7 अगस्त 2026 को भारत भर में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर देश की समृद्ध बुनाई परंपरा, कारीगरों के कौशल और सांस्कृतिक विरासत को सम्मानित करने के लिए कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कपड़ा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस समारोह में हथकरघा क्षेत्र के संरक्षण और इसे बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
शशि थरूर ने साझा किए महत्वपूर्ण आंकड़े
सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर देश के हथकरघा उद्योग के आर्थिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि हथकरघा भारत का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है, जो लगभग 35 लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में काम करने वाले कुल कार्यबल में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास, प्रामाणिकता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते ध्यान के बीच उन्होंने इस पारंपरिक उद्योग को प्रोत्साहन देने की वकालत की।
राष्ट्रीय स्तर पर समारोह और सम्मान
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार 2025 प्रदान किए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुनकरों की कलात्मकता और कौशल की सराहना की। देश के विभिन्न राज्यों जैसे गुजरात, हैदराबाद के शिल्परामम और त्रिपुरा विश्वविद्यालय में भी हथकरघा सप्ताह और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए गए।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर आम नागरिकों और हस्तशिल्प प्रेमियों ने इस विषय पर विविध राय व्यक्त की। कई उपयोगकर्ताओं ने हथकरघा उत्पादों पर जीएसटी दरों को कम करने और कारीगरों के लिए सब्सिडी के बजाय सीधे विपणन और बिक्री प्रोत्साहन प्रदान करने का सुझाव दिया। वहीं कुछ लोगों ने पावर लूम के मुकाबले हथकरघा की उच्च लागत और बुनकरों को उचित मूल्य दिलाने की चुनौतियों पर चर्चा की।


























