15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश का बरेली शहर देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आता है। शहर भर में स्थापित वीरता की प्रतिमाएं और स्मारक हर देशवासी को उन अमर शहीदों की याद दिलाते हैं, जिनके सर्वोच्च बलिदान से भारत को आजादी मिली। इस खास मौके पर स्थानीय नागरिक और युवा हाथों में तिरंगा थामकर इन ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचते हैं। वे शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करते हैं, तस्वीरें खिंचवाते हैं और देश के लिए उनके अनुपम त्याग एवं समर्पण को नमन करते हैं। बरेली की मिट्टी में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति, संघर्ष और वीर सैनिकों के पराक्रम की अनेक ऐतिहासिक कहानियां रची-बसी हैं।
कैंट क्षेत्र और सेंट स्टीफेंस चर्च का ऐतिहासिक सैन्य जुड़ाव
बरेली का छावनी यानी कैंट क्षेत्र शुरुआती दौर से ही ब्रिटिश सैन्य व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे से गहराई से जुड़ा रहा है। इसी दौर में निर्मित सेंट स्टीफेंस चर्च ब्रिटिश सेना और यहां रहने वाले अंग्रेज अधिकारियों तथा उनके परिवारों की धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना था। स्थापत्य कला की यह प्राचीन इमारत आज भी दो शताब्दियों से अधिक का इतिहास संजोए हुए है। चर्च की पुरानी दीवारों पर पीतल और संगमरमर से बनी कई स्मृतियों की पट्टिकाएं मौजूद हैं। ये पट्टिकाएं ब्रिटिश रेजिमेंटों में अपनी सेवाएं देने वाले अफसरों और सैनिकों की याद में लगाई गई थीं, जो इस स्थान के ऐतिहासिक सैन्य महत्व को उजागर करती हैं।
1999 के कारगिल युद्ध में कैप्टन पंकज अरोड़ा का अमर बलिदान
देश की सीमाओं की सुरक्षा में बरेली के वीर सपूतों का योगदान सदैव स्मरणीय रहा है। भारतीय सेना के साहसी अधिकारी कैप्टन पंकज अरोड़ा ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया था। जम्मू-कश्मीर के बर्फीले और दुर्गम क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ चलाए गए 'ऑपरेशन विजय' में उन्होंने वीरतापूर्वक मुकाबला किया और देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बरेली के लोग कैप्टन पंकज अरोड़ा के चित्र और स्मारकों पर जाकर उन्हें नमन करते हैं और उनके अमर बलिदान को याद करते हैं।
मीरानपुर कटरा का युद्ध और 200 साल पुराना ऐतिहासिक कब्रिस्तान
बरेली में स्थित एक प्राचीन कब्रिस्तान का इतिहास 200 वर्षों से भी अधिक पुराना है। ऐतिहासिक घटनाक्रम के अनुसार, जब मीरानपुर कटरा का प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया था, तब अवध के नवाब की सेना का सहयोग करने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज भी मैदान में उतरी थी। उस भीषण संघर्ष में ईस्ट इंडिया कंपनी के कई अंग्रेज सैनिक और उच्च अधिकारी मारे गए थे। मारे गए सैनिकों को दफनाने के लिए इस स्थान का उपयोग किया गया, जहां से इस कब्रिस्तान की शुरुआत हुई। बाद में वर्ष 1889 में इस स्थान को आधिकारिक तौर पर व्यवस्थित और व्यवस्थित रूप प्रदान किया गया था।
क्रांति का प्रमुख केंद्र रहा बरेली कॉलेज और आजादी के आंदोलन
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान निर्मित बरेली कॉलेज का इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है। स्वतंत्रता संग्राम के समय यह कॉलेज केवल पठन-पाठन का संस्थान नहीं था, बल्कि क्रांतिकारियों की गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका था। आजादी के आंदोलन के दौरान इस कॉलेज से जुड़े सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ देशव्यापी बड़े आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और अनशन चलाए। 15 अगस्त के दिन शहर के लोग और छात्र इस ऐतिहासिक कॉलेज की इमारत को देखने पहुंचते हैं और देश की आजादी से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हैं।
कमिश्नरी परिसर का ऐतिहासिक बरगद और 257 देशभक्तों की शहादत
सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बरेली के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की चूले हिला दी थीं। जब ब्रिटिश सेना ने दोबारा बरेली पर अपना नियंत्रण कायम किया, तो उन्होंने इस विद्रोह को कुचलने के लिए बर्बरता की हदें पार कर दीं। वर्तमान समय में कलेक्ट्रेट या कमिश्नरी परिसर में स्थित प्राचीन बरगद का पेड़ उस ब्रिटिश क्रूरता का मूक गवाह बना हुआ है। अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों में खौफ फैलाने के उद्देश्य से इसी बरगद के पेड़ पर एक साथ 257 देशभक्तों को फांसी की सजा दी थी। यह ऐतिहासिक बरगद आज भी वहां सुरक्षित खड़ा है और बलिदानियों की गाथा सुनाता है।
स्वामी विवेकानंद चौक और कैंट के देशभक्ति थीम वाले चौराहे
स्वतंत्रता पर्व के अवसर पर बरेली जिला प्रशासन की ओर से नगरवासियों को स्वामी विवेकानंद चौक का एक विशेष उपहार मिला है। इस नए चौक की मनमोहक तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। आजादी का पर्व मनाने के लिए युवा और नागरिक महापुरुषों के इन चौराहों पर पहुंचकर उन्हें नमन करते हैं और फूल-मालाएं अर्पित करते हैं। बरेली सदर एवं कैंट क्षेत्र में ऐसे कई चौराहे विकसित किए गए हैं, जो देशभक्ति की भावना से लबरेज हैं। युवा वर्ग इन चौराहों पर जाकर वीडियो सेल्फी और रील बनाते हैं तथा सोशल मीडिया पर साझा करते हैं।





















