फर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासपुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौतीसावन में बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है, एक गलती से बेकार हो सकती है पूजाक्विंस की मेरिनो वूल टी-शर्ट बाजार में क्यों मचा रही है धूमवियतनाम में आर्थिक रफ्तार 2027 तक रहेगी तेज, 11 फीसदी तक पहुंच सकती है विकास दरड्यून: पार्ट थ्री का फाइनल ट्रेलर रिलीज, पॉल अत्रेइदेस और चानी के बीच भयंकर टकराव की झलकयमन से मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद रियाद में धमाके, उधर होर्मुज में तेल टैंकर में लगी आगअमेरिकी डॉलर की मजबूती से टूटा यूरो, तकनीकी स्तर पर 1.1113 का अहम सपोर्ट क्षेत्र बेहद संवेदनशीलऐप्पल ने जारी किया iOS 27.2 अपडेट, सिरी एआई में नई भाषाएं और सुरक्षा पैच शामिलजीमेल और ड्राइव के डेटा से गूगल दिखा रहा विज्ञापन, ऐसे रोकें
भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 420 रन ठोकने वाले सोनल दिनुशा की कहानी, बहन ने कर्ज लेकर खरीदा था पहला बल्लाक्रिकेट
28 अग॰ 2026, 2:09 pm (61 दिन पहले)· 4

भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 420 रन ठोकने वाले सोनल दिनुशा की कहानी, बहन ने कर्ज लेकर खरीदा था पहला बल्ला

श्रीलंका के 25 वर्षीय ऑलराउंडर सोनल दिनुशा ने भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में 420 रन बनाकर अपनी टीम को हार से बचाया। बास्केटबॉल से क्रिकेट में आए सोनल के पास शुरुआत में बल्ला तक नहीं था, जिसे उनकी बहन ने उधार लेकर खरीदा था।

श्रीलंका के 25 वर्षीय ऑलराउंडर सोनल दिनुशा ने भारत के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में एक नया इतिहास रच दिया है। कोलंबो टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शानदार शतक जड़कर भारतीय टीम की संभावित जीत को अकेले दम पर टालने वाले सोनल रातों-रात पूरे श्रीलंका में नायक बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक कुल पांच टेस्ट मैच खेल चुके इस प्रतिभावान ऑलराउंडर ने पूरी सीरीज के दौरान अपने बल्ले का लोहा मनवाया। उन्होंने गॉल और कोलंबो के मैदानों पर खेले गए दो मैचों की चार पारियों में 3 शतकों की मदद से कुल 420 रन बनाए। हालांकि, सफलता के इस शिखर तक पहुंचने का सोनल का यह सफर बेहद संघर्षपूर्ण और भावुक कर देने वाला रहा है।

बास्केटबॉल के पाले से क्रिकेट के मैदान तक का अनोखा सफर

सोनल दिनुशा के शुरुआती जीवन में क्रिकेट उनकी पहली पसंद नहीं था। बचपन में उन्हें बास्केटबॉल खेलने का बहुत शौक था और वे पूरी लगन के साथ बास्केटबॉल कोर्ट पर पसीना बहाते थे। हालांकि, जब वे करीब 11 या 12 साल के थे, तब उनके स्कूल के कोच सुसंथा फेलिक्स डियास की नजर उन पर पड़ी। डियास ने उन्हें पहली बार क्रिकेट खेलते देखा और उनके स्वाभाविक खेल से प्रभावित होकर उन्हें स्कूल की क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया। उस समय सोनल के पास क्रिकेट का कोई सामान या बल्ला तक नहीं था।

ये भी पढ़ें

सोनल का परिवार बेहद तंगहाली और आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे खेल उपकरण खरीद सकें। ऐसे कठिन समय में सोनल की बहन आगे आईं और उन्होंने दूसरों से पैसे उधार लेकर अपने छोटे भाई के लिए एक क्रिकेट बल्ला खरीदा। यह बल्ला सोनल के जीवन का पहला क्रिकेट बल्ला था, जिससे उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की। सोनल अपने पिता, माता, भाइयों और बहनों से भावनात्मक रूप से बहुत गहरे जुड़े हुए हैं। पारिवारिक संकट और जीवन की कठोर वास्तविकताओं से अपना ध्यान हटाने के लिए ही उन्होंने खेल को जरिया बनाया था और यही वजह है कि वे अपने परिवार की तरह ही क्रिकेट से भी बेहद गहराई से जुड़ गए।

भारतीय स्पिन आक्रमण से निपटने की खास रणनीति

भारत के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से कुछ दिन पहले सोनल ने अपने बचपन के विश्वसनीय कोच अशान प्रियांजन को फोन किया था। सोनल की यह आदत रही है कि वे हर बड़े मैच से पहले अपने कोच को फोन करके रणनीतियों पर चर्चा करते हैं। इस बार उन्होंने फोन पर कहा कि भारत के पास हर तरह के विश्वस्तरीय स्पिनर मौजूद हैं, इसलिए श्रृंखला के लिए बहुत अच्छी और ठोस तैयारी करनी होगी। यही बातचीत उनके अभ्यास का मुख्य बिंदु बन गई।

कोच प्रियांजन ने सोनल को वर्षों पहले सलाह दी थी कि अगर उपमहाद्वीप में स्पिनरों के खिलाफ सफलता हासिल करनी है, तो स्वीप शॉट पर पूरी महारत हासिल होना जरूरी है। इस गुरुमंत्र को अपनाकर सोनल ने नेट अभ्यास में लगभग दो घंटे सिर्फ और सिर्फ स्वीप शॉट खेलने का अभ्यास किया। जब मैदान पर भारत के बाएं हाथ के स्पिनर रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और ऑफ-स्पिनर सारांश जैन गेंदबाजी करने आए, तो सोनल ने अपने इस अभ्यास का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने इन सभी गेंदबाजों की गेंदों को स्वीप शॉट के जरिए लगातार सीमा रेखा के पार भेजकर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह से कुंद कर दिया।

जो रूट का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा और मैच के बाद दिखाया बेमिसाल समर्पण

सोनल दिनुशा ने गॉल और कोलंबो टेस्ट मैचों में बनाए गए अपने कुल 420 रनों में से 173 रन अकेले स्वीप शॉट के जरिए बनाए। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने किसी एक टेस्ट सीरीज में स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट से सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट के नाम दर्ज था, जिन्होंने एक सीरीज में स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट खेलते हुए 160 रन बनाए थे। सोनल ने 173 रन बनाकर जो रूट के इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

सोनल के खेल के प्रति जुनून और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण कोलंबो टेस्ट के अंतिम दिन देखने को मिला। भारत की जीत को रोकने और अपनी टीम के लिए मैच ड्रॉ कराने के कुछ ही घंटों के भीतर सोनल जश्न मनाने के बजाय सीधे नेट पर अभ्यास करने चले गए। उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धियों का जश्न मनाना कोई मायने नहीं रखता था। उनके कोच प्रियांजन के अनुसार, 11 या 12 साल की उम्र से ही सोनल के अंदर क्रिकेट को लेकर जो लगन और उत्साह उन्होंने देखा था, उसी का सुखद परिणाम आज मैदान पर देखने को मिल रहा है। 25 वर्षीय यह खिलाड़ी केवल अपनी कड़ी मेहनत पर विश्वास रखता है और यही उनकी सफलता का मुख्य राज है।

सवाल-जवाब

सोनल दिनुशा ने भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में कुल कितने रन बनाए?
सोनल दिनुशा ने भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज में तीन शतकों की मदद से कुल 420 रन बनाए।
स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट से रन बनाने में सोनल दिनुशा ने किसका रिकॉर्ड तोड़ा?
सोनल दिनुशा ने एक टेस्ट सीरीज में स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट से 173 रन बनाकर इंग्लैंड के जो रूट (160 रन) का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
सोनल दिनुशा को उनका पहला क्रिकेट बल्ला किसने और कैसे दिलाया था?
पारिवारिक आर्थिक तंगी के कारण सोनल दिनुशा की बहन ने पैसे उधार लेकर उन्हें पहला क्रिकेट बल्ला तोहफे में दिया था।
क्रिकेट में आने से पहले सोनल दिनुशा की रुचि किस खेल में थी?
क्रिकेट में आने से पहले सोनल दिनुशा की रुचि बास्केटबॉल में थी, जिसके बाद स्कूल कोच सुसंथा फेलिक्स डियास ने उन्हें क्रिकेट टीम में शामिल किया।
सोनल दिनुशा ने अपने बचपन के कोच से भारतीय स्पिनरों के खिलाफ क्या रणनीति बनाई थी?
सोनल दिनुशा ने कोच अशान प्रियांजन से बात कर रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और सारांश जैन से निपटने के लिए स्वीप शॉट का 2 घंटे नेट में लगातार अभ्यास किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp