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जमशेदपुर के मैदान से विश्व कप जीत तक महेंद्र सिंह धोनी का सफर, सौरव गांगुली की पारखी नजर ने कैसे गढ़ा स्वर्णिम दौरक्रिकेट
12 अग॰ 2026, 11:18 pm (2 दिन पहले)· 0

जमशेदपुर के मैदान से विश्व कप जीत तक महेंद्र सिंह धोनी का सफर, सौरव गांगुली की पारखी नजर ने कैसे गढ़ा स्वर्णिम दौर

भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का सफर जमशेदपुर के एक छोटे मैदान से शुरू हुआ था। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने बिना किसी को बताए उनका मैच देखा और इंडिया ए में मौका देकर एक नए युग की शुरुआत कर दी।

महेंद्र सिंह धोनी का नाम सुनते ही भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के मन में 2007 का टी20 विश्व कप, 2011 का वनडे विश्व कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी की वे ऐतिहासिक तस्वीरें उभर आती हैं, जिन्होंने देश में क्रिकेट का नजारा ही बदल दिया। 2004 से 2019 तक भारतीय जर्सी में मैदान पर उतरे धोनी को आज दुनिया के महानतम कप्तानों और मैच फिनिशरों में गिना जाता है। हालांकि, इतने विशाल करियर की नींव एक साधारण से मैदान पर रखी गई थी, जहां तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की पारखी नजरों ने इस बेमिसाल प्रतिभा को पहचान लिया था। छोटे शहरों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहराने वाले खिलाड़ियों की कहानियों में धोनी का यह किस्सा बेहद प्रेरणादायक माना जाता है।

जमशेदपुर में सौरव गांगुली का गुप्त दौरा और सबा करीम की सलाह

जब महेंद्र सिंह धोनी अपने शुरुआती दिनों में घरेलू क्रिकेट के गलियारों में अपनी पहचान बना रहे थे, तब उनके पास न तो किसी बड़ी क्रिकेट अकादमी का ठप्पा था और न ही कोई मजबूत सिफारिश। उनके पास केवल अपनी सहज ताकत और गेंदों को बाउंड्री पार भेजने की अद्भुत क्षमता थी। सौरव गांगुली, जो हमेशा आक्रामक और नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते थे, ने एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान इस शुरुआती दौर का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि धोनी जब जमशेदपुर में मैच खेल रहे थे, तब वे खुद बिना किसी ढोल-नगाड़े के चुपचाप उनका खेल देखने स्टेडियम पहुंचे थे।

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उस समय मैदान पर खेल रहे धोनी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के कप्तान स्टेडियम के एक कोने में खड़े होकर उनकी हर शॉट पर बारीक नजर रख रहे हैं। उसी मैच के दौरान पूर्व क्रिकेटर सबा करीम ने गांगुली का ध्यान धोनी की तरफ खींचते हुए कहा था कि यह युवा खिलाड़ी बहुत लंबे और गगनचुंबी छक्के लगाने में माहिर है। गांगुली ने धोनी की बल्लेबाजी की निडरता और गेंद को हिट करने की टाइमिंग को बड़े ध्यान से देखा और महसूस किया कि इस खिलाड़ी के पास कुछ खास हुनर है।

'इंडिया ए' टीम में सीधा दाखिला और वानखेड़े स्टेडियम का कारनामा

धोनी के खेल को देखने के बाद सौरव गांगुली ने बिना कोई समय गंवाए उन्हें सीधे 'इंडिया ए' टीम में शामिल करवाने का फैसला लिया। गांगुली का मानना था कि यदि असाधारण प्रतिभा वाले युवा खिलाड़ी को बहुत लंबे समय तक केवल घरेलू क्रिकेट के धीमे तंत्र में छोड़ दिया जाए, तो उसका स्वाभाविक जोश और हमलावर अंदाज धीरे-धीरे कम पड़ सकता है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समय पर बड़ा मंच देना ही उन्हें विश्व स्तरीय एथलीट बनाने की पहली शर्त होती है।

इसके बाद गांगुली की ही कप्तानी में धोनी को मुंबई के मशहूर वानखेड़े स्टेडियम में एक बड़े मैच में खेलने का मौका मिला। धोनी ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए न केवल एक शानदार शतकीय पारी खेली, बल्कि अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैदान में मौजूद हर दर्शक को हैरान कर दिया। उस मुकाबले में धोनी के बल्ले से निकले विशाल छक्के सीधे वानखेड़े स्टेडियम की छत से जाकर टकराए थे। उनकी इस आक्रामक पारी को देखकर गांगुली पूरी तरह आश्वस्त हो चुके थे कि धोनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोकने का मतलब भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम भविष्य के रास्ते में रुकावट डालना होगा।

2004 का अंतरराष्ट्रीय पदार्पण और 2007 में टी20 विश्व कप की ऐतिहासिक कप्तानी

साल 2004 में पहली बार भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मैदान पर कदम रखने वाले धोनी ने बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली। उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और विकेट के पीछे बिजली जैसी फुर्तीली विकेटकीपिंग ने चयनकर्ताओं और प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताते हुए युवा भारतीय टीम की कप्तानी उन्हें सौंप दी।

साल 2007 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले टी20 विश्व कप में धोनी की अगुवाई वाली युवा भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। किसी भी तरह के दबाव से दूर रहकर खेलने वाली इस टीम ने फाइनल में जीत दर्ज की और टी20 विश्व कप का पहला खिताब अपने नाम करके इतिहास रच दिया। इस जीत ने न केवल भारतीय क्रिकेट में टी20 प्रारूप का नया दौर शुरू किया, बल्कि धोनी की नेतृत्व क्षमता को भी पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया।

तीन आईसीसी सफेद गेंद ट्रॉफियां जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान

2007 की ऐतिहासिक जीत तो सिर्फ एक लंबे और सफल दौर की शुरुआत थी। धोनी की शांत मानसिकता, चतुर रणनीति और दबाव के क्षणों में सही फैसले लेने की कला ने भारतीय क्रिकेट को सफलता के नए शिखरों पर पहुंचाया। टी20 विश्व कप जीतने के चार साल बाद, यानी 2011 में, भारत ने धोनी की कप्तानी में 28 साल का लंबा इंतजार खत्म करते हुए 50-ओवर का विश्व कप अपने नाम किया। मुंबई में खेले गए फाइनल मुकाबले में धोनी का वह ऐतिहासिक छक्का आज भी हर भारतीय क्रिकेट प्रशंसक की यादों में बसा हुआ है।

इसके बाद साल 2013 में इंग्लैंड में खेली गई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी को जीतकर धोनी ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो आज तक बरकरार है। वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में अकेले ऐसे कप्तान बन गए, जिनकी झोली में आईसीसी की तीनों प्रमुख सफेद गेंद ट्रॉफियां टी20 विश्व कप, 50-ओवर विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी मौजूद हैं।

16 साल के करियर में 538 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का शानदार रिकॉर्ड

आंकड़ों के नजरिए से देखें तो 2004 से 2019 तक फैला धोनी का 16 साल का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने तीनों प्रारूपों को मिलाकर भारत के लिए कुल 538 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। इस लंबे और यादगार सफर में उन्होंने 350 वनडे मुकाबले खेले, जिनमें कई बार हार के करीब पहुंच चुके मैचों को अपनी शानदार मैच फिनिशिंग क्षमता के दम पर जीत में तब्दील किया।

वनडे के अलावा, धोनी ने 90 टेस्ट मैचों में लाल गेंद के प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व और कप्तानी की। उनकी कप्तानी के दौरान ही भारतीय टीम पहली बार टेस्ट क्रिकेट की विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंची थी। वहीं, 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी, चतुर कप्तानी और स्टंपिंग के अनोखे रिकॉर्ड दर्ज किए।

न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतिम मैच और 15 अगस्त की भावुक विदाई

हर महान खेल यात्रा का एक समापन होता है और धोनी के अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत भी बेहद भावुक क्षणों के साथ हुआ। जुलाई 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला गया विश्व कप का सेमीफाइनल मुकाबला उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ। इस मैच के बाद से ही प्रशंसकों को उनकी वापसी का इंतजार था, लेकिन धोनी ने अपने संन्यास के लिए एक बहुत ही शांत और सादगी भरा रास्ता चुना।

साल 2020 में 15 अगस्त के दिन, जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब शाम को 7:29 बजे धोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक सादा सा वीडियो साझा किया। इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा कि उनके सफर में मिले प्यार और समर्थन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, और 1929 बजे से उन्हें रिटायर माना जाए। जमशेदपुर के एक छोटे से मैदान से शुरू होकर विश्व विजेता बनने तक का धोनी का यह सफर साबित करता है कि जब अटूट जुनून को सही मार्गदर्शन मिलता है, तो इतिहास की रचना होती है।

सवाल-जवाब

सौरव गांगुली ने महेंद्र सिंह धोनी का मैच पहली बार कहां देखा था?
सौरव गांगुली ने जमशेदपुर में एक स्थानीय क्रिकेट मैच के दौरान चुपचाप बिना किसी को बताए धोनी को खेलते देखा था।
गांगुली को धोनी के छक्के मारने के हुनर के बारे में किसने बताया था?
पूर्व क्रिकेटर सबा करीम ने गांगुली का ध्यान धोनी की तरफ खींचते हुए बताया था कि वह खिलाड़ी लंबे छक्के मारने में उस्ताद है।
महेंद्र सिंह धोनी ने किस साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था?
महेंद्र सिंह धोनी ने साल 2004 में पहली बार भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था।
धोनी की कप्तानी में भारत ने कौन-कौन सी तीन आईसीसी ट्रॉफियां जीतीं?
भारत ने 2007 में टी20 विश्व कप, 2011 में 50-ओवर वनडे विश्व कप और 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी धोनी की कप्तानी में जीती।
महेंद्र सिंह धोनी ने संन्यास की घोषणा कब और कैसे की थी?
धोनी ने 15 अगस्त 2020 को शाम 7:29 बजे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट करके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी।
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