श्रीलंका के 25 वर्षीय ऑलराउंडर सोनल दिनुशा ने भारत के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में एक नया इतिहास रच दिया है। कोलंबो टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शानदार शतक जड़कर भारतीय टीम की संभावित जीत को अकेले दम पर टालने वाले सोनल रातों-रात पूरे श्रीलंका में नायक बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक कुल पांच टेस्ट मैच खेल चुके इस प्रतिभावान ऑलराउंडर ने पूरी सीरीज के दौरान अपने बल्ले का लोहा मनवाया। उन्होंने गॉल और कोलंबो के मैदानों पर खेले गए दो मैचों की चार पारियों में 3 शतकों की मदद से कुल 420 रन बनाए। हालांकि, सफलता के इस शिखर तक पहुंचने का सोनल का यह सफर बेहद संघर्षपूर्ण और भावुक कर देने वाला रहा है।
बास्केटबॉल के पाले से क्रिकेट के मैदान तक का अनोखा सफर
सोनल दिनुशा के शुरुआती जीवन में क्रिकेट उनकी पहली पसंद नहीं था। बचपन में उन्हें बास्केटबॉल खेलने का बहुत शौक था और वे पूरी लगन के साथ बास्केटबॉल कोर्ट पर पसीना बहाते थे। हालांकि, जब वे करीब 11 या 12 साल के थे, तब उनके स्कूल के कोच सुसंथा फेलिक्स डियास की नजर उन पर पड़ी। डियास ने उन्हें पहली बार क्रिकेट खेलते देखा और उनके स्वाभाविक खेल से प्रभावित होकर उन्हें स्कूल की क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया। उस समय सोनल के पास क्रिकेट का कोई सामान या बल्ला तक नहीं था।
सोनल का परिवार बेहद तंगहाली और आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे खेल उपकरण खरीद सकें। ऐसे कठिन समय में सोनल की बहन आगे आईं और उन्होंने दूसरों से पैसे उधार लेकर अपने छोटे भाई के लिए एक क्रिकेट बल्ला खरीदा। यह बल्ला सोनल के जीवन का पहला क्रिकेट बल्ला था, जिससे उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की। सोनल अपने पिता, माता, भाइयों और बहनों से भावनात्मक रूप से बहुत गहरे जुड़े हुए हैं। पारिवारिक संकट और जीवन की कठोर वास्तविकताओं से अपना ध्यान हटाने के लिए ही उन्होंने खेल को जरिया बनाया था और यही वजह है कि वे अपने परिवार की तरह ही क्रिकेट से भी बेहद गहराई से जुड़ गए।
भारतीय स्पिन आक्रमण से निपटने की खास रणनीति
भारत के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से कुछ दिन पहले सोनल ने अपने बचपन के विश्वसनीय कोच अशान प्रियांजन को फोन किया था। सोनल की यह आदत रही है कि वे हर बड़े मैच से पहले अपने कोच को फोन करके रणनीतियों पर चर्चा करते हैं। इस बार उन्होंने फोन पर कहा कि भारत के पास हर तरह के विश्वस्तरीय स्पिनर मौजूद हैं, इसलिए श्रृंखला के लिए बहुत अच्छी और ठोस तैयारी करनी होगी। यही बातचीत उनके अभ्यास का मुख्य बिंदु बन गई।
कोच प्रियांजन ने सोनल को वर्षों पहले सलाह दी थी कि अगर उपमहाद्वीप में स्पिनरों के खिलाफ सफलता हासिल करनी है, तो स्वीप शॉट पर पूरी महारत हासिल होना जरूरी है। इस गुरुमंत्र को अपनाकर सोनल ने नेट अभ्यास में लगभग दो घंटे सिर्फ और सिर्फ स्वीप शॉट खेलने का अभ्यास किया। जब मैदान पर भारत के बाएं हाथ के स्पिनर रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और ऑफ-स्पिनर सारांश जैन गेंदबाजी करने आए, तो सोनल ने अपने इस अभ्यास का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने इन सभी गेंदबाजों की गेंदों को स्वीप शॉट के जरिए लगातार सीमा रेखा के पार भेजकर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह से कुंद कर दिया।
जो रूट का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा और मैच के बाद दिखाया बेमिसाल समर्पण
सोनल दिनुशा ने गॉल और कोलंबो टेस्ट मैचों में बनाए गए अपने कुल 420 रनों में से 173 रन अकेले स्वीप शॉट के जरिए बनाए। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने किसी एक टेस्ट सीरीज में स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट से सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट के नाम दर्ज था, जिन्होंने एक सीरीज में स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट खेलते हुए 160 रन बनाए थे। सोनल ने 173 रन बनाकर जो रूट के इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
सोनल के खेल के प्रति जुनून और समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण कोलंबो टेस्ट के अंतिम दिन देखने को मिला। भारत की जीत को रोकने और अपनी टीम के लिए मैच ड्रॉ कराने के कुछ ही घंटों के भीतर सोनल जश्न मनाने के बजाय सीधे नेट पर अभ्यास करने चले गए। उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धियों का जश्न मनाना कोई मायने नहीं रखता था। उनके कोच प्रियांजन के अनुसार, 11 या 12 साल की उम्र से ही सोनल के अंदर क्रिकेट को लेकर जो लगन और उत्साह उन्होंने देखा था, उसी का सुखद परिणाम आज मैदान पर देखने को मिल रहा है। 25 वर्षीय यह खिलाड़ी केवल अपनी कड़ी मेहनत पर विश्वास रखता है और यही उनकी सफलता का मुख्य राज है।



















