पाकिस्तान के लिए 50 टेस्ट मैच खेल चुके पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मुख्य चयनकर्ता इकबाल कासिम ने देश के मौजूदा खिलाड़ियों की सोच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि नए दौर के खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने और अपने खेल में सुधार लाने के बजाय वित्तीय फायदों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
कौशल और खेल की समझ से ज्यादा कमाई पर ध्यान
इकबाल कासिम के अनुसार, वर्तमान पीढ़ी के खिलाड़ियों में अपनी तकनीक, खेल की समझ और बुनियादी बारीकियों को निखारने के लिए आवश्यक मेहनत और प्रतिबद्धता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जर्सी पहनना किसी भी एथलीट के लिए सर्वोच्च सम्मान होना चाहिए। हालांकि, वर्तमान में युवा खिलाड़ियों का मुख्य ध्यान खेल के प्रति समर्पण से हटकर कमाई बढ़ाने पर केंद्रित हो चुका है।
बदलते दौर में भी सफलता का मूल मंत्र वही
पिछले कुछ दशकों में क्रिकेट के प्रारूप और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव आया है। इसके बावजूद इकबाल कासिम का कहना है कि मैदान पर सफलता प्राप्त करने का बुनियादी नियम आज भी अपरिवर्तित है। किसी भी खिलाड़ी की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपनी तकनीकी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने में कितना समय और प्रयास लगाता है। पाकिस्तान क्रिकेट में इस व्यक्तिगत प्रयास और आत्ममंथन की भारी कमी देखी जा रही है।
कोचिंग स्टाफ और डेटा पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता
पूर्व स्पिनर ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक क्रिकेटर स्वयं की गलतियों का विश्लेषण करने के बजाय सहायक स्टाफ, कोच और डेटा विश्लेषकों पर अत्यधिक निर्भर हो गए हैं। खिलाड़ी खुद बैठकर मैच की परिस्थितियों और अपनी बल्लेबाजी या गेंदबाजी के पहलुओं को समझने का पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं। कासिम ने कहा, "मेरे हिसाब से देश के लिए खेलना ही किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा इनाम है।" उनका तर्क है कि जब कोई खिलाड़ी अपने प्रदर्शन और गुणवत्ता में निरंतरता लाता है, तो वित्तीय लाभ स्वतः ही मिलने लगते हैं।
चयन प्रक्रिया और दूरदर्शिता पर उठे सवाल
मौजूदा चयन समिति की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए इकबाल कासिम ने टीम चयन में निरंतरता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि उनके दौर में चयनकर्ता बिना किसी वेतन या वित्तीय शुल्क के केवल मानद आधार पर अपनी सेवाएं देते थे और पूरी निष्ठा के साथ देश के लिए निर्णय लेते थे।



















