घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के युवा ओपनर बल्लेबाज प्रियांश आर्या ने अपने अद्भुत खेल से सभी का दिल जीत लिया है। रणजी ट्रॉफी के एक रोमांचक मुकाबले में गुजरात के खिलाफ मैदान पर उतरे इस बाएं हाथ के खिलाड़ी ने शानदार बल्लेबाजी का मुजाहिरा किया और अपने दोहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गए। हालांकि, वह सिर्फ एक रन से इस बड़े आंकड़े को छूने से चूक गए और 199 रन बनाकर आउट हो गए। इस ऐतिहासिक मैच में आयुष बडोनी ने भी दोहरा शतक जड़ा था, लेकिन प्रियांश की यह विस्फोटक पारी मैदान पर मुख्य आकर्षण का केंद्र रही।
पालम बी स्टेडियम में खेली गई 220 गेंदों की शानदार पारी
राजधानी दिल्ली और गुजरात के बीच यह मुकाबला पालम बी स्टेडियम में खेला गया था। इस मैच में प्रियांश आर्या ने मैदान के चारों तरफ बेहतरीन स्ट्रोक खेले और गेंदबाजों पर पूरी तरह दबाव बनाए रखा। उन्होंने अपनी इस मैराथन पारी के दौरान सिर्फ 220 गेंदों का सामना किया और 199 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस दौरान उन्होंने कुल 24 चौके और 6 ऊंचे छक्के जड़े। अपनी तेजतर्रार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने महज़ 125 गेंदों पर ही अपना शतक पूरा कर लिया था। जब वह अपने दोहरे शतक से महज एक कदम दूर थे, तब मानव हिंगराजिया की एक गेंद पर उनका विकेट गिर गया। इस धमाकेदार प्रदर्शन के दम पर दिल्ली की टीम ने अपनी पहली पारी में 648/6 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया, जिसमें कप्तान आयुष बडोनी के 217 रन भी शामिल थे।
लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए प्रियांश की सकारात्मक प्रतिक्रिया
एक रन से दोहरा शतक छूट जाने के बावजूद प्रियांश आर्या निराश नजर नहीं आए। अपनी इस पारी के बारे में बात करते हुए उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया। प्रियांश ने कहा, जो मिला, उससे खुश हूं। उनका मानना है कि इस तरह के छोटे अंतर से चूकना खेल का हिस्सा है और भविष्य में उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के और भी कई अवसर मिलेंगे। इसलिए वह बीती हुई बात पर ज्यादा सोचने के बजाय आने वाले मुकाबलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
रणजी ट्रॉफी और टेस्ट क्रिकेट का महत्व
पारंपरिक लाल गेंद के क्रिकेट के बारे में चर्चा करते हुए प्रियांश ने बताया कि हर युवा खिलाड़ी का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टेस्ट क्रिकेट इस खेल का सर्वोच्च प्रारूप है और वहां तक पहुंचने के लिए रणजी ट्रॉफी सबसे मजबूत सीढ़ी है। उनके अनुसार, यह घरेलू टूर्नामेंट खिलाड़ियों को अपनी तकनीक को मांजने और मैदान पर लंबी पारियां खेलने के लिए प्रेरित करता है, जिससे उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।


















