भारतीय क्रिकेट टीम के 15 अगस्त से श्रीलंका दौरे पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने के लिए गाले मैदान पर उतरने से पहले पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे ने बल्लेबाजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक सुझाव साझा किए हैं। 2017 में भारतीय टीम की 3-0 से ऐतिहासिक सीरीज जीत में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले अजिंक्य रहाणे का मानना है कि द्वीप राष्ट्र में सफलता हासिल करने का सबसे कारगर तरीका स्पिन गेंदबाजों के सामने आक्रामक रुख अपनाना है। ईटीपीएल के जरिए हुए एक खास साक्षात्कार में अपने अनुभवों को बयां करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मेजबान देश में मिलने वाली परिस्थितियों में अत्यधिक रक्षात्मक होना बल्लेबाजों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
श्रीलंकाई परिस्थितियों और स्पिनरों से निपटने की रणनीति
अजिंक्य रहाणे ने श्रीलंका के मैदानों के अपने व्यापक अनुभव को याद करते हुए बताया कि वहां मुकाबला शुरू होने पर पहले दिन की पिच आमतौर पर बल्लेबाजी के लिए काफी अनुकूल रहती है। हालांकि जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है, पिच की सतह बदलने लगती है और स्पिनरों को मदद मिलने लगती है। ऐसे में बल्लेबाज का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए कि वह विपक्षी गेंदबाजों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखे। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में अपनी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने वाले कई बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण स्पिनर मौजूद हैं। घरेलू मैदान पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम को मात देना हमेशा एक कठिन चुनौती होती है, इसलिए भारतीय बल्लेबाजों को बिना किसी ढिलाई के व्यक्तिगत रणनीति बनाकर मैदान पर उतरना होगा। अजिंक्य रहाणे के अनुसार टेस्ट फॉर्मेट में हर पल सक्रिय रहकर फैसले लेना ही सफलता की कुंजी है।
2017 के दौरे का शानदार प्रदर्शन और सीख
2017 के श्रीलंका दौरे पर अजिंक्य रहाणे का बल्ला जमकर बोला था। उस तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्होंने अपनी तकनीक और धैर्य का शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 से अधिक रन बनाए थे, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था। उस दौरे पर भारत ने श्रीलंका का 3-0 से सूपड़ा साफ किया था। अपने उसी प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि जब आप विपक्षी स्पिनरों को हावी होने का मौका नहीं देते, तो रन बनाने के अवसर स्वतः ही बनने लगते हैं। विपक्षी टीम के गेंदबाजी आक्रमण को दबाव में रखने से पूरी सीरीज का रुख बदला जा सकता है।
T20 के प्रभाव से बदलती टेस्ट क्रिकेट की शैली
आधुनिक क्रिकेट में आ रहे बदलावों पर बात करते हुए पूर्व भारतीय कप्तान ने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में टेस्ट क्रिकेट खेलने के तरीके में आमूलचूल परिवर्तन आया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण क्रिकेट जगत में T20 प्रारूप का तेजी से बढ़ता प्रसार और इसकी लोकप्रियता है। अब बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी टेस्ट टीम का हिस्सा बन रहे हैं जो T20 प्रारूप में अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं। इस वजह से पारंपरिक टेस्ट मैचों में भी स्कूप शॉट, लैप्स, स्विच हिट और रिवर्स स्वीप जैसे अपरंपरागत शॉट नियमित रूप से देखने को मिल रहे हैं। अजिंक्य रहाणे ने इस बदलाव को खेल के विकास के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत बताया।
गेंदबाजी में विविधता और प्रारूपों के बीच सामंजस्य
बातचीत के दौरान अजिंक्य रहाणे ने गेंदबाजों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों का भी विस्तार से विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि अब केवल बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि तेज गेंदबाज भी टेस्ट मैचों में काफी बदलाव ला रहे हैं। आधुनिक तेज गेंदबाज अब पारंपरिक स्विंग के अलावा सीम-अप डिलीवरी, वॉबल सीम और टेस्ट मैच की परिस्थितियों में भी लगातार यॉर्कर फेंकने का प्रयास कर रहे हैं। पहले के दौर में कुछ गिने-चुने गेंदबाजों को छोड़कर टेस्ट में इतनी नियमितता से यॉर्कर फेंकते हुए नहीं देखा जाता था, लेकिन अब हर प्रारूप में विविधता की मांग बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिके रहने के लिए खिलाड़ियों को लगातार अपने कौशल का विकास करना पड़ता है। इसके साथ ही टेस्ट से T20 या ODI प्रारूप में त्वरित बदलाव के लिए मानसिक अनुकूलनशीलता बेहद जरूरी हो गई है।



















