अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में जब किसी टीम के सामने विशाल लक्ष्य खड़ा होता है, तो दबाव का स्तर सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण पलों में कुछ खिलाड़ी अपनी तकनीक, आक्रामकता और मानसिक दृढ़ता के दम पर पूरे मुकाबले का पासा पलट देते हैं। रन चेज के दौरान जब कोई बल्लेबाज अकेले संघर्ष करते हुए मैदान के चारों ओर रनों की बरसात करता है, तो वह मुकाबला इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है। पचास ओवर के प्रारूप में दूसरी पारी के दौरान दर्ज किए गए सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोरों पर नजर डालें तो इस सूची में शीर्ष स्थान पर नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं, जहां बल्लेबाजों ने अविश्वसनीय दोहरा शतक जड़कर अपनी टीमों को यादगार जीत दिलाई है।
गुवाहाटी में शुभमन गिल का ऐतिहासिक दोहरा शतक
साल 2026 में गुवाहाटी के मैदान पर खेला गया एकदिवसीय मुकाबला क्रिकेट जगत में हमेशा के लिए विशेष पहचान बना चुका है। इस मैच में वेस्टइंडीज की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों की कड़ी परीक्षा ली और निर्धारित पचास ओवरों में 7 विकेट पर 405 रनों का विशाल पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। मैदान पर मौजूद दर्शकों और क्रिकेट विशेषज्ञों को यह लक्ष्य लगभग असंभव लग रहा था। लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल जब क्रीज पर आए, तो उन्होंने एक नए इतिहास की पटकथा लिखनी शुरू की।
गिल ने अपनी पारी के शुरुआती दौर में बेहद नपी-तुली बल्लेबाजी की और परिस्थितियों का आकलन किया। इसके बाद उन्होंने कैरेबियाई गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। कवर ड्राइव, पुल और कलात्मक क्लासिकल शॉट्स के जरिए उन्होंने मैदान के हर कोने में रन बटोरे। पारी के 29वें ओवर में वेस्टइंडीज के गेंदबाज जयडेन सील्स के खिलाफ गिल और विराट कोहली ने मिलकर जबरदस्त प्रहार किए और उस एक ही ओवर में 25 रन जोड़ डाले। शतक पूरा करने के बाद गिल ने दोहरा शतक बनाने में बेहद कम गेंदें लीं। मैच का समापन होने तक गिल 223 रन बनाकर नाबाद रहे। यह एकदिवसीय इतिहास में लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया, जिसने तीन साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
वानखेड़े में ग्लेन मैक्सवेल की साहसिक और अविश्वसनीय पारी
साल 2023 के एकदिवसीय विश्व कप के दौरान मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया मुकाबला क्रिकेट के सबसे चमत्कारी मैचों में गिना जाता है। अफगानिस्तान के खिलाफ 292 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही थी। केवल 91 रनों के कुल योग पर ऑस्ट्रेलिया के सात शीर्ष बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे और टीम पूरी तरह से हार की कगार पर खड़ी दिखाई दे रही थी।
ऐसी विषम परिस्थितियों में ग्लेन मैक्सवेल ने क्रीज संभाली और मुकाबले का नक्शा ही बदल दिया। बल्लेबाजी के दौरान मैक्सवेल को शरीर की मांसपेशियों में भीषण ऐंठन और भयंकर दर्द का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वह दौड़कर रन लेने में भी असमर्थ हो रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा और केवल अपनी बाहों और ऊपरी शरीर की ताकत के सहारे अविश्वसनीय छक्कों की झड़ी लगा दी। दर्द से जूझते हुए मैक्सवेल ने नाबाद 201 रनों की जादुई पारी खेली और अकेले दम पर ऑस्ट्रेलिया को हारी हुई बाजी जिताकर पवेलियन लौटे। रन चेज में यह विश्व कप के इतिहास का पहला दोहरा शतक था।
जोहान्सबर्ग में फखर जमान का अकेला बहादुराना संघर्ष
साल 2021 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग स्थित वांडरर्स स्टेडियम में खेला गया मुकाबला पाकिस्तानी बल्लेबाज फखर जमान की जुझारू पारी के लिए याद किया जाता है। मेजबान दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कोरबोर्ड पर एक बड़ा लक्ष्य खड़ा कर दिया था। जवाब में खेलने उतरी पाकिस्तान टीम का शीर्ष क्रम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाता रहा और दूसरे छोर से बल्लेबाजों का टिकना मुश्किल हो गया।
दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों के आक्रमण के सामने जब अन्य साथी खिलाड़ी संघर्ष कर रहे थे, तब फखर जमान ने अकेला मोर्चा संभाला। उन्होंने मैदान के चारों तरफ शानदार स्ट्रोक खेले और अफ्रीकी गेंदबाजी आक्रमण पर करारा प्रहार किया। फखर अपनी शानदार 193 रनों की पारी के साथ टीम को जीत के बेहद करीब ले जाने में सफल रहे। हालांकि, अंतिम पलों में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वह रन आउट हो गए और पाकिस्तान यह मुकाबला जीतने से चूक गया। इसके बावजूद लक्ष्य का पीछा करते हुए खेली गई यह पारी एकदिवसीय क्रिकेट की सबसे साहसिक पारियों में गिनी जाती है।
मीरपुर में शेन वाटसन के गगनचुंबी छक्कों का तूफान
साल 2011 में बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज शेन वाटसन ने बल्ले से ऐसा कोहराम मचाया जिसने विरोधी टीम के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। बांग्लादेश द्वारा दिए गए अपेक्षाकृत सामान्य लक्ष्य का पीछा करते हुए वाटसन ने एकदिवसीय मैच को टी-20 शैली में तब्दील कर दिया।
पारी की पहली ही गेंद से आक्रामक रवैया अपनाते हुए वाटसन ने मैदान पर चौकों और छक्कों की झड़ी लगा दी। उन्होंने अपनी नाबाद 185 रनों की पारी के दौरान 15 चौके और 15 विशाल गगनचुंबी छक्के जड़े। वाटसन के इस प्रचंड प्रहार के सामने बांग्लादेशी गेंदबाजों को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला और ऑस्ट्रेलिया ने बेहद कम ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया। रन चेज में बाउंड्री के जरिए सबसे तेज गति से मुकाबला खत्म करने का यह एक नायाब उदाहरण बना।
जयपुर में एमएस धोनी और मीरपुर में विराट कोहली के 183 रन
लक्ष्य का पीछा करते हुए बड़ी पारियों की बात हो तो भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज कप्तानों का योगदान सदैव सबसे आगे रहता है। साल 2005 में जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में एमएस धोनी ने नाबाद 183 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे धोनी ने अपने लंबे बालों वाले शुरुआती दौर में हेलीकॉप्टर शॉट्स और शक्तिशाली प्रहारों से श्रीलंकाई गेंदबाजों को पस्त कर दिया। इस पारी ने धोनी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई पहचान दी।
इसके कुछ वर्षों बाद, साल 2012 के एशिया कप में मीरपुर के मैदान पर विराट कोहली ने पाकिस्तान के खिलाफ यही 183 रनों का व्यक्तिगत स्कोर बनाया। पाकिस्तान द्वारा दिए गए 330 रनों के बड़े लक्ष्य के सामने कोहली ने असाधारण नियंत्रण और आक्रामकता का परिचय दिया। सईद अजमल और उमर गुल जैसे मजबूत गेंदबाजी आक्रमण का सहजता से सामना करते हुए कोहली की इस पारी ने भारत को यादगार जीत दिलाई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ रन चेज मास्टर के रूप में स्थापित किया।



















