भारतीय खेल जगत में उस समय कानूनी हलचल तेज हो गई जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने एक फिल्म की रिलीज को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए फिल्म दूसरा की रिलीज पर फौरी रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अदालत के इस रुख के बाद तय कार्यक्रम के अनुसार यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने आने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती है क्योंकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि सौरव गांगुली की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर आगे की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रखी जाएगी जिससे इस कानूनी विवाद का भविष्य तय होगा।
सौरव गांगुली ने अपनी कानूनी याचिका में मुख्य रूप से इस बात पर आपत्ति जताई है कि फिल्म के भीतर उनके नेतृत्वकाल की ऐतिहासिक घटनाओं का संदर्भ दिया जा रहा है। उनकी दलील के मुताबिक साल 2002 की नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल मुकाबला और लॉर्ड्स के मैदान पर ऐतिहासिक बालकनी में शर्ट उतारकर जश्न मनाने जैसी खास यादों का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के प्रतिष्ठित पलों का व्यावसायिक इस्तेमाल उनके व्यक्तित्व और व्यावसायिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। पूर्व कप्तान का मानना है कि उनकी निजी छवि से जुड़े ऐसे यादगार लम्हों को किसी भी प्रोजेक्ट में बिना उनकी सहमति के भुनाया नहीं जाना चाहिए।
यह कानूनी टकराव मनोरंजन जगत और खेल हस्तियों के अधिकारों के बीच एक लंबी बहस को जन्म देता है। एक तरफ जहां फिल्म निर्माताओं के पास अपनी कहानी कहने की रचनात्मक स्वतंत्रता होती है, वहीं दूसरी तरफ देश के जाने-माने खिलाड़ियों और सेलिब्रिटीज के अपने व्यक्तित्व अधिकार सुरक्षित होते हैं। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह बना हुआ है कि क्या किसी मशहूर हस्ती के जीवन की खास घटनाओं को बायोपिक या अन्य फिल्मों में बिना पूछे दिखाया जा सकता है। हालिया दौर में भारतीय अदालतों के सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं जहां बड़े नाम अपनी पहचान, नाम और छवि के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
फिल्म की तय रिलीज तारीख पर कोई रोक न लगने के कारण दर्शक निर्धारित समय पर सिनेमाघरों में जाकर इस फिल्म का आनंद उठा सकेंगे। लेकिन अदालत की अगली कार्यवाही इस बात की दिशा तय करेगी कि क्या आने वाले समय में खेल जगत की हस्तियों के अधिकारों को लेकर कोई सख्त कानूनी दायरा तय होता है या नहीं। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर खेल प्रेमियों के साथ-साथ कानूनी जानकारों की भी पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि इसका फैसला भविष्य में मनोरंजन और खेल जगत के बीच के रिश्तों की रूपरेखा तय कर सकता है।



















