एशियन पैरा गेम्स 2026 के तीसरे दिन भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार कौशल के दम पर ट्रैक और फील्ड में तिरंगे की चमक और बढ़ा दी। स्पर्धाओं के 21 अक्टूबर के शेड्यूल में देश के खाते में दो नए स्वर्ण पदक जुड़े, जिससे भारत के कुल गोल्ड मेडल्स की संख्या बढ़कर 11 पर पहुंच गई। शॉट पुट के मैदान पर जहां आयुष वर्मा ने अपनी शारीरिक सीमाओं को लांघते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया, वहीं हाई जंप के अखाड़े में प्रवीण कुमार ने गेम्स रिकॉर्ड कायम कर स्वर्णिम सफलता दर्ज की। इसी स्पर्धा में बंटी ने भी पोडियम पर जगह बनाकर देश को दोहरी खुशी दी।
शॉट पुट में आयुष वर्मा का पांचवां प्रयास बना स्वर्णिम मोड़
पुरुषों की शॉट पुट एफ53 श्रेणी में आयुष वर्मा ने कड़े मुकाबले के बीच धैर्य और तकनीक का जबर्दस्त तालमेल दिखाया। उन्होंने अपने पांचवें राउंड में 8.16 मीटर की दूरी नापकर प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया और गोल्ड मेडल अपने नाम पक्का कर लिया। आयुष की शुरुआत धीमी मगर सधी हुई रही। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 7.39 मीटर का निशान छुआ और फिर दूसरे प्रयास में सुधार करते हुए 7.42 मीटर तक गोला फेंका। तीसरे दौर में उन्होंने 7.50 मीटर और चौथे में 7.92 मीटर का थ्रो फेंककर बढ़त की तरफ कदम बढ़ाए। पांचवें प्रयास में जब 8.16 मीटर का आंकड़ा आया तो उन्होंने पोडियम के शीर्ष पर कब्जा जमा लिया। छठे और अंतिम थ्रो में उन्होंने 7.54 मीटर की दूरी हासिल की, लेकिन उनका पांचवां प्रयास उन्हें चैंपियन बनाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।
इस स्पर्धा में रजत पदक ईरान के अलीरेजा हेमामी के हिस्से में आया, जिनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 8.09 मीटर दर्ज किया गया। कजाकिस्तान के मखाम्बेट सेरिक्कलियेव 6.81 मीटर के आंकड़े के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में आयुष का यह दूसरा मेडल है। इससे एक दिन पहले, 20 अक्टूबर को उन्होंने पुरुषों की भाला फेंक एफ53/54 प्रतिस्पर्धा में भी कांस्य पदक जीतकर अपने अभियान की मजबूत शुरुआत की थी।
देर से शुरुआत के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच पर बनाई पहचान
15 जुलाई 1991 को जन्मे आयुष वर्मा की खेल यात्रा कई युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अपेक्षाकृत देर से, यानी साल 2020 में प्रतिस्पर्धी पैरा एथलेटिक्स की दुनिया में कदम रखा था। अपने कोच रॉबिन कुमार की निगरानी में उन्होंने एफ53 वर्ग में थ्रोइंग तकनीक को गहराई से सीखा और कम समय में ही अपनी तकनीक में बड़ा सुधार किया। नियमित अभ्यास और मानसिक मजबूती के बल पर उन्होंने बेहद कम समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
आयुष से पहले पुरुषों की भाला फेंक एफ53/54 स्पर्धा में भी भारतीय एथलीटों का जलवा दिखा था। उस स्पर्धा में प्रदीप कुमार ने 27.45 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार रजत पदक हासिल किया था। उसी मुकाबले में आयुष ने 17.88 मीटर का थ्रो किया था और रजा अंक प्रणाली के आधार पर कांस्य पदक अपने नाम करने में सफल रहे थे।
प्रवीण कुमार की रिकॉर्ड छलांग, बंटी ने जीता रजत
पुरुषों की हाई जंप टी44/64 स्पर्धा में भारत का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। स्टार एथलीट प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की ऊंचाई को सफलतापूर्वक पार करते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड स्थापित किया और स्वर्ण पदक जीत लिया। प्रवीण की इस छलांग ने न केवल उन्हें चैंपियन बनाया बल्कि इस स्पर्धा के इतिहास में एक नया कीर्तिमान भी दर्ज कर दिया।
इसी स्पर्धा में भारत के बंटी ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पेश किया। उन्होंने 1.92 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया। उज्बेकिस्तान के तेमुर्बेक गियाजोव 1.86 मीटर की ऊंचाई पार करके कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे। एक ही स्पर्धा में पहले और दूसरे स्थान पर भारतीय झंडे के लहराने से दल के पदकों की सूची में जबर्दस्त उछाल आया और देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया।





















