बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर की फिटनेस और खूबसूरती हमेशा चर्चा का विषय रहती है। 52 साल की उम्र में भी उनका एक्टिव रहना और चेहरे पर चमक बने रहना कई लोगों को हैरान करता है। लोग अक्सर जानना चाहते हैं कि आखिर इस उम्र में भी खुद को इतना ऊर्जावान कैसे रखा जाए। क्या इसके लिए किसी महंगी डाइट या जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत होती है? प्रसिद्ध सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने हाल ही में महिलाओं को सेहत से जुड़ी कुछ अहम बातें बताई हैं। उनके अनुसार, लंबे समय तक फिट रहने के लिए किसी भी तरह के महंगे सुपरफूड या मुश्किल नियमों की आवश्यकता नहीं होती है। असली बदलाव उन छोटी आदतों से आता है जिन्हें लंबे वक्त तक नियमित रूप से निभाया जाता है।
बढ़ती उम्र और सेहत का सफर
खासतौर पर महिलाओं के लिए 30 की उम्र पार करने के बाद अपनी सेहत पर गौर करना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि इस पड़ाव के बाद शरीर के भीतर कई प्रकार के शारीरिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। रुजुता दिवेकर ने 21 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में करिश्मा कपूर का उदाहरण देते हुए यह समझाया कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और एक सुव्यवस्थित जीवनशैली से बढ़ती उम्र में भी शरीर को मजबूत और सक्रिय रखा जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को तीन ऐसे विशेष सुझाव दिए हैं जिन्हें समय रहते अपनाकर फायदा उठाया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वे तीन बातें कौन सी हैं और उन्हें दैनिक जीवन में कैसे उतारा जा सकता है।
करिश्मा कपूर की फिटनेस का आधार
करिश्मा कपूर काफी लंबे अरसे से अपनी सेहत और फिटनेस का खास ख्याल रखती आ रही हैं। रुजुता दिवेकर का मानना है कि उनकी इस फिटनेस को रातों-रात मिली सफलता या किसी एक विशेष डाइट का नतीजा नहीं कहा जा सकता। इसके पीछे वर्षों से अपनाई गई अच्छी जीवनशैली का बड़ा हाथ है। जब कोई इंसान लगातार अपने खानपान, व्यायाम और पर्याप्त आराम का संतुलन बनाए रखता है, तो उसका सकारात्मक असर भविष्य में भी साफ दिखाई देता है।
विशेषज्ञ का यह भी कहना है कि फिटनेस का मतलब सिर्फ वजन कम करना या दुबला-पतला दिखना नहीं होता है। शरीर के भीतर ताकत का बरकरार रहना, दिनभर के काम बिना थके पूरे करना और खुद को तरोताजा महसूस करना भी उतना ही अहम है। इसलिए ऐसी जीवनशैली अपनाना ज्यादा समझदारी है जिसे कुछ हफ्तों के बजाय सालों-साल तक आसानी से जारी रखा जा सके।
पहली सलाह: वजन घटाने की बजाय शरीर को मजबूत बनाएं
रुजुता दिवेकर का पहला सुझाव शारीरिक गतिविधि यानी एक्सरसाइज से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, महिलाओं को सिर्फ वजन घटाने के एकमात्र लक्ष्य के साथ वर्कआउट नहीं करना चाहिए। नियमित व्यायाम का मुख्य उद्देश्य शरीर को अंदर से मजबूत बनाना और लंबी अवधि तक स्वस्थ रहना होना चाहिए। उन्होंने सलाह दी है कि हर हफ्ते कम से कम तीन घंटे शारीरिक गतिविधियों में जरूर बिताने चाहिए। इसका कतई यह अर्थ नहीं है कि रोज घंटों जिम में कसरत करना अनिवार्य है। अपनी पसंद और शारीरिक क्षमता के अनुसार तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, नृत्य करना, तैराकी करना या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी गतिविधियों को अपनाया जा सकता है।
नियमित रूप से कसरत करने से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है, शरीर का संतुलन बेहतर होता है और हड्डियों की सेहत भी अच्छी बनी रहती है। खासकर बढ़ती उम्र के दौर में महिलाओं के लिए अपनी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखना बहुत जरूरी होता है। हालांकि, किसी भी व्यायाम को शुरू करने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना आवश्यक है।
दूसरी सलाह: वजन कम करने के लिए भोजन छोड़ने से बचें
आजकल वजन घटाने के नाम पर कई तरह के खानपान के तरीके बहुत चलन में हैं। कोई चावल खाना पूरी तरह बंद कर देता है तो कोई अपनी डाइट से रोटियां हटा देता है। कुछ लोग रात का भोजन बिल्कुल नहीं करते हैं, जबकि कई लोग बिना किसी वैज्ञानिक जरूरत के कार्बोहाइड्रेट से दूरी बना लेते हैं। रुजुता दिवेकर इस तरह की कठोर डाइट को लेकर एहतियात बरतने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार, शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है। केवल वजन कम करने की चाहत में खाने की जरूरी चीजों को छोड़ देना लंबे समय के लिए सही फैसला साबित नहीं होता है।
मानव शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, सेहतमंद वसा, विटामिन और मिनरल्स जैसे सभी पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यदि दैनिक आहार में इनमें से किसी भी तत्व की कमी होने लगे, तो स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए रोजमर्रा के भोजन में विभिन्न प्रकार की पौष्टिक और घरेलू चीजों को शामिल करना ज्यादा फायदेमंद रहता है। दाल, चावल, रोटी, सब्जी, दही और अन्य साधारण घरेलू खाद्य पदार्थ एक संतुलित आहार का मुख्य हिस्सा बन सकते हैं। मुख्य बात यह है कि भोजन हमेशा शरीर की वास्तविक जरूरत के अनुसार होना चाहिए।
चावल से न करें परहेज
करिश्मा कपूर ने पहले रुजुता दिवेकर के साथ हुई एक बातचीत के दौरान अपने खानपान से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया था कि वजन घटाने की प्रक्रिया के दौरान भी वह रात के समय आराम से फिश करी और चावल खाती थीं। यह अनुभव उन लोगों के लिए एक सीख हो सकता है जो यह मानते हैं कि रात में चावल खाने से वजन निश्चित रूप से बढ़ जाता है। वास्तव में, किसी एक खाद्य पदार्थ को वजन बढ़ाने या घटाने के लिए अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। दिनभर में कुल कितना भोजन खाया जा रहा है, किस प्रकार की चीजें खाई जा रही हैं, शारीरिक सक्रियता का स्तर क्या है और शरीर की मांग कैसी है, इन सभी बातों का सम्मिलित प्रभाव शरीर पर पड़ता है।
विशेषज्ञ का जोर इसी बात पर है कि अपने मनपसंद भोजन को पूरी तरह त्यागने के बजाय उसमें संतुलन बनाना सीखना ज्यादा जरूरी है। यदि खानपान से जुड़े नियम बहुत ज्यादा कठिन होंगे, तो उन्हें लंबे समय तक निभाना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं हो पाएगा।
तीसरी सलाह: तीस की उम्र से ही सेहत को दें प्राथमिकता
रुजुता दिवेकर की तीसरी और अंतिम महत्वपूर्ण सलाह महिलाओं की उम्र और बदलती शारीरिक आवश्यकताओं से जुड़ी है। उनका कहना है कि महिलाओं को अपनी सेहत की देखभाल शुरू करने के लिए 40 या 50 साल की उम्र तक का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि महिलाएं 30 की उम्र से ही अपनी अच्छी आदतों पर ध्यान देना शुरू कर दें, तो उन्हें भविष्य में इसके बहुत लाभ मिल सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर के भीतर कई तरह के आंतरिक बदलाव आते हैं, जिनमें हॉर्मोन से जुड़े बदलाव भी शामिल हैं।


















