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रणजी ट्रॉफी में रनों का अंबार लगाने वाले रिंकू सिंह पर क्यों है टी-20 स्पेशलिस्ट होने का ठप्पाक्रिकेट
13 अक्तू॰ 2026, 4:38 pm (14 दिन पहले)· 5

रणजी ट्रॉफी में रनों का अंबार लगाने वाले रिंकू सिंह पर क्यों है टी-20 स्पेशलिस्ट होने का ठप्पा

रिंकू सिंह घरेलू लाल गेंद के क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अक्सर सिर्फ टी-20 फॉर्मेट का खिलाड़ी मानकर नजरअंदाज किया जाता है।

फिल्म जगत में अस्सी और नब्बे के दशक के दौरान कलाकारों को एक खास दायरे में बांध दिया जाता था। उस दौर में अभिनेता और अभिनेत्रियों पर कोई न कोई ठप्पा लग जाता था कि कौन एक्शन हीरो है, कौन रोमांटिक भूमिकाओं के लिए बना है और कौन सिर्फ हास्य कलाकार है। इसके बाद उन्हें उसी छवि के अनुसार फिल्में मिलती थीं। हालांकि आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है और कलाकार हर तरह की भूमिकाएं निभा रहे हैं, जबकि निर्माता और निर्देशक भी जोखिम उठाने से पीछे नहीं हटते हैं।

कुछ इसी तरह की मानसिकता इन दिनों क्रिकेट के खेल में खिलाड़ियों के साथ भी देखने को मिल रही है। आज के समय में कई बल्लेबाजों को केवल टेस्ट खिलाड़ी या फिर विशेष तौर पर टी-20 खिलाड़ी के रूप में देखा जाने लगा है। इस तरह के ठप्पे विशेष रूप से बल्लेबाजों के करियर को सीमित कर रहे हैं। इस स्थिति का सबसे बड़ा शिकार रिंकू सिंह जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हो रहे हैं, जो हर प्रारूप में अपनी उपयोगिता साबित करने की काबिलियत रखते हैं।

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रणजी ट्रॉफी में रिंकू सिंह का शानदार प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी रिंकू सिंह ने 2026-27 के रणजी सीजन में बिहार के खिलाफ मुकाबले के दौरान 168 गेंदों का सामना करते हुए 112 रनों की बेहतरीन पारी खेली। राजगीर में मौजूद कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस मैच को देखने के बाद इस बात पर चर्चा की कि रिंकू सिंह लंबे समय से लाल गेंद के क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें केवल टी-20 का फिनिशर मानकर सीमित कर दिया गया है। यदि उनके रणजी ट्रॉफी के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो किसी को भी हैरान कर सकते हैं।

रिंकू सिंह भारत के उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शामिल हैं जो अपनी स्थापित छवि को लगातार चुनौती देते हैं और हर प्रारूप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। इसके बावजूद उन पर टी-20 विशेषज्ञ का ठप्पा लगाकर अन्य प्रारूपों के लिए उनकी दावेदारी को खारिज कर दिया जाता है। रणजी ट्रॉफी में उनका औसत 68.08 का रहा है। उन्होंने अपने करियर के 54 फर्स्ट क्लास मैचों में 10 शतकों की मदद से कुल 3869 रन बनाए हैं। इसके अलावा 2018-19 के सत्र में उन्होंने 10 मैचों में 105.88 की शानदार औसत के साथ 953 रन बनाए थे। उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ क्रिकेटरों का मानना है कि यह चयनकर्ताओं की एक बड़ी गलतफहमी है कि रिंकू केवल टी-20 के खिलाड़ी हैं। उनके पास वह तकनीक और संयम दोनों मौजूद हैं जो लंबे प्रारूप के क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी हैं।

भारतीय टीम से दूरी और घरेलू क्रिकेट में वापसी की कोशिश

वर्ष 2026 का विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहने के बाद से रिंकू सिंह राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे हैं। हाल ही में समाप्त हुई इंग्लैंड, आयरलैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ श्रृंखलाओं के लिए उन्हें टीम में जगह नहीं दी गई थी। वर्ष 2026 के विश्व कप के पांच मैचों में रिंकू केवल 24 रन ही बना पाए थे। मुख्य कोच गौतम गंभीर की निचले क्रम में गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की रणनीति के कारण शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर को तो अवसर मिला, लेकिन रिंकू सिंह अपनी जगह बरकरार नहीं रख सके। अब रिंकू घरेलू क्रिकेट में लाल गेंद के मुकाबलों में लगातार रन बनाकर अपने ऊपर लगे इस सीमित प्रारूप के ठप्पे को हटाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

रिंकू सिंह का रणजी ट्रॉफी में औसत कितना है?
रिंकू सिंह रणजी ट्रॉफी में 68.08 की औसत से रन बनाते आ रहे हैं।
रिंकू सिंह ने बिहार के खिलाफ मैच में कितने रन बनाए?
उन्होंने 2026-27 के रणजी सीजन में बिहार के खिलाफ 168 गेंदों पर 112 रन बनाए।
रिंकू सिंह ने अब तक कितने फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं?
उन्होंने अपने करियर में 54 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं जिनमें उन्होंने 10 शतकों की मदद से 3869 रन बनाए हैं।
किन खिलाड़ियों को रिंकू सिंह की जगह टीम में प्राथमिकता दी गई?
गौतम गंभीर की रणनीति के तहत शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और नमन धीर को टीम में जगह दी गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·13 दिन पहले

किसी पर भी ठप्पा लगाना बहुत आसान होता है, चाहे वह फिल्मों में हो या क्रिकेट में। रिंकू अपनी काबिलियत लगातार साबित कर रहे हैं, फिर भी उन्हें एक ही फॉर्मेट तक सीमित कर देना बिल्कुल गलत है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·13 दिन पहले

रिंकू सिंह का 68 का औसत कोई छोटी बात नहीं है! फिल्म इंडस्ट्री की तरह अब क्रिकेट में भी खिलाड़ियों को एक ही रोल में बांध देना बिल्कुल गलत है। इतने शानदार फर्स्ट क्लास आंकड़ों के बावजूद टेस्ट या वनडे के लिए उनका नाम न सोचना चयनकर्ताओं की बड़ी नासमझी है।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·13 दिन पहले

तन्वी जी, औसत वाकई तगड़ा है पर अंक और मैदान की हकीकत में फर्क होता है। क्या पता उनके अंकों में लंबे प्रारूप का योग अभी बाकी हो?

Amit Patel@amit-patel·13 दिन पहले

रिंकू सिंह का फर्स्ट क्लास औसत इतना शानदार है फिर भी चयनकर्ताओं की नजरों में उन पर टी-20 का ठप्पा क्यों लग गया है, यह बात समझ से परे है। क्या घरेलू क्रिकेट के इतने बड़े आंकड़े भी टेस्ट टीम में जगह दिलाने के लिए काफी नहीं हैं?

Divya Reddy@divya-reddy·13 दिन पहले

अमित जी, बिल्कुल सही बात कही आपने। इतने शानदार औसत के बाद भी चयनकर्ताओं की मानसिकता आखिर कब बदलेगी?

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