बने वैभव सूर्यवंशी
तीनों में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी हैं, जिन्होंने समस्तीपुर से निकलकर बहुत छोटी उम्र में ही सनसनी फैला दी है। महज 14 वर्ष की आयु में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करके वे भारतीय क्रिकेट के सबसे युवा प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो चुके हैं। रणजी ट्रॉफी में अपने पदार्पण के बाद इस प्रतिभाशाली बाएं हाथ के बल्लेबाज ने भारत की अंडर-19 टीम की तरफ से खेलते हुए महज 58 गेंदों में तूफानी शतक जड़कर सभी को हैरान कर दिया था। प्रथम श्रेणी और युवा अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे तेज गति से शतक ठोकने वाले युवा बल्लेबाजों में उनका नाम दर्ज हो चुका है। इतनी अल्पायु में उनकी संयमित तकनीक और बेखौफ अंदाज यह प्रमाणित करता है कि बिहार की धरती आज भी बेजोड़ खेल प्रतिभाओं से समृद्ध है।



















