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जनगणना 2027 में जाति और माता-पिता के जन्मस्थान संबंधी सवालों पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमलाभारत
19 अग॰ 2026, 12:43 pm (57 मिनट पहले)· 2

जनगणना 2027 में जाति और माता-पिता के जन्मस्थान संबंधी सवालों पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जनगणना 2027 की प्रश्नावली को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। उनका आरोप है कि जाति, धर्म और माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़े सूक्ष्म सवाल जानबूझकर गलत तरीके से बनाए गए हैं।

आगामी जनगणना 2027 की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि जनगणना में पूछे जाने वाले जातिगत और व्यक्तिगत सवालों का ढांचा जानबूझकर त्रुटिपूर्ण तैयार किया गया है। पार्टी का कहना है कि इस व्यापक कवायद के पीछे सरकार की एक सोची-समझी योजना छिपी हुई है।

प्रश्नावली और गोपनीयता पर खड़े किए सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि धर्म, सटीक जन्मतिथि तथा माता-पिता के जन्मस्थान जैसे सूक्ष्म सवाल देश की पिछली जनगणनाओं में कभी इस तरीके से नहीं पूछे गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना की जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। ऐसे में नागरिकों के पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े बेहद निजी सवाल शामिल किए जाने पर गंभीर आशंकाएं पैदा होती हैं।

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जातिगत गणना और 40 सवालों का नया ढांचा

आजादी के बाद पहली बार जनगणना के दौरान जाति से जुड़े आंकड़े जुटाने की बात कही गई है। हालांकि, विरोधी दल का दावा है कि जाति संबंधी सवाल पूछने की पद्धति को जानबूझकर गलत रखा गया है। इस बार की जनगणना में कोविड वैक्सीन सेंटर, बैंक खातों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं सहित लगभग 40 सवाल शामिल किए गए हैं। इससे पूर्व जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जातिगत गणना के मूल विचार को दबाने का भी आरोप लगाया था।

डिजिटल प्रक्रिया और उठती चिंताएं

जनगणना की शुरुआत के साथ जम्मू और कश्मीर (J&K) तथा लद्दाख जैसे क्षेत्रों में नागरिकों को खुद विवरण दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। इसके बावजूद, व्यक्तिगत जानकारी और वंशानुगत डेटा जुटाने के तौर-तरीकों को लेकर सवाल कायम हैं।

सवाल-जवाब

जनगणना 2027 पर कांग्रेस ने क्या मुख्य आरोप लगाया है?
कांग्रेस का आरोप है कि जनगणना 2027 में जाति, धर्म और माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़े सवाल पूछने का तरीका जानबूझकर गलत और त्रुटिपूर्ण बनाया गया है।
जनगणना 2027 में कितने सवाल पूछे जा रहे हैं?
इस जनगणना में लगभग 40 सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनमें बैंक खातों की संख्या, कोविड वैक्सीन का स्थान और पारिवारिक विवरण शामिल हैं।
क्या आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति पूछी जा रही है?
जी हां, आजादी के बाद यह पहली बार है जब जनगणना प्रक्रिया में जाति संबंधी आंकड़े दर्ज करने का प्रावधान शामिल किया गया है।
किन क्षेत्रों में डिजिटल सेल्फ-न्यूमरेशन की सुविधा दी गई है?
जम्मू-कश्मीर (J&K) और लद्दाख जैसे क्षेत्रों के निवासी अपनी जानकारी स्वयं डिजिटल रूप से दर्ज कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

जनगणना जैसे वृहद प्रशासनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अभियान में इतने विस्तृत व्यक्तिगत और वंशानुगत आंकड़े जुटाए जाना नीतिगत और कानूनी दोनों दृष्टियों से संवेदनशील विषय है। जब नागरिकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि, जन्मस्थान और डिजिटल डेटा को एक साथ संग्रहित किया जा रहा है, तब डेटा सुरक्षा अधिनियम और गोपनीयता के अधिकारों का सख्ती से पालन होना अनिवार्य है। यदि इन संवेदनशील जानकारियों के संकलन और रख-रखाव में जरा भी प्रशासनिक चूक हुई, तो यह नागरिकों की निजता के हनन के साथ-साथ बड़े कानूनी विवादों का कारण बन सकता है। आने वाले समय में यह मामला अदालत के दरवाजे तक भी पहुंच सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 मिनट पहले

करण मल्होत्रा द्वारा उठाए गए निजता और डेटा सुरक्षा के बिंदुओं को आगे बढ़ाते हुए यह स्पष्ट है कि 40 प्रश्नों के इस डिजिटल ढांचे और वंशानुगत डेटा संकलन का सीधा असर वित्तीय बाज़ारों, कॉर्पोरेट अनुपालन और फिनटेक सेक्टर पर पड़ेगा। जब बैंक खातों और डिजिटल एसेट्स से जुड़े विवरण वृहद स्तर पर जुड़ेंगे, तो कंपनियों और निवेशकों के लिए डेटा लोकलाइजेशन तथा साइबर सुरक्षा के नए और कड़े अनुपालन मानक अनिवार्य हो जाएंगे। यदि इस प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक चूक हुई, तो यह न सिर्फ कानूनी विवादों को जन्म देगी, बल्कि निवेशकों के बीच डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ा सकती है, जिसका असर दीर्घकालिक आर्थिक रुझानों पर पड़ सकता है।

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