आगामी जनगणना 2027 की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि जनगणना में पूछे जाने वाले जातिगत और व्यक्तिगत सवालों का ढांचा जानबूझकर त्रुटिपूर्ण तैयार किया गया है। पार्टी का कहना है कि इस व्यापक कवायद के पीछे सरकार की एक सोची-समझी योजना छिपी हुई है।
प्रश्नावली और गोपनीयता पर खड़े किए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि धर्म, सटीक जन्मतिथि तथा माता-पिता के जन्मस्थान जैसे सूक्ष्म सवाल देश की पिछली जनगणनाओं में कभी इस तरीके से नहीं पूछे गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। ऐसे में नागरिकों के पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े बेहद निजी सवाल शामिल किए जाने पर गंभीर आशंकाएं पैदा होती हैं।
जातिगत गणना और 40 सवालों का नया ढांचा
आजादी के बाद पहली बार जनगणना के दौरान जाति से जुड़े आंकड़े जुटाने की बात कही गई है। हालांकि, विरोधी दल का दावा है कि जाति संबंधी सवाल पूछने की पद्धति को जानबूझकर गलत रखा गया है। इस बार की जनगणना में कोविड वैक्सीन सेंटर, बैंक खातों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं सहित लगभग 40 सवाल शामिल किए गए हैं। इससे पूर्व जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जातिगत गणना के मूल विचार को दबाने का भी आरोप लगाया था।
डिजिटल प्रक्रिया और उठती चिंताएं
जनगणना की शुरुआत के साथ जम्मू और कश्मीर (J&K) तथा लद्दाख जैसे क्षेत्रों में नागरिकों को खुद विवरण दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। इसके बावजूद, व्यक्तिगत जानकारी और वंशानुगत डेटा जुटाने के तौर-तरीकों को लेकर सवाल कायम हैं।





















