सनातन परंपरा में भाद्रपद का पूरा महीना ही पूजा-पाठ और व्रत-अनुष्ठानों के लिए बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। इस मास के कृष्ण पक्ष में जहां श्रीकृष्ण जन्म की भव्य धूम देखने को मिलती है, वहीं शुक्ल पक्ष में हरितालिका तृतीया और ऋषि पंचमी जैसे पावन पर्व मनाए जाते हैं। इसी क्रम में चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी का महाव्रत आता है, जो जगत्पालक भगवान विष्णु के अनंत और कल्याणकारी स्वरूप को समर्पित है। वर्ष 2026 में यह महापर्व शुक्रवार, 25 सितंबर को पूरे श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का दिन मनुष्य के जीवन से हर तरह के कष्ट, भय और दरिद्रता का नाश करने वाला एक अति दुर्लभ अवसर होता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के सहस्रनाम यानी एक हजार पावन नामों का पाठ करने से साधक को अमोघ और अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु के सहस्रनाम का महत्व और मोक्ष की प्राप्ति
वैदिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, अनंत चतुर्दशी की पावन तिथि पर भगवान विष्णु के एक हजार नामों का ध्यान और जाप करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में हुए सभी पाप मिट जाते हैं। इतना ही नहीं, इस दिन की गई आराधना से पूर्व जन्मों के संचित पापों का प्रभाव भी समाप्त हो जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि जो श्रद्धालु इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखकर भगवान श्रीहरि की विधिवत पूजा और स्तुति करते हैं, उनके लिए मोक्ष के मार्ग सहज ही खुल जाते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु इस दिन सुबह से ही स्नान-ध्यान करके भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने में जुट जाते हैं।
14 गांठों वाला अनंत सूत्र: निर्माण विधि और धार्मिक रहस्य
अनंत चतुर्दशी के महापर्व पर सबसे प्रमुख और विशेष आकर्षण 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का होता है। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले कच्चे सूती धागे को कुमकुम अथवा हल्दी के घोल में रंगा जाता है। इसके पश्चात भगवान विष्णु के नाम का ध्यान करते हुए उस धागे में क्रमबद्ध तरीके से 14 गांठें लगाई जाती हैं। शास्त्रों में यह 14 गांठें संपूर्ण ब्रह्मांड के 14 लोकों और भगवान श्रीहरि के 14 दिव्य स्वरूपों का प्रतीक मानी गई हैं। हर एक गांठ को लगाते समय भगवान विष्णु के अलग-अलग रूपों का स्मरण किया जाता है, जिससे वह साधारण धागा एक दिव्य और अभिमंत्रित रक्षा सूत्र में बदल जाता है।
अनंत सूत्र धारण करने के नियम और मिलने वाले लाभ
इस पवित्र अनंत सूत्र को तैयार करने के बाद इसे भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने अर्पित किया जाता है। इसके बाद साधक विष्णु सहस्रनाम का भक्तिपूर्वक जाप करते हैं और पूजा संपन्न होने पर इस सूत्र को अपने हाथ में धारण करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पुरुष साधकों को यह अभिमंत्रित सूत्र अपनी दाईं भुजा या कलाई पर बांधना चाहिए, जबकि महिला साधकों के लिए इसे बाईं भुजा या कलाई पर धारण करने का विधान है। ऐसी अटूट धार्मिक मान्यता है कि 14 गांठों वाला यह अनंत सूत्र इंसान के बड़े से बड़े दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदलने की शक्ति रखता है और साधक को जीवन भर भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा एवं भय से मुक्ति प्रदान करता है।



















