भारतीय क्रिकेट टीम में हाल ही में हुए बदलावों के बाद से चयन प्रक्रिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दो साल पहले इंग्लैंड के दौरे पर अंशुल कंबोज के पदार्पण से पहले उन्हें लेकर काफी उम्मीदें थीं। उन्हें भविष्य का सितारा माना जा रहा था, लेकिन मैनचेस्टर में खेले गए चौथे और ड्रॉ रहे टेस्ट मैच में उनका प्रदर्शन फीका रहा था। उस मुकाबले में उन्होंने 18 ओवर फेंके और 4.94 की इकॉनमी से 89 रन खर्च करते हुए केवल एक विकेट हासिल किया। इस साधारण प्रदर्शन के बाद उन्हें लंबे समय तक टीम से बाहर रहना पड़ा और चयनकर्ताओं ने अन्य गेंदबाजों को आजमाया। हालांकि, अब हरियाणा के इस तेज गेंदबाज की राष्ट्रीय टीम की योजनाओं में धमाकेदार वापसी हुई है। महज 15 दिन के भीतर उन्हें पहले वनडे में आजमाया गया और अब न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भी टीम में चुन लिया गया है।
इस चयन के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ आलोचकों का मानना है कि अंशुल कंबोज की बजाय आकिब नबी को मौका मिलना चाहिए था, जबकि कुछ अन्य जानकारों की नजर में मुकेश कुमार एक अधिक प्रभावी विकल्प साबित हो सकते थे। तमाम बहसों के बीच यह समझना जरूरी है कि चयनकर्ताओं ने आकिब नबी को नजरअंदाज कर अंशुल कंबोज पर जो दांव खेला है, उसके पीछे ठोस आधार और आंकड़े मौजूद हैं। आइए उन तीन प्रमुख वजहों पर विस्तार से नजर डालते हैं जो यह साबित करती हैं कि यह फैसला बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया कदम है।
घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन
छब्बीस साल के अंशुल कंबोज ने पिछले कुछ समय से घरेलू सर्किट में अपनी गेंदबाजी से लगातार प्रभावित किया है। हाल ही में समाप्त हुए रणजी ट्रॉफी सत्र में उन्होंने हरियाणा के लिए खेलते हुए हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। इस मुकाबले की दोनों पारियों में उन्होंने कुल छह विकेट झटके और अपनी टीम को छह अंकों की अहम जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने पहली पारी में 56 रन देकर चार और दूसरी पारी में मात्र 18 रन देकर दो बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इसके अलावा, उन्होंने पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ‘ए’ के खिलाफ खेले गए मुकाबलों में भी अपनी छाप छोड़ी। पहले मैच में उन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए और दूसरे मैच की दोनों पारियों में भी तीन और शिकार किए। हालांकि 3 अक्टूबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका एकदिवसीय पदार्पण यादगार नहीं रहा था, जहां उन्होंने 17 रन का योगदान जरूर दिया लेकिन 82 रन लुटाने के बावजूद उन्हें कोई सफलता नहीं मिली थी।
करियर के शीर्ष फॉर्म और रिकॉर्ड्स का साथ
अंशुल कंबोज के क्रिकेट करियर में सबसे बड़ा मोड़ घरेलू सत्र 2024-25 के दौरान आया, जब उन्होंने मात्र छह मैचों में ही 34 विकेट चटकाकर सनसनी फैला दी थी। इस दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया और केरल के खिलाफ एक ही पारी में सभी 10 विकेट लेने वाले टूर्नामेंट के इतिहास के केवल तीसरे गेंदबाज बने। उनकी यह लय दलीप ट्रॉफी 2024 में भी जारी रही, जहां उन्होंने तीन मैचों में 16 विकेट चटकाए और शानदार प्रदर्शन के दम पर 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का गौरव हासिल किया। इन बड़े मुकाबलों में लगातार विकेट निकालने की उनकी क्षमता ने उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट में एक भरोसेमंद स्ट्राइक गेंदबाज के रूप में स्थापित कर दिया है, जिसे चयनकर्ता नजरअंदाज नहीं कर सकते थे।
न्यूजीलैंड की पिचों के अनुकूल गेंदबाजी शैली
आगामी मुकाबला न्यूजीलैंड की धरती पर होना है, जहां की पिचें और परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के लिए काफी अनुकूल मानी जाती हैं। अंशुल कंबोज की सीम और स्विंग कराने की क्षमता इन हालातों में भारतीय टीम के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के अनुरूप उन्हें खुद को ढालना होगा, लेकिन यह श्रृंखला उन्हें अपनी काबिलियत साबित करने का बेहतरीन अवसर देगी। यह सीरीज स्पष्ट कर देगी कि उन्होंने अपने शुरुआती अनुभवों से कितना सुधार किया है और वह किसी भी मामले में आकिब नबी से कमतर नहीं हैं।


















