अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का इतिहास जीत की गाथाओं और हार के सबक से भरा पड़ा है। जब भी किसी श्रृंखला का समापन होता है, तो ट्रॉफी उठाकर जश्न मनाते हुए कप्तानों की तस्वीरें हर प्रशंसक की यादों में बस जाती हैं। लेकिन इस खेल का एक दूसरा पहलू भी है जो आंकड़ों के पन्नों में दर्ज रहता है। टेस्ट क्रिकेट जैसे सबसे कठिन प्रारूप में कई दिग्गज कप्तानों ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीमों को नए शिखरों तक पहुँचाया, लेकिन अपने ही घरेलू मैदानों पर उन्हें किस्मत का साथ नहीं मिला। अपनी घरेलू परिस्थितियों में सबसे ज्यादा टेस्ट मैच हारने का अनचाहा विश्व रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ के नाम दर्ज है। उनके अलावा इस सूची में डेविड गावर, माइकल आथरटन, एलन बॉर्डर और स्टीफन फ्लेमिंग जैसे महान नाम भी शामिल हैं।
1. ग्रीम स्मिथ: घरेलू मैदानों पर 15 टेस्ट हारने वाले एकमात्र कप्तान
दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज कप्तान ग्रीम स्मिथ को उनके जुझारू नेतृत्व और आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी टीम को विदेश में कई यादगार जीत दिलाईं, लेकिन घरेलू मैदानों पर हार के आंकड़े बेहद निराशाजनक रहे। वर्ष 2004 से लेकर 2014 के दस वर्षों के लंबे अंतराल के दौरान, अपनी कप्तानी में घरेलू जमीन पर ग्रीम स्मिथ को 15 टेस्ट मैचों में पराजय का सामना करना पड़ा।
इन हारी हुई बाजियों में उनके अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर भी गहरा असर पड़ा। इन 15 मैचों की 29 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए ग्रीम स्मिथ कुल 642 रन ही बना सके। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत घटकर मात्र 23.77 का रह गया। हार के इन मुकाबलों में उनके बल्ले से एक भी शतकीय पारी नहीं निकली, यद्यपि उन्होंने 4 बार अर्धशतक जमाए। इसके अतिरिक्त, 3 अवसरों पर वे शून्य के व्यक्तिगत स्कोर पर ही पवेलियन लौट गए।
2. डेविड गावर: इंग्लैंड में कप्तानी करते हुए गंवाए 12 मुकाबले
इंग्लैंड के पूर्व कलात्मक बल्लेबाज डेविड गावर अपनी सहज और सुरीली शैली की बल्लेबाजी के लिए विश्व प्रसिद्ध थे। लाल गेंद के क्रिकेट में उनका एक विशेष प्रभाव था, लेकिन कप्तानी के दौर में घरेलू मैदानों पर आंकड़े उनके पक्ष में नहीं रहे। वर्ष 1982 से 1989 के बीच, अपनी घरेलू सरजमीं पर कप्तानी करते हुए गावर की टीम को 12 टेस्ट मैचों में हार झेलनी पड़ी।
घरेलू मैदान पर हारी गई इन 12 बाजियों की 24 पारियों में गावर ने 27.08 के बल्लेबाजी औसत से कुल 623 रन बनाए। अपनी टीम के लगातार हारने के बावजूद गावर के बल्ले से इन कठिन परिस्थितियों में 106 रनों की एक शानदार शतकीय पारी निकली थी। इसके अलावा उन्होंने इन मुकाबलों में 3 अर्धशतक भी जमाए, जबकि 1 बार वे बिना खाता खोले शून्य पर आउट हुए।
3. माइकल आथरटन: जुझारू खेल के बावजूद इंग्लैंड में मिलीं 11 हार
इंग्लैंड के एक और साहसी और धैर्यवान कप्तान माइकल आथरटन का नाम भी इस फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर आता है। आथरटन को क्रीज पर घंटों टिके रहने और तेज गेंदबाजों का डटकर मुकाबला करने की क्षमता के लिए जाना जाता था। वर्ष 1993 से 2001 के बीच, जब-जब माइकल आथरटन की कप्तानी में इंग्लैंड को अपने ही घर में 11 टेस्ट मैचों में शिकस्त मिली, तब-तब उन्होंने सलामी बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
इन 11 हारे हुए मुकाबलों की 22 पारियों में आथरटन के बल्ले से 26.90 की औसत के साथ कुल 592 रन निकले। इस दौरान उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 81 रन रहा। हारी हुई इन पारियों में वे कोई शतक तो नहीं लगा पाए, लेकिन उन्होंने 4 बार अर्धशतकीय पारियां खेलकर संघर्ष दिखाया। इसके अलावा वे 2 बार बिना कोई रन बनाए शून्य पर पवेलियन लौटे।
4. एलन बॉर्डर: ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का पुनरुत्थान और 11 घरेलू हार
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास के सबसे कठोर और आक्रामक कप्तानों में शुमार एलन बॉर्डर ने ऑस्ट्रेलियाई टीम के नए दौर की मजबूत नींव रखी थी। वे अपनी टीम को हर परिस्थिति से बाहर निकालने के लिए जाने जाते थे, लेकिन उनके कप्तानी करियर के शुरुआती दौर में घरेलू मैदानों पर निराशाजनक परिणाम मिले। वर्ष 1984 से 1994 के बीच, घरेलू जमीन पर अपनी कप्तानी में हारी गई 11 टेस्ट बाजियों में बॉर्डर की टीम को हार का सामना करना पड़ा।
इन 11 टेस्ट मैचों की 22 पारियों में एलन बॉर्डर के बल्ले से 25.66 की औसत से 539 रन निकले। भले ही उनका औसत मामूली नजर आता है, लेकिन उन्होंने टीम के बिखरने के बावजूद एक संघर्षपूर्ण पारी खेली और नाबाद 152 रनों का शानदार शतक जड़ा। इसके साथ ही उन्होंने हारी हुई बाजियों में 1 अर्धशतक भी बनाया, जबकि 3 मौकों पर वे शून्य के स्कोर पर आउट हुए।
5. स्टीफन फ्लेमिंग: न्यूजीलैंड में कप्तानी के दौरान गंवाए 11 टेस्ट
विश्व क्रिकेट के सबसे चतुर और रणनीतिक कप्तानों में गिने जाने वाले न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग इस सूची में पाँचवें स्थान पर हैं। फ्लेमिंग ने अपनी कप्तानी में न्यूजीलैंड को कई ऐतिहासिक क्षण दिए, लेकिन घरेलू परिस्थितियों में उन्हें भी 11 टेस्ट मैचों में हार का स्वाद चखना पड़ा। वर्ष 1997 से 2006 के दौरान न्यूजीलैंड की धरती पर उनकी कप्तानी में टीम को यह 11 पराजय मिलीं।
इन 11 मैचों की 22 पारियों में फ्लेमिंग ने 25.18 की औसत से कुल 554 रन बनाए। हारी हुई इन पारियों में उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 86 रन रहा। फ्लेमing के बल्ले से भी इन मैचों में कोई शतकीय पारी नहीं निकल सकी, लेकिन उन्होंने 4 अर्धशतक बनाए और 2 बार वे शून्य के स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौटे।



















