दिवाली से पहले ही सुबह और शाम के वक्त हल्की ठंडक का अहसास होने लगा है। ठंड के आगमन के साथ ही हवा में प्रदूषण का स्तर भी खतरनाक रूप से बढ़ने लगता है। दिल्ली एनसीआर के लोगों को हर साल इस गंभीर समस्या से दो-चार होना पड़ता है, लेकिन इस बार नवंबर की शुरुआत से पहले ही मौसम में बदलाव साफ नजर आने लगा है। इस मौसमी बदलाव के बीच लोगों को सुबह के समय गले में हल्की खराश महसूस होने लगी है। कई लोगों को नींद से जागते ही हल्के जुकाम की शिकायत बनी रहती है। यह स्थिति और कोई नहीं बल्कि बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण का मिलाजुला दुष्प्रभाव है, जिस पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।
हवा में मौजूद अति सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इसके बाद ये कण फेफड़ों से खून में और फिर पूरे शरीर के अंगों तक फैलकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। शरीर के भीतर पहुंचकर ये गंभीर बीमारियों के जोखिम को तेजी से बढ़ा देते हैं। प्रदूषण की इस जहरीली मार का सबसे बुरा असर हमारे फेफड़ों, आंखों और दिमाग पर पड़ता है, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होने लगती हैं।
एलर्जी से निपटने का अचूक नुस्खा
एलर्जी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए स्वामी रामदेव ने एक बेहद असरदार उपाय सुझाया है। जिन लोगों को सुबह उठकर नाक और गले में असहजता महसूस होती है, लगातार छींके आती हैं या गले में खराश बनी रहती है, उन्हें एक विशेष पाउडर तैयार कर लेना चाहिए। इस पाउडर का सेवन पूरी सर्दीभर करना फायदेमंद रहता है। इस मिश्रण को बनाने के लिए आपको 100 ग्राम बादाम, 20 ग्राम कालीमिर्च और 50 ग्राम शक्कर को आपस में मिलाकर पीसना है। इस तैयार पाउडर की एक चम्मच मात्रा को एक गिलास दूध में डालकर अच्छी तरह उबाल लें। इस पौष्टिक दूध को दिन में कम से कम एक बार नियमित रूप से जरूर पिएं।
कच्ची हल्दी और शिलाजीत वाला दूध
यदि आप बादाम और कालीमिर्च वाला पाउडर तैयार करने में असमर्थ हैं, तो इसका एक आसान विकल्प भी मौजूद है। आप रोजाना दूध में कच्ची हल्दी को अच्छी तरह पकाकर उसका सेवन कर सकते हैं। इस हल्दी वाले दूध में थोड़ा सा शिलाजीत मिला लेना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है। इस विशेष दूध को पीने से आपके फेफड़े स्वस्थ और मजबूत बने रहते हैं, जिससे आप पूरे सर्दियों के मौसम में सेहतमंद और ऊर्जावान महसूस करते हैं। इसके अलावा अपनी रोजाना की दिनचर्या में बेसन की रोटी, मुलेठी और भुने हुए चने को भी अवश्य शामिल करें।
फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए मुलेठी का काढ़ा
प्रदूषण का सबसे गंभीर और घातक असर हमारे फेफड़ों पर ही पड़ता है। फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए आप श्वासारि क्वाथ का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा मुलेठी को पानी में अच्छी तरह उबालकर उसका काढ़ा पीना भी फेफड़ों के लिए बहुत लाभकारी साबित होता है। दिनभर में नियमित रूप से मसाला चाय पीने से भी शरीर को इस प्रदूषण भरे मौसम में काफी फायदा मिलता है।
गले की खराश के लिए घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय
जिन लोगों को गले में लगातार एलर्जी और खराश की समस्या परेशान करती है, उन्हें हल्के गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करने चाहिए। इसके अलावा बादाम के तेल से नस्यम क्रिया करना भी बहुत फायदेमंद होता है। मुलेठी के टुकड़े को चबाने से गले को तुरंत राहत मिलती है और एलर्जी की समस्या धीरे-धीरे दूर होने लगती है। इसके साथ ही रात को सोते समय अपने पैरों के तलवों पर गर्म सरसों का तेल मालिश करें, इससे बहुत आराम मिलता है। अपनी नाभि में कुछ बूंदें सरसों के तेल की डालना और नाक के अंदर भी सरसों का तेल लगाना इस मौसम में होने वाली दिक्कतों से राहत दिलाता है।



















