घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी 2026-27 के नए सत्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो चुकी है। न्यूजीलैंड दौरे पर प्रस्तावित 2 मैचों की टेस्ट सीरीज से ठीक पहले भारतीय टीम के कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर लाल गेंद प्रारूप में लय हासिल करने के लिए अपने-अपने राज्यों की घरेलू टीमों की ओर से मैदान में उतरे। इस शुरुआती दौर में कुछ खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं को आश्वस्त किया, तो वहीं कुछ प्रमुख तेज गेंदबाजों के फीके आंकड़ों ने टीम प्रबंधन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने बल्ले और गेंद दोनों से जोरदार खेल दिखाते हुए लय में लौटने का संकेत दिया, जबकि तेज गेंदबाजी आक्रमण के अगुआ मोहम्मद सिराज और युवा गेंदबाज आकिब नबी से जैसी घातक गेंदबाजी की उम्मीद थी, वे वैसा प्रदर्शन करने में सफल नहीं रहे।
छत्तीसगढ़ के खिलाफ रवींद्र जडेजा का शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन
हाल के मुकाबलों में अपने फॉर्म को लेकर चर्चाओं में रहे रवींद्र जडेजा ने रणजी ट्रॉफी के अपने पहले ही मुकाबले में जोरदार वापसी की। सौराष्ट्र की ओर से खेलते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ के खिलाफ मुकाबले में न सिर्फ बल्ले से दम दिखाया, बल्कि अपनी सटीक फिरकी से विपक्षी बल्लेबाजों को भी परेशान किया। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
मुकाबले के दौरान जडेजा ने पहली पारी में ठोस बल्लेबाजी करते हुए 102 रनों की शतकीय पारी खेली, जिसने सौराष्ट्र को 400 रनों के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद जब गेंद उनके हाथ में आई, तो उन्होंने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए 40 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। हालांकि चार दिवसीय मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहली पारी में बढ़त हासिल करने के आधार पर सौराष्ट्र की टीम तीन महत्वपूर्ण अंक अपनी झोली में डालने में सफल रही।
कप्तान मोहम्मद सिराज की टीम जीती, लेकिन गेंदबाजी रही फीकी
रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज हैदराबाद टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एलीट ग्रुप-बी के तहत त्रिपुरा के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में हैदराबाद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक पारी और 40 रनों से एकतरफा जीत दर्ज की। टीम ने भले ही पूरे अंक हासिल कर लिए हों, लेकिन खुद कप्तान सिराज गेंद से कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
त्रिपुरा की पहली पारी में सिराज को एक भी सफलता नहीं मिली और उनकी झोली खाली रही। इसके बाद दूसरी पारी में उन्होंने वापसी की कोशिश की, लेकिन पूरे मैच में उनके हिस्से केवल 2 विकेट ही आए। दोनों पारियों को मिलाकर सिराज ने कुल 18 ओवर्स डाले। टेस्ट सीरीज से ठीक पहले उनके इस कम विकेट वाले प्रदर्शन ने फिटनेस और फॉर्म को लेकर कुछ सवाल जरूर खड़े किए हैं।
आकिब नबी भी 42 ओवर्स फेंकने के बाद निकाल पाए केवल चार विकेट
गत चैंपियन जम्मू-कश्मीर का पहला मुकाबला मध्य प्रदेश की टीम से हुआ, जो अंततः ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि पहली पारी की महत्वपूर्ण बढ़त के दम पर मध्य प्रदेश की टीम तीन अंक हासिल करने में सफल रही। इस मुकाबले में सभी की निगाहें युवा तेज गेंदबाज आकिब नबी पर टिकी थीं, जिनसे गेंदबाजी के अनुकूल माहौल में तूफानी प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी।
मैच के दौरान गेंदबाजों के लिए मुफीद पिच मिलने के बावजूद आकिब नबी धारदार गेंदबाजी करने में नाकाम रहे। उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर कुल 42 ओवर्स की लंबी गेंदबाजी की, लेकिन इतनी मशक्कत के बाद वे केवल 4 विकेट ही चटका सके। महत्वपूर्ण मुकाबलों से पहले नबी की गेंदबाजी में इस तरह की बेअसर गेंदबाजी टीम के लिए चिंता का सबब बन गई है।























